एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): हार्दिक गज्जर के निर्देशन में बनी यह कहानी भगवान श्रीकृष्ण के द्वारका से कुरुक्षेत्र तक के सफर को बेहद खूबसूरती से दिखाती है। राधा से बिछड़ने के बाद उनके जीवन में आने वाले भावनात्मक बदलावों के साथ-साथ रुक्मिणी और सत्यभामा के साथ उनके रिश्तों को भी संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
फिल्म में श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े कई अहम प्रसंगों को प्रभावशाली अंदाज़ में दिखाया गया है। हस्तिनापुर की सभा में द्रौपदी के चीरहरण पर उनका क्रोध हो या स्यमंतक मणि को लेकर उन पर लगे झूठे आरोप, हर घटना कहानी को और गहराई देती है।
यह फिल्म सिर्फ पौराणिक कथा नहीं बल्कि भावनाओं, रिश्तों और धर्म की शक्ति को बड़े पर्दे पर शानदार तरीके से पेश करती है। फिल्म का पहला भाग भगवान श्रीकृष्ण और राधा के खूबसूरत रिश्ते को बेहद भावनात्मक अंदाज़ में दिखाता है। श्रीकृष्ण के किरदार में सिद्धार्थ गुप्ता पूरी तरह छा जाते हैं। उन्होंने कृष्ण की मासूमियत और उनकी चतुर सोच, दोनों को बेहद सहजता से पर्दे पर उतारा है। हालांकि उनके लुक में इस्तेमाल किया गया विग थोड़ा खटकता है, लेकिन उनकी दमदार परफॉर्मेंस के सामने यह कमी नजरअंदाज की जा सकती है।
दूसरी ओर, राधा के किरदार में सुष्मिता भट्ट ने बेहद शानदार काम किया है। ऐसा लगता है मानो यह भूमिका खास तौर पर उन्हीं के लिए बनाई गई हो। उन्होंने राधा की मासूमियत, गरिमा और कृष्ण के प्रति उनके निस्वार्थ प्रेम को बहुत खूबसूरती से पर्दे पर उतारा है। हर सीन में उनके भाव बिल्कुल सटीक नजर आते हैं, चाहे कृष्ण का ध्यान अपनी ओर खींचने वाली चंचल राधा हो या फिर बिछड़ने का दर्द महसूस करती प्रेमिका।
रुक्मिणी के रूप में निवाशिनी कृष्णन ने भी प्रभावशाली अभिनय किया है। बिना देखे ही कृष्ण से प्रेम करने वाली रुक्मिणी की भावनाओं को उन्होंने बेहद सहज तरीके से निभाया है। जिन लोगों को यह जानने की उत्सुकता है कि फिल्म में कृष्ण और रुक्मिणी के रिश्ते को किस तरह दिखाया गया है, उन्हें यह प्रस्तुति जरूर पसंद आएगी।
वहीं सत्यभामा के किरदार में संस्कृती जयाना कहानी की सबसे दमदार कड़ियों में से एक बनकर उभरती हैं। कृष्ण की तरह ही उनका किरदार भी फिल्म का अहम हिस्सा महसूस होता है। अधिकार जताने वाली प्रेमिका से लेकर कृष्ण के लिए गहरे प्रेम और एक निडर योद्धा के रूप तक, उन्होंने हर पहलू को पूरे आत्मविश्वास के साथ निभाया है। खासकर फिल्म के बाद के हिस्सों में उनका अभिनय काफी प्रभावित करता है। हालांकि, सत्यभामा द्वारा नरकासुर वध की कथा को फिल्म में दिखाया गया है, लेकिन काश उस हिस्से को थोड़ा और विस्तार से दिखाया जाता।
ज़रूर देखिए! Krishnavataram Part 1: Hridayam भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखकर बनाई गई एक शानदार फिल्म है। कलाकारों की अदाकारी प्रभावशाली है, भव्य विजुअल्स कहानी को और खास बनाते हैं, और संगीत पूरे अनुभव में अलग ही ऊर्जा भर देता है। फिल्म की रफ्तार संतुलित है और भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़े कई प्रसंगों को खूबसूरती से पेश किया गया है।
दो घंटे से ज्यादा लंबी होने के बावजूद फिल्म कहीं भी बोर महसूस नहीं होने देती और लगातार बांधे रखती है। यह सिर्फ पहला भाग है, जबकि इसके बाद दो और फिल्में आने वाली हैं। ऐसे में आगे की कहानी देखने से पहले इस अध्याय को थिएटर में अनुभव करना बिल्कुल मिस नहीं करना चाहिए।
Dainik Savera Times की ओर से इस फिल्म को 5 में से 3.5 स्टार की रेटिंग दी गई है।