Last Updated: November 5, 2026

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Movie Review Ek Chatur Naar: दिव्या खोसला की दमदार परफॉर्मेंस ने जीता दर्शकों का दिल

September 12, 2025

Movie Review Ek Chatur Naar: दिव्या खोसला की दमदार परफॉर्मेंस ने जीता दर्शकों का दिल

एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): दिव्या खोसला कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह न सिर्फ़ अपनी खूबसूरती के लिए, बल्कि अपनी दमदार एक्टिंग के लिए भी जानी जाती हैं। उनकी स्टाइल, डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेज़ेंस बेहद प्रभावशाली हैं।

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी पटकथा है उतार-चढ़ाव, अजीबोगरीब मोड़ और दिमागी खेल, जो आपको बांधे रखते हैं। क्लाइमेक्स तक पहुँचते-पहुँचते कहानी एक ऐसे मोड़ पर पहुँच जाती है जहाँ न सिर्फ़ राज़ खुलते हैं, बल्कि आपको उसके पीछे छिपी असली कहानी भी समझ आती है। “एक चतुर नार” के इस संस्करण में सिर्फ़ साँप हैं, कोई सीढ़ी नहीं… शुद्ध मोड़, जाल और असीमित मज़ा!”
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कहानी ममता (दिव्या खोसला कुमार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक युवा अकेली माँ है और अपने बेटे और दबंग सास के साथ एक बंद घर में रहती है। बाहर से वह कमज़ोर और दब्बू दिखती है, लेकिन उसके शांत बाहरी आवरण के पीछे एक तीक्ष्णता और जीवित रहने की चाहत छिपी है। उसकी मुलाक़ात अभिषेक (नील नितिन मुकेश) से होती है, जो एक कॉर्पोरेट जगत का चालाक है और सरकारी धन को राजनेताओं को देकर अपना हिस्सा खुद अपने पास रखता है। उनकी ज़िंदगी में नाटकीय मोड़ तब आता है जब अभिषेक मेट्रो में अपना फ़ोन खो देता है।

स्टेशन पर काम करने वाली ममता देखती है कि कोई उसे उठा रहा है और संदिग्ध का पीछा करती है। अभिषेक के लिए, गुम हुआ फ़ोन महज़ एक फ़ोन से कहीं ज़्यादा है इसमें ऐसे राज़ छिपे हैं जो उसके सोचे-समझे दोहरे व्यवहार और उससे भी कहीं ज़्यादा को उजागर कर सकते हैं! इसके बाद एक चूहे-बिल्ली की दौड़ शुरू होती है, जो व्यंग्य और चुटीले हास्य के साथ सामने आती है, क्योंकि शुक्ला ने कहानी को निर्माण और खुलासे के चक्रों के इर्द-गिर्द सावधानी से गढ़ा है।

दिव्या खोसला कुमार ममता के रूप में अपनी भूमिका से आश्चर्यचकित करती हैं, और भेद्यता और चतुर गणना के बीच संतुलन बनाने में कामयाब होती हैं। उनके रूप-रंग की नाज़ुकता, उनके अंदर छिपी चालाकी के साथ चतुराई से मेल खाती है, और यह दर्शकों को अनुमान लगाने पर मजबूर कर देती है। नील नितिन मुकेश उनके प्रतिरूप के रूप में बखूबी जमे हैं सहज, अप्रत्याशित और कभी-कभी कमज़ोर, एक ऐसा अभिनय जो उनकी पुरानी शैली में वापसी का संकेत देता है। साथ में, उनकी केमिस्ट्री फ़िल्म के सबसे सम्मोहक क्षण प्रदान करती है।

सहायक कलाकारों में, छाया कदम ने एक कठोर सास की भूमिका में बेहतरीन अभिनय किया है, सुशांत सिंह इंस्पेक्टर त्रिलोकी के रूप में विश्वसनीय लगे हैं, और ज़ाकिर हुसैन ने एक भ्रष्ट राजनेता की भूमिका को अपनी सामान्य सहजता के साथ जिया है। हालाँकि इनमें से कुछ किरदारों का कम इस्तेमाल किया गया लगता है, फिर भी उनकी उपस्थिति शहर के गंभीर हास्य माहौल को समृद्ध बनाती है। दिव्या खोसला कुमार ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह न सिर्फ़ अपनी खूबसूरती के लिए, बल्कि अपनी दमदार एक्टिंग के लिए भी जानी जाती हैं।दिव्या खोसला अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों की वाह-वाही बटोर रही हैं।”

दैनिक सवेरा टाइम्स न्यूज मीडिया नेटवर्क इस फिल्म को 4 स्टार रेटिंग देता है।

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