
मुंबई: अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए, अनुपम खेर ने अपने जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना सुनाई और अपने दोस्त राजन लाल को उनकी जÞरूरत के समय मदद करने के लिए धन्यवाद दिया। अनुभवी अभिनेता ने इंस्टाग्राम पर राजन के साथ अपना एक वीडियो पोस्ट किया और कहा. ’दोस्तों, आज मैं आपको अपने एक बहुत प्यारे दोस्त राजन लाल से मिलवाना चाहता हूं। हर कोई उन्हें पहले से ही जानता है और मेरे करियर में मदद करने में उनकी भूमिका अहम रही है। मुझे वह समय याद है जब मैं मुंबई की गलियों में संघर्ष कर रहा था, वह राजन ही थे जो मेरी मदद के लिए आए थे और मैं इनका बेहद आभारी हूं। ऐसा खासतौर पर इसलिए है क्योंकि जब आप सबसे बुरे दौर में होते हैं तो कोई आपकी मदद नहीं करता है।’
उन्होंने आगे कहा, ’जब मैं लगातार शहर की गलियों में इधर-उधर धक्के खा रहा था, तो उन्होंने मुझे भोजन और आगे बढ़ने का हौसला दिया था। आज मैं 39 साल बाद दुबई में उनके घर पर उनसे मिल रहा हूं।’अनुपम ने राजन से पूछा: ‘तुम्हें उस समय से मेरे बारे में क्या याद है?‘मुस्कुराते हुए, राजन ने उत्तर दिया, ’अनुपम के बारे में मेरी याददाश्त यह है कि पुराने दिनों में वह सफेद कुर्ता पायजामा पहनते थे, वह आटो से आते थे और मेरे घर की घंटी बजाते थे। मैं ग्राउंड फ्लोर पर रहता था और मेरी जगह छोटी थी। यह एक गैराज, या एक आउटहाउस जैसी चीज थी, मैं उसे बुलाता था और नाश्ता कराता था। उनकी जो भी जरूरत होती, मैं सुनता था और जब भी संभव हो मदद करता था।’
राजन ने आगे कहा, ’मैं वास्तव में उनके पैशन और डेडिकेशन से प्रभावित हुआ था। आज वह जो भी इंसान हैं, वह अपने पैशन की वजह से हैं। एक फिल्म से मिस्टर भट्ट ने उन्हें बाहर निकाल दिया था। मैं उस समय एनबीएफसी में था, मैंने तब 10 लाख रुपये की पेशकश की थी और कहा था कि इसका इस्तेमाल एक अच्छी फिल्म बनाने के लिए किया जा सकता है, और फिर ‘सारांश’ आई।उन्होंने कहा, ’मुझे संजय दत्त, अनिल कपूर, कुलभूषण खरबंदा जैसे सभी संघर्षरत अभिनेता याद हैं, वे सभी मेरे घर पर, इस छोटे से गैरेज में आते थे। 1980 के दशक के वे दिन मेरे अब तक के सबसे अच्छे दिनों में से कुछ थे। आज, मैं अनुपम को देखता हूं कि वह अपने पैशन और डेडिकेशन के साथ कहां तक पहुंच गया है, वह लगभग 540 से ज्यादा फिल्में कर कितना सफल इंसान बन गया है। मुझे उस पर गर्व है।’
इस वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने कैप्शन दिया, ’राजन लाल; एक दोस्त, एक मददगार, जो मुझे इस बार 39 साल बाद दुबई में मिले। 1982 में जब मैं मुंबई में काम की तलाश में था और हालात अच्छे नहीं थे, उन दिनों निर्देशक महेश भट्ट के घर के नीचे एक छोटे से फ्लैट में रहते थे!’’मैं नाश्ता आदि भी करता था! मूल रूप से वह हमेशा मेरे लिए अच्छे थे! और फिर ‘सारांश’ आई!! लेकिन मैं राजन के दयालुपन और उदारता को कभी नहीं भूला! 39 के बाद उनसे मुलाकात हुई दुबई में बिताए गए साल बहुत अच्छे लगे।’
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