Last Updated: October 6, 2026

Dainik Savera Times Logo

Ali Fazal एक बार फिर मंच पर धमाकेदार वापसी, ‘महानगर जुगनू’ से जगमगाएगा फ्रिंज फेस्टिवल

February 27, 2026

Ali Fazal एक बार फिर मंच पर धमाकेदार वापसी, ‘महानगर जुगनू’ से जगमगाएगा फ्रिंज फेस्टिवल

एंटरटेनमेंट डेस्क: अभिनेता अली फज़ल अब एक नई और खास भूमिका में नज़र आएंगे – एक नाटक को प्रस्तुत करने की भूमिका में। पहली बार अली फज़ल “महानगर जुगनू” नामक नाटक को प्रेज़ेंट कर रहे हैं, जिसे मशहूर नाटककार अमितोष नागपाल ने लिखा और निर्देशित किया है।

यह नाटक ले’ चक्कल्स नाम के एक खास फ्रिंज फेस्टिवल का हिस्सा होगा, जो बेबाक कला, निडर आवाज़ों और नई रचनात्मक सोच का जश्न मनाता है। इस फेस्टिवल का निर्माण रवि श्रीवास्तव ने आर्टिसन कोटरी के तहत किया है और इसे मंडली टॉकीज़ × आर्टिसन कोटरी द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है। यह हफ्ते भर चलने वाला फेस्टिवल कलाकार और दर्शकों के बीच की दूरी को मिटाकर एक अनोखा सांस्कृतिक अनुभव देने का वादा करता है।

बगावत, जिज्ञासा और समुदाय की भावना से जन्मा ले’ चक्कल्स अपने स्थल को कला के एक जीवंत मैदान में बदल देता है। इस फेस्टिवल में थिएटर, कविता, कहानी सुनाना, स्टैंड-अप कॉमेडी, रैप बैटल, बीटबॉक्सिंग, ओपन माइक, म्यूजिक गिग्स, बड़े कॉन्सर्ट, कॉफी रेव, वर्कशॉप्स, फूड स्टॉल और आर्टिजन मार्केट जैसी कई गतिविधियां शामिल हैं। हर कोना रचनात्मक सहयोग, खोज और संवाद का केंद्र बन जाता है।

मुंबई में 25 फरवरी से 1 मार्च तक चलने वाला यह अपने तरह का पहला फेस्टिवल है, जिसमें थिएटर, बुक रीडिंग, कविता सत्र, किताबों का लॉन्च और वर्कशॉप्स जैसे कई अनोखे कार्यक्रम शामिल होंगे। इसके अलावा दस्तानगोई, “जो डूबा सो पार”, “किस्सेबाज़ी”, वरुण ग्रोवर का स्टैंड-अप एक्ट और कई अन्य खास प्रस्तुतियां भी फेस्टिवल का हिस्सा होंगी।

इस पूरे आयोजन का केंद्र है “महानगर जुगनू”, जो एक भावनात्मक और प्रभावशाली नाट्य प्रस्तुति है, जो शहर की जिंदगी की धड़कन, उसकी कविता और उसके विरोधाभासों को मंच पर जीवंत करती है।

अपने इस जुड़ाव पर अली फज़ल कहते हैं, “थिएटर हमेशा मेरा पहला प्यार रहा है। यहीं मैंने सुनना, समझना और किरदार को जीना सीखा। ‘महानगर जुगनू’ के लिए प्रेज़ेंटर बनना मेरे लिए जैसे एक पूरा चक्र पूरा होने जैसा है। अमितोष ने एक ऐसी कहानी लिखी है जो बहुत निजी होते हुए भी हर किसी से जुड़ती है। ले’ चक्कल्स की बाग़ी और सामुदायिक भावना इस कहानी के लिए बिल्कुल सही मंच है। मुझे उन आवाज़ों का साथ देने में खुशी है जो सोचने पर मजबूर करती हैं और दर्शकों को गहराई से छूती हैं – जैसा सिर्फ लाइव परफॉर्मेंस कर सकता है।”

ले’ चक्कल्स सिर्फ एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जिसे महसूस किया जाता है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें