
एंटरटेनमेंट डेस्क: भारतीय एंटरटेनमेंट की दुनिया में ऐसे प्रोड्यूसर्स बहुत कम हैं, जो लीक से हटकर कहानियों पर दांव लगाने और दर्शकों के लिए कुछ नया लाने की हिम्मत रखते हैं। इन्हीं में से एक नाम रितेश सिधवानी का है। फरहान अख्तर के साथ एक्सेल एंटरटेनमेंट की शुरुआत करने वाले रितेश ने अपनी अलग सोच के साथ भारतीय सिनेमा की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाई है। उनके लिए सिर्फ फिल्म बनाना ही मायने नहीं रखता, बल्कि नए फॉर्मेट, अलग कहानियों और नए क्रिएटिव टैलेंट को मौका देना भी उतना ही जरूरी है। यही चीज उन्हें उनकी जेनरेशन के बाकी प्रोड्यूसर्स से अलग बनाती है।
अगर कहा जाए कि किसी फिल्म में प्रोड्यूसर की पहली सोच नजर आती है, तो रितेश सिधवानी उन प्रोड्यूसर्स में से हैं, जिन्होंने एक कहानी को कई अलग नजरिए से देखने की हिम्मत दिखाई है। उनकी फिल्मों में नए आइडियाज, नए टैलेंट और क्रिएटिव एक्सपेरिमेंट साफ नजर आते हैं। जहां कई प्रोड्यूसर्स दर्शकों की पसंद को लेकर रिस्क लेने से बचते हैं, वहीं रितेश हमेशा दर्शकों को कुछ नया, अलग और दिलचस्प देने में भरोसा रखते हैं। खास बात यह है कि उन्होंने बार-बार साबित किया है कि उनकी पसंद और उनका अंदाजा सही साबित होता है।
हालांकि उनकी फिल्मों को देखना जितना दिलचस्प है, उनका सफर उससे भी ज्यादा दिलचस्प रहा है। करियर की शुरुआत में उन्होंने करीब छह साल तक अपने परिवार के बिजनेस मार्लेक्स को संभाला और उसकी मार्केटिंग की। मार्लेक्स भारत का जाना-माना होम अप्लायंसेज ब्रांड था और इस दौरान रितेश ने कॉर्पोरेट और बिजनेस से जुड़ी कई चीजें सीखीं। परिवार के बिजनेस में एक स्थिर करियर होने के बावजूद उनका दिल सिनेमा में था। फिल्ममेकिंग को करीब से समझने के लिए वह लगान के सेट पर पहुंचे और यहीं से इस एंटरटेनमेंट लवर के असली सफर की शुरुआत हुई।
रितेश बिना किसी फॉर्मल फिल्म ट्रेनिंग के एंटरटेनमेंट की दुनिया में आए, लेकिन उनकी अलग सोच ने पहली ही फिल्म दिल चाहता है से एक कल्ट क्लासिक दे दी। फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड जीता और आज भी इसे एक टाइमलेस फिल्म के तौर पर याद किया जाता है। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी। इसके बाद लक्ष्य, डॉन फ्रेंचाइजी, हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड, रॉक ऑन!!, जिंदगी ना मिलेगी दोबारा, फुकरे फ्रेंचाइजी, गली बॉय, बूंग और ऐसी ही कई फिल्मों के साथ उनका यह सिलसिला आगे बढ़ता गया।
रितेश ने ओटीटी की दुनिया में भी कदम रखा और यहां भी अपनी मजबूत पकड़ बनाई। इनसाइड एज, मिर्जापुर सीरीज, दहाड़, मेड इन हेवन जैसे शोज के जरिए उन्होंने दिखाया कि उनकी सोच सिर्फ बड़े पर्दे तक सीमित नहीं है।
रितेश की क्रिएटिव सोच से निकली इन सभी फिल्मों और शोज को देखें तो साफ पता चलता है कि वह अलग कहानियों और अलग फिल्ममेकर्स पर भरोसा करने से पीछे नहीं हटते। उन्होंने कभी साधारण चीजों पर रुकने के बजाय कुछ नया बनाने और दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की है। उनकी फिल्मों और शोज का जॉनर, कहानी, ट्रीटमेंट, कास्टिंग, डायरेक्टर और टारगेट ऑडियंस तक एक-दूसरे से काफी अलग रहे हैं।
रितेश सिधवानी ऐसे प्रोड्यूसर हैं, जो वक्त के साथ सिर्फ आगे नहीं बढ़े, बल्कि बदलते इंडियन एंटरटेनमेंट के साथ खुद को भी बदला और पुराने नियमों को चुनौती दी। उनका सफर बताता है कि अगर अपनी सोच पर भरोसा हो, रिस्क लेने की हिम्मत हो और ऐसी कहानियां कहने का जुनून हो, जिन्हें शायद दर्शक खुद भी देखने की उम्मीद न कर रहे हों, तो सिनेमा में कुछ अलग और यादगार किया जा सकता है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...