
एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): अक्षय कुमार और सैफ अली खान की 18 साल बाद हुई जोड़ी एक बार फिर पर्दे पर धमाका करने लौट आई है, लेकिन इस बार मुकाबला सिर्फ दो दमदार सितारों का नहीं, बल्कि दिमाग बनाम इंस्टिंक्ट्स का है। प्रियदर्शन की ‘हैवान’ एक ऐसे खतरनाक बिल्ली-चूहे के खेल में ले जाती है, जहां अक्षय कुमार का परशुराम अपनी खामोश और खौफनाक मौजूदगी से डर पैदा करता है, तो सैफ अली खान का श्याम अपनी सबसे बड़ी कमजोरी यानी आंखों की रोशनी न होने को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेता है।
एक तरफ हैवानियत, दूसरी तरफ हिम्मत और चालाकी दोनों की टक्कर में हर अगला पल रोमांच से भरा है। अक्षय-सैफ की जबरदस्त भिड़ंत के साथ फिल्म में एक्शन, सस्पेंस, ट्विस्ट और ऐसे सरप्राइज हैं, जो इसे एक मसालेदार और एंटरटेनिंग थ्रिलर बना देते हैं।
‘हैवान’ की कहानी एक ऐसे खतरनाक खेल पर टिकी है, जहां आमना-सामना है बेहद चालाक और बेरहम विलेन परशुराम का और नेत्रहीन शख्स श्याम का। एक तरफ परशुराम की ताकत, आत्मविश्वास और ऐसी चालें हैं, जिनका अंदाजा लगाना आसान नहीं, तो दूसरी तरफ श्याम अपनी आंखों की रोशनी खोने के बावजूद अपनी तेज समझ, जबरदस्त इंस्टिंक्ट्स और हिम्मत के दम पर उसके सामने डटकर खड़ा होता है। लेकिन ये जंग सिर्फ हाथापाई और एक्शन तक सीमित नहीं है।
दोनों के बीच शुरू होता है दिमाग और रणनीति का ऐसा खेल, जहां हर कदम के साथ खतरा बढ़ता जाता है। श्याम के लिए चुनौती सिर्फ परशुराम से बचने की नहीं, बल्कि खुद को और अपने करीबियों को सुरक्षित रखने की भी है। इसी खतरनाक चूहे बिल्ली के खेल में फिल्म लगातार नए मोड़ और सस्पेंस लेकर आती है, जिससे हर पल यही सवाल बना रहता है कि आखिर बाजी किसके हाथ लगेगी।
परफॉर्मेंस के लिहाज से ‘हैवान’ की सबसे बड़ी ताकत अक्षय कुमार और सैफ अली खान हैं, जो अपने-अपने किरदारों में पूरी तरह उतर जाते हैं। अक्षय कुमार ने परशुराम के किरदार को सिर्फ गुस्सैल विलेन बनाकर नहीं छोड़ा, बल्कि अपनी शांत बॉडी लैंग्वेज, कंट्रोल्ड एक्सप्रेशंस और अचानक बदलते तेवरों से उसे बेहद खतरनाक और डरावना बनाया है।
वहीं सैफ अली खान श्याम के किरदार में शानदार नजर आते हैं। नेत्रहीन किरदार को उन्होंने बिना किसी ओवरड्रामा के बेहद सहजता से निभाया है और उनके हाव-भाव में दिखने वाला ठहराव श्याम की समझदारी, हिम्मत और तेज इंस्टिंक्ट्स को और असरदार बनाता है। दोनों के आमने-सामने वाले सीन्स फिल्म के सबसे दमदार हिस्सों में हैं, जहां अक्षय और सैफ की अलग-अलग अभिनय शैलियां इस टकराव को और रोमांचक बना देती हैं।
पहल चौधरी भी फिल्म में एक अच्छा सरप्राइज हैं। उन्होंने अपने किरदार की मासूमियत, इमोशन और आत्मविश्वास को शानदार तरीके से बैलेंस किया है। सैयामी खेर, श्रिया पिलगांवकर और बोमन ईरानी भी अपने-अपने किरदारों में प्रभावित करते हैं और कहानी को जरूरी सपोर्ट देते हैं। वहीं शारिब हाशमी पुलिस ऑफिसर के रोल में काफी नेचुरल लगते हैं और उनके हिस्से कहानी के जांच-पड़ताल वाले पहलू को मजबूती मिलती है।
दिग्गज अभिनेता असरानी की मौजूदगी भी फिल्म में खास महसूस होती है। वह अपने किरदार में ऐसा इमोशनल रंग भरते हैं, जो फिल्म के लगातार बने रहने वाले तनाव के बीच एक अलग तरह का एहसास देता है। कुल मिलाकर, ‘हैवान’ की कास्ट सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का काम नहीं करती, बल्कि हर कलाकार अपने किरदार में कुछ ऐसा जोड़ता है, जिससे फिल्म का ड्रामा और थ्रिल दोनों ज्यादा असरदार बनते हैं।
