एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): जहां Bhabhiji Ghar Par Hain अपने लोकप्रिय टीवी शो की पहचान के साथ बड़े पर्दे पर पहुंची है, वहीं फिल्म कई मोर्चों पर कमजोर साबित होती है।
फिल्म की सबसे बड़ी कमी इसकी कमज़ोर और खिंची हुई कहानी है। जो कॉमेडी टीवी एपिसोड में असरदार लगती है, वही बड़े पर्दे पर दोहराव जैसी महसूस होती है। अधिकांश जोक्स पुराने फॉर्मूले पर आधारित हैं, जिससे नयापन गायब नजर आता है।
कहानी
फिल्म टीवी शो भाभी जी घर पर हैं! की वही पुरानी फॉर्मूला कॉमेडी बड़े पर्दे पर खींचने की कोशिश करती है, लेकिन इसमें कुछ भी नया या ताज़ा नहीं है। कहानी में वही घिसे-पिटे हालात, जबरन पैदा की गई गलतफहमियाँ और बेवजह जोड़े गए “कॉमिक-हॉरर” एलिमेंट्स हैं, जो मज़ेदार होने के बजाय उलझन पैदा करते हैं।
बड़े पर्दे का फायदा उठाने के बजाय फिल्म एक लंबा टीवी एपिसोड लगती है, जिसमें शोर ज़्यादा है और कंटेंट कम। इसमें न तो भावनात्मक गहराई है और न ही कोई मजबूत कहानी, बस ढीले-ढाले कॉमिक सीनों की कड़ी है। जो दर्शक शो के फैन नहीं हैं, उनके लिए फिल्म से जुड़ पाना और भी मुश्किल हो जाता है।

कॉमेडी और परफॉर्मेंस :
फिल्म की कॉमेडी ज़्यादातर पुरानी और दोहराव वाली लगती है। स्मार्ट या सटीक लेखन की जगह स्लैपस्टिक और ओवरएक्टिंग पर ज़ोर दिया गया है। कई जोक्स को ज़रूरत से ज़्यादा खींचा गया है और चीख-चिल्लाहट व फिजिकल कॉमेडी पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता दिखाई देती है। टीवी पर जो मज़ाक कभी काम करते थे, वे फिल्म के फॉर्मेट में थकाऊ लगते हैं।
परफॉर्मेंस:
मुख्य कलाकार अपने जाने-पहचाने किरदारों में ही फंसे नज़र आते हैं और कुछ नया देने में नाकाम रहते हैं। लंबे समय से वही अंदाज़ देखने के बाद उनकी एक्टिंग में ताज़गी की कमी साफ दिखती है।
रवि किशन और निरहुआ जैसे सपोर्टिंग कलाकार ऊर्जा जोड़ने के बजाय ज़्यादातर शोर पैदा करते हैं और उनके किरदार कहानी में स्वाभाविक रूप से फिट नहीं बैठते।
टीवी शो से अपने किरदारों को दोहराने वाले आसिफ शेख, रोहिताश्व गौर और शुभांगी अत्रे बड़े पर्दे पर वही पुरानी छवि दोहराते नजर आते हैं, लेकिन उनकी केमिस्ट्री इस बार टीवी जैसी असरदार नहीं लगती। किरदारों में नयापन नहीं है और अभिनय दोहराव भरा महसूस होता है।
वहीं रवि किशन, मुकेश तिवारी और दिनेश लाल यादव (निरहुआ) की एंट्री फिल्म में अराजकता तो बढ़ाती है, लेकिन यह अति-नाटकीयता कई जगह हास्य के बजाय शोर और अव्यवस्था पैदा करती है, जिससे कहानी और कमजोर पड़ जाती है।
कुल मिलाकर, Bhabiji Ghar Par Hain – Fun on the Run एक साधारण कॉमेडी फिल्म है जो केवल नॉस्टेल्जिया और पुराने मज़ाकों के सहारे चलती है। टीवी शो के फैन न हों तो यह फिल्म एक अलग पहचान बनाने में असफल रहती है और मनोरंजन के मामले में भी कोई बड़ी छाप नहीं छोड़ती।
कहानी में कोई ठोस दिशा नहीं है और पटकथा कई जगह बिखरी हुई महसूस होती है। कॉमेडी ज़्यादातर पुराने डायलॉग्स और घिसे-पिटे सिचुएशन पर टिकी है, जिससे हंसी के बजाय ऊब पैदा होती है।
फिल्म का ट्रीटमेंट टेलीविजन एपिसोड जैसा लगता है, जिसे जबरन सिनेमाघरों तक खींच लाया गया हो। बैकग्राउंड म्यूज़िक और सपोर्टिंग कैरेक्टर्स भी कहानी को मजबूत करने के बजाय शोर बढ़ाते हैं। नई ऑडियंस को जोड़ने के लिए फिल्म में कुछ भी खास नहीं है और यह अपने टीवी फॉर्मेट से बाहर निकलने में पूरी तरह नाकाम रहती है।
Movie review:- Bhabiji Ghar Par Hain – Fun On The Run
Genre: Comedy / Family
Release Date: 6 February 2026
Rating : 1.5/5 Star