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Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी पर पढ़ें पावन कथा, सफलता और विजय का मिलता है आशीर्वाद

Indira Ekadashi 6 Oct 2026

Indira Ekadashi 6 Oct 2026

Vijaya Ekadashi Vrat Katha: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 13 फरवरी, शुक्रवार को मनाया जा रहा हैं। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के कार्यों में सफलता मिलती है। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं।

क्या है विजया एकादशी का महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजया एकादशी का व्रत व्यक्ति को हर क्षेत्र में विजय दिलाने वाला माना गया है। जीवन में आ रही बाधाएं, शत्रु बाधा या कार्यों में रुकावट इन सबको दूर करने के लिए यह व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी का प्रभाव व्यक्ति को मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।

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विजया एकादशी की पौराणिक कथा

त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम माता सीता की खोज में लंका जाने की तैयारी कर रहे थे, तब उनके सामने समुद्र पार करने की बड़ी चुनौती थी। उस समय उन्होंने महर्षि वशिष्ठ से मार्गदर्शन लिया। ऋषि ने उन्हें फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

कथा के अनुसार भगवान श्रीराम ने अपने भाई लक्ष्मण, भक्त हनुमान और पूरी वानर सेना के साथ विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत रखा और भगवान विष्णु की आराधना की। व्रत के प्रभाव से उन्हें समुद्र पार करने में सफलता मिली और अंततः लंका पर विजय प्राप्त हुई।

एक अन्य प्रसंग में बताया गया है कि भगवान श्रीकृष्ण ने भी धर्मराज युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्व बताया था और इसे विजय प्रदान करने वाला कहा था।

विजया एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 फरवरी 2026, दोपहर 12:22 बजे

एकादशी तिथि समाप्त: 13 फरवरी 2026, दोपहर 2:25 बजे

व्रत पारण तिथि: 14 फरवरी 2026

पारण का समय: सुबह 7:07 बजे से 9:26 बजे तक

द्वादशी समाप्ति: 14 फरवरी 2026, शाम 4:01 बजे

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कैसे करें पूजा?

इस दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप, धूप, पुष्प और तुलसी अर्पित की जाती है। विष्णु सहस्रनाम या विष्णु मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखते हैं और अगले दिन पारण के समय व्रत का समापन करते हैं।

अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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