एंटरटेनमेंट डेस्क: ‘राजासाहब’ का ट्रेलर देखकर सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर मेकर्स दर्शकों को क्या नया देना चाहते हैं? कहानी का अंदाज़ा ट्रेलर से ही पुराना और घिसा-पिटा लग रहा है। एक्शन सीक्वेंसेज़ तो दिखाए गए हैं, लेकिन उनमें कोई ताज़गी या दम नहीं है। डायलॉग्स भी काफी क्लिशे लगते हैं, जिन्हें सुनकर असर होने की बजाय बोरियत महसूस होती है।
विज़ुअल्स और बैकग्राउंड म्यूज़िक ज़्यादा ओवरड्रामैटिक लगते हैं, जिससे ट्रेलर का इम्पैक्ट कम हो जाता है। स्टारकास्ट के बावजूद ट्रेलर वो ग्रिप पैदा नहीं कर पाता, जो दर्शक किसी बड़ी फिल्म से उम्मीद करते हैं।

कुल मिलाकर, ट्रेलर देखने के बाद एक्साइटमेंट कम और निराशा ज़्यादा महसूस होती है। अगर फिल्म में भी यही टोन रहा तो यह बॉक्स ऑफिस पर मुश्किल में पड़ सकती है। विज़ुअल्स और बैकग्राउंड म्यूज़िक ज़्यादा ओवरड्रामैटिक लगते हैं, जिससे ट्रेलर का इम्पैक्ट कम हो जाता है। स्टारकास्ट के बावजूद ट्रेलर वो ग्रिप पैदा नहीं कर पाता, जो दर्शक किसी बड़ी फिल्म से उम्मीद करते हैं।
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