मुंबई : ऊषा उत्थुप (Usha Uthup) एक जानी-मानी भारतीय पॉप, पार्श्व और जैज़ गायिका हैं, जो 1960, 1970 और 1980 के दशक में अपने गानों के लिए लोकप्रिय हुईं। वह अपनी अनूठी और गहरी आवाज़, जीवंत शैली और बड़ी बिंदी व साड़ी पहनने के खास अंदाज़ के लिए जानी जाती हैं। बॉलीवुड म्यूजिक की दुनिया में ऊषा उत्थुप का नाम हमेशा ही दमदार आवाज और अनोखे स्टाइल के लिए लिया जाता है। उनकी पहचान केवल गानों तक सीमित नहीं है—उनकी कांजीवरम साड़ी, बड़ी गोल बिंदी और बालों में फूलों का गजरा उन्हें एक अलग ही आइकॉन बनाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस सुपरस्टार बनने की राह कितनी संघर्षपूर्ण रही?
ऊषा ने अपने करियर की शुरुआत नाइट क्लबों से की थी। उस समय उन्हें गाने के लिए सिर्फ 750 रुपए मिलते थे, और धीरे-धीरे मेहनत के दम पर यह रकम बढ़कर 1500 रुपए महीने हुई। उस दौर में यह राशि किसी फीमेल सिंगर के लिए बड़ी उपलब्धि थी। उनकी दमदार आवाज और अनोखा स्टाइल जल्द ही इंडस्ट्री में उन्हें पहचान दिलाने लगे।
ऊषा का जन्म 8 नवंबर 1947 को मुंबई में एक तमिल परिवार में हुआ। उनके पिता पुलिस विभाग में थे और परिवार का माहौल बेहद अनुशासित था। बचपन से ही ऊषा को संगीत का जुनून था। रेडियो पर बड़े कलाकारों जैसे गुलाम अली खान के गीत सुनना उनकी आदत बन गई थी। केवल नौ साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला स्टेज शो किया और तभी उनके अंदर की चमक दिखने लगी।
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दिलचस्प बात यह है कि ऊषा ने कभी भी फॉर्मल म्यूजिक ट्रेनिंग नहीं ली। बचपन में म्यूजिक टीचर ने उनकी भारी आवाज की वजह से उन्हें क्लास से बाहर कर दिया, लेकिन वही आवाज उनके करियर की सबसे बड़ी ताकत साबित हुई।
उनकी मेहनत रंग लाई और देव आनंद ने उन्हें ‘बॉम्बे टॉकीज’ में गाने का मौका दिया। इसके बाद उन्हें लगातार फिल्मों में ऑफर मिलने लगे। आरडी बर्मन, बप्पी लहरी और एआर रहमान जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ काम करते हुए उन्होंने ‘दम मारो दम’, ‘वन टू चा चा चा’, ‘हरे राम हरे कृष्ण’ और ‘महबूबा’ जैसे हिट गानों में अपनी आवाज दी।
ऊषा केवल एक सिंगर नहीं, बल्कि स्टाइल आइकॉन भी हैं। उनकी पॉप-सिंगिंग, क्लासिकल टच और अनोखा व्यक्तित्व उन्हें भारत की पॉप क्वीन बनाता है। उन्होंने रियलिटी शो ‘भारत की शान: सिंगिंग स्टार सीजन 2’ में जज के रूप में भी अपनी छाप छोड़ी। आज भी उनके गाने रेडियो, पार्टियों और क्लबों में लोगों को झूमने पर मजबूर करते हैं।