प्रियदर्शन की बात करें तो डायरेक्टर ने ‘हैवान’ को सिर्फ एक सिंपल एक्शन-थ्रिलर न बनने से बचाते हुए इसके सस्पेंस, इमोशन और साइकोलॉजिकल टेंशन को अच्छी तरह साथ लेकर चले हैं। फिल्म का चूहे-बिल्ली का खेल हर टकराव के साथ और दिलचस्प होता जाता है और दर्शक लगातार इस सोच में रहते हैं कि अगली चाल किसकी होगी।
प्रियदर्शन ने अक्षय कुमार और सैफ अली खान के किरदारों के बीच के संघर्ष को कहानी का सेंटर रखा है, जिसकी वजह से दोनों की भिड़ंत सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि दिमाग और रणनीति की लड़ाई भी बन जाती है। 2 घंटे 44 मिनट के लंबे रनटाइम के बावजूद फिल्म ज्यादातर हिस्सों में अपनी पकड़ बनाए रखती है और एक्शन, इमोशन व थ्रिल का सही तड़का इसे बड़े पर्दे वाली एंटरटेनमेंट फील देता है। खास बात यह है कि प्रियदर्शन ने फिल्म को सिर्फ अक्षय और सैफ के स्टारडम के भरोसे नहीं छोड़ा, बल्कि उनके किरदारों की ताकत, कमजोरियों और आपसी टकराव को कहानी की असली ताकत बनाया है।
फिल्म के म्यूजिक की बात करें तो प्रीतम ने कहानी के मूड और इमोशंस को ध्यान में रखते हुए अच्छा काम किया है। खासकर बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के सस्पेंस और तनाव को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। जैसे-जैसे परशुराम और श्याम के बीच टकराव बढ़ता है, म्यूजिक भी माहौल को उतना ही टाइट करता जाता है, जिससे एक्शन और कॉन्फ्रंटेशन वाले सीन्स का असर और बढ़ जाता है। वहीं ‘मेरे हीरो हैं’ इमोशनल पलों में कहानी की भावनाओं को उभारता है और किरदारों की फीलिंग्स से कनेक्ट करता है। ‘रंगियारा’ जैसे गाने ट्रैवल वाले हिस्सों में कहानी को एक फ्रेश और अलग वाइब देते हैं। कुल मिलाकर, फिल्म का म्यूजिक कहानी से अलग-थलग महसूस नहीं होता, बल्कि इसके सस्पेंस, इमोशन और पेस को लगातार सपोर्ट करता है।
प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी एडॉप्टेशन होने के बावजूद ‘हैवान’ सिर्फ ओरिजिनल फिल्म की कहानी को दोहराती हुई नजर नहीं आती। प्रियदर्शन ने हिंदी वर्जन में कहानी की ट्रीटमेंट, किरदारों की स्टेजिंग और इमोशनल पलों को नए अंदाज में पेश करने की कोशिश की है, जिससे फिल्म को अपना अलग कमर्शियल फ्लेवर मिलता है। मूल कहानी के सस्पेंस और उसकी कोर भावना को बरकरार रखते हुए इसे हिंदी ऑडियंस की पसंद और अक्षय कुमार-सैफ अली खान की स्टार पावर के हिसाब से ढाला गया है। यही वजह है कि ‘हैवान’ में ओरिजिनल फिल्म की झलक तो मिलती है, लेकिन इसका ट्रीटमेंट अपने आप में अलग महसूस होता है। ऊपर से मोहनलाल की स्पेशल अपीयरेंस फिल्म को ‘ओप्पम’ से एक खास कनेक्शन देती है, जो ओरिजिनल फिल्म के फैंस के लिए एक दिलचस्प सरप्राइज बनकर सामने आता है।
अगर सवाल है कि ‘हैवान’ क्यों देखनी चाहिए, तो इसका सबसे बड़ा कारण है अक्षय कुमार और सैफ अली खान की 18 साल बाद हुई वापसी और उनके बीच होने वाला जबरदस्त आमना-सामना। अक्षय का डार्क और खतरनाक अवतार जहां खूब डराता है, वहीं सैफ का शांत लेकिन दमदार अंदाज कहानी को मजबूती देता है। दोनों की टक्कर फिल्म को शुरू से आखिर तक बांधे रखती है। इसके अलावा पहल चौधरी का सरप्राइजिंग ट्रैक, प्रियदर्शन का टाइट डायरेक्शन, लगातार बना रहने वाला सस्पेंस, असरदार बैकग्राउंड म्यूजिक और बड़े पर्दे पर देखने लायक एक्शन इसे एक कम्प्लीट थिएट्रिकल पैकेज बनाते हैं। अगर आपको साइकोलॉजिकल थ्रिलर, चूहे-बिल्ली का खेल, जबरदस्त ट्विस्ट और दो दमदार एक्टर्स की भिड़ंत पसंद है, तो ‘हैवान’ बड़े पर्दे पर देखने वाली एक मस्ट वॉच फिल्म है।
डायरेक्टर – प्रियदर्शन
कास्ट – सैफ अली खान, अक्षय कुमार, बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर, सैयामी खेर, मोहनलाल, असरानी, शारिब हाशमी
ड्यूरेशन – 2h44m
रेटिंग – 4 स्टार्स
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