Last Updated: September 21, 2026

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नुसरत फतेह अली खान के गाते समय आंखों से क्यू झरते थे आंसू ,जानें राज

January 2, 2026

नुसरत फतेह अली खान के गाते समय आंखों से क्यू झरते थे आंसू ,जानें राज

मुंबई :  सुरीली और सूफियाना आवाज वाले प्रसिद्ध गायक नुसरत फतेह अली के गाने लोगों के दिलों में बस जाते थे। ‘तुम्हें दिल लगीं भूल जानी पड़ेगी,‘ ‘नी मैं जाना जोगी दे नाल’, ‘सांसों की माला पे सिमरू,‘ और ‘दिल परदेसी हो गया’ उनके वो गाने हैं, जिन्हें विदेश की धरती पर भी सराहा गया। जापान में लोग उन्हें ‘गाता हुआ बुद्ध’ और अमेरिका ‘स्वर्ग की आवाज’ के टाइटल से नवाजते हैं।

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हिंदी सिनेमा में भी उनकी जादुई आवाज ने अपनी छाप छोड़ी, और ऐसी छोड़ी कि साल 2000 में रिलीज हुआ गाना आज भी पिता और बेटी के गहरे रिश्ते में छिपे दर्द को दिखाता है। हम बात कर रहे हैं साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘धड़कन‘ की।

इस फिल्म का गाना ‘दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है’ नुसरत फतेह अली खान ने गाया था और गाने से पहले शर्त भी रखी थी, लेकिन गाना खुद सूफी सिंगर के लिए गा पाना मुश्किल हो रहा था। उनकी आंखों से आंसू और गले से आवाज नहीं निकल रही थी।

नुसरत फतेह अली खान के गाते समय आंखों से क्यू झरते थे आंसू ,जानें राज

मेकर्स फिल्म के लिए ऐसा गाना चाहते थे, जो पिता और बेटी के मार्मिक रिश्ते को दिखाता हो लेकिन जिसके बोल ऐसे हों कि सुनने के बाद दिल पिघलने लगे। म्यूजिक डायरेक्टर नदीम-श्रवण की जोड़ी पहले से ही नुसरत फतेह अली खान की बड़ी फैन थी और वे चाहते थे कि वे ही फिल्म में गाना गाएं।

हालांकि गाने से पहले नुसरत की शर्त थी कि पहले वे गाने के बोल सुनेंगे और पसंद आएगा, तभी गाने को अपनी आवाज देंगे। सूफी सिंगर को बोल पसंद आए और उन्होंने गाने का फैसला लिया। अब आया रिकॉर्डिंग का समय। म्यूजिक और लय दोनों तैयार थे और आधा गाना रिकॉर्ड हो गया।

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लेकिन जैसे ही लाइन आई “मैं तेरी बाहों के झूले में पली बाबुल,” वैसे ही उनका गला रुंध गया और भारी गले से आवाज नहीं निकल रही थी। फिर दोबारा कोशिश की, फिर आंख से आंसू निकलने लगे। लगातार कोशिश होती रही थी और लगातार विफल रहे।

ऐसा तकरीबन 150 बार हुआ। ये सिर्फ एक लाइन की वजह से हुआ। नुसरत फतेह अली को ये लाइन लगातार उनकी बेटियों की याद दिला रही थी और उनके लिए ये शब्द बोल पाना भारी हो रहा था, लेकिन बुखार में 150 रीटेक के बाद उन्होंने गाने को पूरा गाया।

उन्होंने ये भी कहा था कि अगर वे आज इस बुखार में गाने को पूरा नहीं कर पाए तो कभी नहीं कर पाएंगे। फिल्म ‘धड़कन‘ का ये गाना आज भी सीधा लोगों के दिलों पर वार करता है। गाने की हर लाइन और नुसरत साहब की आवाज ने पिता-बेटी के विरह के दर्द को मार्मिक तरीके से दुनिया के सामने पेश किया था।

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