एंटरटेनमेंट डेस्क (फरीद शेख): फिल्म की कहानी दो अजीबो‑गरीब पात्रों राहु और केतु के इर्द‑गिर्द घूमती है, जो एक जादुई नोटबुक की वजह से जीवन में अजीब‑सी उलझन में फँस जाते हैं। जब एक चालाक लड़की नोटबुक चुरा लेती है, तो दोनों को उसे वापस लाने का मिशन मिलता है, जिसमें वे ड्रग माफिया और कई हास्यास्पद परिस्थितियों से जूझते हैं।
पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा की जोड़ी को फ़िल्म का सबसे मजबूत हिस्सा माना जा रहा है। फन और ऊर्जा इनके अभिनय में साफ़ झलकती है, खासकर वरुण शर्मा की कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
यह फिल्म सिर्फ़ साधारण हँसी‑ठिठोली नहीं है इसमें मिस्ट्री, थ्रिल, रोमांस और सोशल सैटायर जैसे तत्व भी शामिल हैं। अभिनेता पियूष मिश्रा ने भी कहा है कि केवल कॉमिक फिल्म समझकर मत देखिए, इसमें गहराई भी है।

फिल्म का कॉन्सेप्ट मज़ेदार और अलग है प्राचीन कथाओं और आधुनिक हास्य का मिश्रण, जो दर्शक को “कॉस्मिक कॉमेडी” की दुनिया में ले जाता है। हालांकि यह फ़िल्म पूरी तरह देवी‑देवताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि आस्था, मान्यताओं और मानवीय संघर्षों का मनोरंजक रूपांतरण है।
पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा की ऑन‑स्क्रीन केमिस्ट्री इतनी नेचुरल और जादुई लगती है कि हर सीन में दर्शक उनके अभिनय में डूब जाते हैं। पुलकित की सहज अभिव्यक्ति और वरुण की शानदार कॉमिक टाइमिंग फ़िल्म में हँसी के पलों को बेहतरीन तरीके से जीवंत बनाती है। वरुण शर्मा ने हर सीन में न सिर्फ़ हास्य बल्कि भावनाओं की गहराई भी दिखाई, वहीं पुलकित सम्राट ने अपने किरदार में मासूमियत और इमोशन को बेहद खूबसूरती से भरा।
वहीं, शालिनी पांडे का प्रभाव उतना दिखाई नहीं देता जितना पुलकित और वरुण का। ऐसा लगता है कि उन्हें जबरदस्ती फिल्म में शामिल किया गया है। उनकी एक्टिंग में कोई ख़ास निखार या उभरता हुआ प्रभाव देखने को नहीं मिलता।
कुल मिलाकर, फिल्म की एनर्जी और मज़ा मुख्य रूप से पुलकित और वरुण शर्मा की परफॉर्मेंस से ही बनता है।
दैनिक सवेरा टाइम्स
4 स्टार ⭐⭐⭐⭐
फिल्म समीक्षा: राहु केतु