Last Updated: September 27, 2026

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Welcome to the Jungle’ नहीं, ‘Welcome to the Torture’ है ये फिल्म; स्टार्स की भीड़, बिखरी कहानी और गायब हुआ पुराना जादू

June 26, 2026

Welcome to the Jungle’ नहीं, ‘Welcome to the Torture’ है ये फिल्म; स्टार्स की भीड़, बिखरी कहानी और गायब हुआ पुराना जादू

Entertainment News: (फरीद शेख): असल में इस फिल्म का नाम “Welcome to the Jungle” नहीं, बल्कि “Welcome to the Torture” होना चाहिए था। यह अहमद खान “फिल्म पूरी तरह कन्फ्यूजन का शिकार नजर आती है। कहानी भी वही पुरानी घिसी-पिटी लगती है गांव की रक्षा, डाकुओं का खतरा और बीच-बीच में ठूंसे गए सस्ते कॉमेडी डायलॉग। Welcome फ्रेंचाइज़ी का स्तर हर नई फिल्म के साथ नीचे गिरता जा रहा है और Welcome to jungle इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

कुछ फिल्में अपनी कहानी से नहीं, बल्कि अपने यादगार किरदारों से चलती हैं। Welcome की पहचान हमेशा उदय भाई और मजनू भाई जैसे आइकॉनिक किरदार रहे हैं। उनकी गैरमौजूदगी में यह फिल्म पूरी तरह बेजान और खोखली महसूस होती है। यह वैसा ही है जैसे हेरा फेरी से बाबूराव को निकाल दिया जाए। नतीजा वही होता है जो Welcome 3 के साथ हुआ है हंसी गायब और मनोरंजन खत्म।

फिल्म पर हॉलीवुड की Tropic Thunder (2008) का प्रभाव साफ दिखाई देता है। मूल कहानी और कई सीक्वेंस वहीं से उठाए गए लगते हैं, जिनमें कुछ नए किरदार, गांव का ट्रैक और एक जरूरत से ज्यादा बड़ी स्टारकास्ट जोड़ दी गई है। लेकिन इन सबके बावजूद फिल्म में मौलिकता और मनोरंजन दोनों की भारी कमी है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि बॉलीवुड अब अच्छी कॉमेडी बनाना शायद भूल चुका है। मजबूत लेखन, सिचुएशनल ह्यूमर और यादगार संवादों की जगह अब घटिया वन-लाइनर्स, पुराने जोक्स, व्हाट्सएप फॉरवर्ड स्तर की कॉमेडी और बेसिर-पैर के दृश्य देखने को मिलते हैं। फिल्म का स्क्रीनप्ले इतना बिखरा हुआ है कि कई बार समझ ही नहीं आता कि कहानी आखिर जाना कहां चाहती है।

Akshay Kumar अपनी पूरी ऊर्जा के साथ नजर आते हैं, लेकिन कई जगह उनकी परफॉर्मेंस जरूरत से ज्यादा ओवर-द-टॉप और ओवरएक्टिंग की सीमा तक पहुंचती हुई महसूस होती है। कॉमिक टाइमिंग के बजाय कई दृश्य सिर्फ शोर-शराबे तक सीमित रह जाते हैं।

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निर्देशक अहमद खान एक बार फिर साबित करते हैं कि बड़े बजट और लंबी स्टारकास्ट से अच्छी फिल्म नहीं बनती। खराब लेखन, फूहड़ कॉमेडी, बेतुके संवाद, ओवरएक्टिंग, मेलोड्रामा और लॉजिक से कोसों दूर घटनाएं इस फिल्म को एक थकाऊ अनुभव बना देती हैं।

कई बड़े सितारों से सजी Welcome to the Jungle दर्शकों को हंसी का धमाका देने का वादा तो करती है, लेकिन पर्दे पर यह वादा काफी हद तक अधूरा नजर आता है। फिल्म में सितारों की इतनी बड़ी फौज है कि कहानी और किरदारों का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है, जिससे दर्शक कई जगह खुद को भ्रमित महसूस करते हैं।

वेलकम टू द जंगल’ यह साबित करती है कि सिर्फ बड़े सितारों की भीड़ इकट्ठा कर देने से बेहतरीन कॉमेडी नहीं बनती। मजबूत कहानी, दमदार लेखन और यादगार किरदारों की कमी इस फिल्म को औसत से भी नीचे ले जाती है। जो कमाल कभी उदय और मजनू ने किया था, उसका जादू इस बार पूरी तरह नदारद है।

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी कमजोर स्क्रिप्ट और बिखरा हुआ नैरेटिव है। इतने सारे कलाकारों को एक साथ संभालने की कोशिश में किसी भी किरदार को वह गहराई या यादगार पल नहीं मिल पाते, जो वेलकम फ्रेंचाइज़ी की पहचान रहे हैं। बिना उदय भाई और मजनू भाई के, वेलकम वैसी वेलकम लगती ही नहीं है। उनकी कमी हर फ्रेम में महसूस होती है और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी नाकामी बन जाती है।

वेलकम टू द जंगल नहीं, बल्कि वेलकम टू द टॉर्चर कहना ज्यादा सही होगा। बेवजह की भीड़, कमजोर कॉमेडी और ओवर-द-टॉप ड्रामा के बीच फिल्म अपनी आत्मा ही खो बैठती है। जिस फ्रेंचाइज़ी को उसके यादगार किरदारों ने खास बनाया था, वही किरदार यहां सबसे ज्यादा मिस होते हैं।

दैनिक सवेरा टाइम्स इस फिल्म को 2 स्टार की रेटिंग देता है।

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