Gurdas Maan: पंजाबी संगीत जगत के दिग्गज गायक गुरदास मान रविवार सुबह दिवंगत पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के पैतृक गांव मूसा पहुंचे। यहां उन्होंने मूसेवाला की हवेली में जाकर उनके परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया और परिवार के साथ-साथ मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
हवेली में प्रवेश करते ही गुरदास मान ने सबसे पहले सिद्धू मूसेवाला की तस्वीर को नमन किया और उन्हें सलाम किया। इसके बाद उन्होंने सिद्धू के माता-पिता से मुलाकात की और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। सिद्धू की माता चरण कौर ने जब उनका स्वागत किया तो मान ने उनके चरण छूकर आशीर्वाद लिया।
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सिद्धू के भाई को देख हुए भावुक
मुलाकात का सबसे भावुक पल तब आया जब गुरदास मान की नजर सिद्धू के छोटे भाई, जिन्हें लोग प्यार से “छोटा सिद्धू” कहते हैं, पर पड़ी। उन्हें देखकर मान कुछ पल के लिए भावुक हो गए और बाहें फैलाकर बोले कि बच्चे में वही जज्बा और वही चेहरा दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल शुभदीप यानी सिद्धू मूसेवाला जैसा लगता है।
छोटे सिद्धू के पैर छूने की कोशिश
इसी दौरान गुरदास मान ने छोटे सिद्धू के प्रति सम्मान जताते हुए उसके पैर छूने की कोशिश भी की। हालांकि सिद्धू की मां चरण कौर ने उन्हें ऐसा करने से रोकते हुए कहा कि वह परिवार से बड़े हैं, इसलिए ऐसा न करें। इस घटना ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। गौरतलब है कि गुरदास मान शनिवार रात मानसा में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मंच से उन्होंने सिद्धू मूसेवाला को याद करते हुए उनके सम्मान में लिखी एक विशेष कविता भी पढ़ी। इस कविता में उन्होंने सिद्धू के जुनून, उनके संगीत और उनके व्यक्तित्व को याद किया।
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सिद्धू की तारीफ में पढ़े कसीदे
कविता की पंक्तियों में उन्होंने कहा कि सिद्धू ने कम उम्र में ही दुनिया भर में अपने शहर और गांव का नाम रोशन किया। उन्होंने यह भी कहा कि सिद्धू की “सरदारी”, उनका आत्मविश्वास और उनका अंदाज हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। गुरदास मान ने अपने शब्दों के माध्यम से यह भी कहा कि सिद्धू मूसेवाला ने अपने गीतों के जरिए जिस तरह लोगों के दिलों को छुआ, वह हमेशा याद रखा जाएगा। साथ ही उन्होंने सिद्धू के पिता बलकौर सिंह और माता चरण कौर के साहस और हौसले की भी सराहना की।
लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी सिद्धू की पहचान
मुलाकात के अंत में गुरदास मान ने कहा कि वे सिद्धू के शहर आए थे और बिना उनके घर जाए वापस नहीं लौट सकते थे। उन्होंने सिद्धू मूसेवाला को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका नाम और उनकी पहचान आने वाले समय में भी लोगों के दिलों में हमेशा जीवित रहेगी।
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