Last Updated: October 1, 2026

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न्यूज़ीलैंड में भारतीय सिनेमा का जलवा, ऋचा चड्ढा-अली फज़ल करेंगे पहले Indian Film Festival की शुरुआत

May 22, 2026

न्यूज़ीलैंड में भारतीय सिनेमा का जलवा, ऋचा चड्ढा-अली फज़ल करेंगे पहले Indian Film Festival की शुरुआत

एंटरटेनमेंट डेस्क: अभिनेता ऋचा चड्ढा और अली फज़ल जल्द ही न्यूज़ीलैंड में बॉलीवुड का रंग बिखेरते नज़र आएंगे। दोनों 2 जून 2026 को देश के पहले इंडियन फिल्म फेस्टिवल “द इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ न्यूज़ीलैंड (TIFFNZ)” के आधिकारिक लॉन्च में शामिल होंगे।

यह अभिनेता-निर्माता जोड़ी इस लॉन्च इवेंट की मुख्य आकर्षण होगी। इस मौके पर उनकी बतौर प्रोड्यूसर पहली फिल्म गर्ल्स विल बी गर्ल्स की खास स्क्रीनिंग भी रखी जाएगी। इस फिल्म को दुनियाभर के बड़े फिल्म फेस्टिवल्स जैसे सनडांस और इंडिपेंडेंट स्पिरिट अवॉर्ड्स में काफी सराहना मिल चुकी है।

अक्टूबर 2026 में शुरू होने जा रहा TIFFNZ, न्यूज़ीलैंड का पहला समर्पित इंडियन फिल्म फेस्टिवल होगा। इसकी स्थापना पेट्रीना डी’रोजारियो ने की है। इस फेस्टिवल का उद्देश्य भारतीय सिनेमा का जश्न मनाने के साथ-साथ भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच रचनात्मक संबंधों को और मज़बूत बनाना है।

इस लॉन्च इवेंट में सबसे ज़्यादा चर्चा ऋचा और अली की मौजूदगी को लेकर है, क्योंकि दोनों अपनी दमदार पहचान और विश्वसनीयता के लिए जाने जाते हैं। मेनस्ट्रीम फिल्मों के साथ-साथ अर्थपूर्ण और स्वतंत्र सिनेमा को समर्थन देने के लिए मशहूर यह जोड़ी, अभिनेता और निर्माता दोनों रूपों में हमेशा नए और वैश्विक कहानियों को आगे बढ़ाती रही है।

इस लॉन्च का हिस्सा बनने को लेकर अपनी खुशी जाहिर करते हुए ऋचा चड्ढा और अली फज़ल ने संयुक्त बयान में कहा, “हम TIFFNZ के लॉन्च का हिस्सा बनकर बहुत खुश हैं। फिल्म फेस्टिवल्स अलग-अलग कहानियों और विचारों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच तैयार करते हैं। भारतीय सिनेमा को न्यूज़ीलैंड में इतने व्यवस्थित और उत्सवपूर्ण तरीके से लाने का विचार बेहद खास और सही समय पर लिया गया कदम है। हम इस नई शुरुआत का समर्थन करने और वहां के दर्शकों से जुड़ने को लेकर उत्साहित हैं।”

यह फेस्टिवल चार दिनों तक ऑकलैंड, वेलिंगटन और क्राइस्टचर्च में आयोजित किया जाएगा। इसमें फिल्म स्क्रीनिंग्स, वर्कशॉप्स, सांस्कृतिक कार्यक्रम और इंडस्ट्री चर्चाएं शामिल होंगी, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के फिल्ममेकर्स, कलाकारों और दर्शकों को जोड़ना है।

फेस्टिवल के पहले संस्करण में फीचर और शॉर्ट फिल्म्स मिलाकर लगभग 30 फिल्मों को दिखाए जाने की उम्मीद है। इसके जरिए भारतीय सिनेमा की विविधता और वैश्विक पहचान को सामने लाने के साथ-साथ ऑटियरोआ में दक्षिण एशियाई आवाज़ों को भी मंच मिलेगा।

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