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Movie Review: अवतार: फायर एंड ऐश’ से टूटी उम्मीदें, शुरुआती रिव्यू में फ्रैंचाइज़ी की सबसे कमज़ोर फ़िल्म करार

'Avatar: Fire and Ash'Movie Review

एंटरटेनमेंट डेस्क(फरीद शेख): “अवतार: फायर एंड ऐश” ऐसी फ़िल्म है जो आपको कुर्सी पर बैठे-बैठे सुला देगी और आपका अच्छा-खासा दिन खराब कर सकती है। इससे बेहतर है कि आप हमारी भारतीय फ़िल्म “दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी” देखें, जो न सिर्फ़ आपको खुलकर हँसाती है बल्कि हँसी के साथ-साथ एक खूबसूरत और सार्थक संदेश भी देती है।

जेम्स कैमरन की बहुप्रतीक्षित फ्रैंचाइज़ी की तीसरी फिल्म “अवतार: फायर एंड ऐश” से दर्शकों को एक बार फिर पेंडोरा की दुनिया में गहराई से उतरने की उम्मीद थी, लेकिन यह फिल्म उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतर पाती। तकनीकी स्तर पर भले ही फिल्म प्रभावशाली हो, लेकिन कहानी, भावनात्मक जुड़ाव और किरदारों की मजबूती के मामले में यह फ्रैंचाइज़ी की सबसे कमजोर कड़ी साबित होती है।

कहानी: पुरानी जमीन पर नया नाम

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी दोहराव भरी कहानी है। इंसान बनाम पेंडोरा, प्रकृति बनाम लालच और परिवार की रक्षा जैसे विषय पहले भी दो फिल्मों में देखे जा चुके हैं। फायर एंड ऐश इन ही तत्वों को नए नाम और नए विज़ुअल्स के साथ दोहराती है, लेकिन इसमें कोई ठोस नया दृष्टिकोण या चौंकाने वाला मोड़ नहीं मिलता। नतीजा यह होता है कि कहानी आगे बढ़ने के बजाय खिंचती हुई महसूस होती है। करीब 3 घंटे से ज्यादा की लंबाई वाली यह फिल्म कई जगहों पर जरूरत से ज्यादा धीमी लगती है। कई दृश्य केवल विज़

“अवतार: फायर एंड ऐश” ऐसी फ़िल्म है जो नींद की गोली का काम करती है थिएटर में बैठते ही आँखें भारी होने लगती हैं और फिल्म खत्म होते-होते आपका पूरा दिन खराब हो जाता है। इस बेजान और खिंची हुई फिल्म पर समय बर्बाद करने से बेहतर है कि आप हमारी देसी फ़िल्म “दुर्लभ प्रसाद की दूसरी शादी” देखें, जो सच्चे भारतीय हास्य के साथ न सिर्फ़ आपको हँसाती है बल्कि दिल को छू लेने वाला एक खूबसूरत संदेश भी देती है।

दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज़ मीडिया नेटवर्क इस फ़िल्म को 1.5 स्टार की रेटिंग देता है।

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