Last Updated: November 5, 2026

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Yash Johar: मिठाई की दुकान से Dharma Productions तक का सफर, ऐसे यश जौहर ने बॉलीवुड को दिलाई ग्लोबल पहचान

September 5, 2026

Yash Johar: मिठाई की दुकान से Dharma Productions तक का सफर, ऐसे यश जौहर ने बॉलीवुड को दिलाई ग्लोबल पहचान

Dharma Legacy: धर्मा प्रोडक्शंस के संस्थापक और करण जौहर के पिता यश जौहर को हिंदी सिनेमा के उन फिल्म निर्माताओं में गिना जाता है, जिन्होंने बॉलीवुड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। कभी पिता की मिठाई की दुकान पर बैठने वाले यश जौहर की जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं हैं। 6 सितंबर 1929 को जन्मे यश जौहर ने साधारण नौकरी से अपने करियर की शुरुआत कर मशहूर फिल्म निर्माताओं में शुमार होने तक का सफर तय किया।

​यश जौहर का जन्म 6 सितंबर 1929 को पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार दिल्ली आ गया। यहां आकर यश जौहर के पिता ने मिठाई की दुकान खोली। यश अपने 9 भाई बहनों में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे थे। इस वजह से पिता ने दुकान पर बैठा दिया, जिससे वो हिसाब किताब कर सकें, हालांकि उन्हें यह काम पसंद नहीं था।

इसके बाद मां की मदद से यश जौहर मुंबई चले गए। शुरुआती दिनों में यश को काफी संघर्ष करना पड़ा। शुरुआत में उन्होंने एक मशहूर अंग्रेजी न्यूजपेपर में सहायक फोटोग्राफर की नौकरी शुरू की। कहा जाता है उस जमाने में मशहूर अभिनेत्री मधुबाला किसी को फोटो खींचने नहीं देती थीं, लेकिन यश की अंग्रेजी बोलने से वह बहुत इम्प्रेस हुईं कि उनसे फोटो खिंचवाई थी।

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यश जौहर ने 1950 के दशक की शुरुआत में शशिधर मुखर्जी के फिल्मिस्तान स्टूडियो के साथ पब्लिसिस्ट और स्टिल फोटोग्राफर के तौर पर अपना करियर शुरू किया। उन्होंने ‘लव इन शिमला’ (1960) में प्रोडक्शन एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम किया और बाद में 1962 में सुनील दत्त की अजंता आर्ट्स से जुड़ गए, जहां उन्होंने ‘मुझे जीने दो’ (1963) और ‘ये रास्ते हैं प्यार के’ (1963) जैसी फिल्मों के प्रोडक्शन का काम संभाला।

देव आनंद की नवकेतन फिल्म्स के साथ उनका काम बहुत अहम रहा। यहां उन्होंने गाइड (1965), ज्वेल थीफ (1967), ‘प्रेम पुजारी’ (1970) और हरे रामा हरे कृष्णा (1971) जैसी सफल फिल्मों के प्रोडक्शन का काम संभाला और एक कुशल प्रोडक्शन कंट्रोलर के तौर पर अपनी पहचान बनाई। 1971 में जौहर ने मार्शल आर्ट्स स्टार ब्रूस ली और एक्टर जेम्स कोबर्न के साथ भारत में एक ऐसी फिल्म के लिए लोकेशन देखने की यात्रा की जो कभी बनी ही नहीं।

1976 में उन्होंने धर्मा प्रोडक्शंस की शुरुआत की, जो अपनी इमोशनल और परिवार-केंद्रित फिल्मों के लिए जानी गई, जिनमें प्रोडक्शन की क्वालिटी बहुत अच्छी होती थी। धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले यश जौहर ने 1980 में अपनी पहली फिल्म ‘दोस्ताना’ बनाई, जिसमें अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा और जीनत अमान मुख्य भूमिकाओं में थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

इसके बाद दुनिया (1984), अग्निपथ (1990), गुमराह (1993) और डुप्लिकेट (1998) ने धर्मा की पहचान को और मजबूत किया। ​अग्निपथ भले ही यह फिल्म रिलीज के समय बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन अमिताभ बच्चन का ‘विजय दीनानाथ चौहान’ का किरदार और फिल्म आज भारतीय सिनेमा की क्लासिक मानी जाती है। यश जौहर =ने हॉलीवुड फिल्म ‘द जंगल बुक’ (1994) में एसोसिएट प्रोड्यूसर के तौर पर भी काम किया, जिससे भारतीय सिनेमा से आगे भी उनकी पहचान बनी।

​1990 के दशक के अंत में यश जौहर के बेटे करण जौहर ने निर्देशन में कदम रखा। यश जौहर ने अपने बेटे की दूरदर्शिता पर पूरा भरोसा जताया। 1998 में रिलीज हुई ‘कुछ कुछ होता है’ ने भारतीय सिनेमा के इतिहास को बदलकर रख दिया। इस फिल्म ने दुनियाभर में नए रिकॉर्ड बनाए। ​इसके बाद ‘कभी खुशी कभी गम’ (2001) और ‘कल हो ना हो’ (2003) जैसी फिल्मों ने एनआरआई दर्शकों के बीच बॉलीवुड की एक नई और भव्य पहचान बनाई। इन फिल्मों में भव्य सेट, पारिवारिक रिश्ते, खूबसूरत लोकेशन और संगीत यश जौहर के प्रोडक्शन हाउस का ट्रेडमार्क बन गए।

​यश जौहर को पूरे फिल्म उद्योग में एक सज्जन, दयालु और अनुशासनप्रिय व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। वे निर्माता ही नहीं, बल्कि कलाकारों और क्रू के लिए एक गार्जियन (संरक्षक) की तरह थे। ​26 जून 2004 को मुंबई में कैंसर के कारण यश जौहर का निधन हो गया। उनके जाने के बाद उनके बेटे करण जौहर और यश जौहर की पत्नी हीरू जौहर ने ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ की कमान संभाली। ​आज ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े और सफल प्रोडक्शन हाउस में से एक है। भले ही यश जौहर आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सिनेमा के प्रति उनका जुनून और उनके द्वारा स्थापित मूल्य आज भी बॉलीवुड की हर बड़ी फिल्म में झलकते हैं।

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