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सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ: एक सदी का बदलाव और पश्चिम से अलग विकास का चीनी मॉडल

July 15, 2026

सीपीसी की 105वीं वर्षगांठ: एक सदी का बदलाव और पश्चिम से अलग विकास का चीनी मॉडल

1 जुलाई, 2026 को चीनी जनता ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी यानी सीपीसी की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ मनाई। यह अवसर दुनिया के सामने यह प्रस्तुत करने का था कि सीपीसी के नेतृत्व में चीन ने बीते एक सदी से अधिक समय में मानव विकास के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व उपलब्धियां हासिल की हैं।

इस ऐतिहासिक अवसर ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सीपीसी के नेतृत्व में चीन की विकास यात्रा को करीब से समझने का मौका दिया। साथ ही, इसने चीन की विशिष्ट राजनीतिक दल प्रणाली और शासन पद्धति को समग्र रूप से समझने का अवसर भी प्रदान किया। जैसा कि 1 जुलाई को पेइचिंग में सीपीसी की स्थापना की 105वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित महासभा को संबोधित करते हुए सीपीसी केंद्रीय समिति के महासचिव, राष्ट्रपति और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष शी चिनफिंग ने कहा:

“सीपीसी ने अथक संघर्ष के जरिए चीनी राष्ट्र के हजारों वर्षों के इतिहास में सबसे शानदार अध्याय लिखा है। पिछले 105 वर्षों के प्रयासों ने न केवल विश्व इतिहास की दिशा को गहराई से प्रभावित किया है, बल्कि सीपीसी को एक मजबूत और जीवंत मार्क्सवादी पार्टी के रूप में भी स्थापित किया है।”

पश्चिमी नैरेटिव बनाम हकीकत

यह 105वीं वर्षगांठ ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर आई है जब वैचारिक टकराव तेज हो गया है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के उसके कुछ सहयोगी चीन को वैश्विक मंच पर रोकने के लिए लगातार यह नैरेटिव आगे बढ़ा रहे हैं कि चीन पर पश्चिमी राजनीतिक ढांचा थोपा जाए। उनका उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में चीन की बढ़ती भूमिका पर सवाल उठाना और चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना है। लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है।

आज भी पश्चिम के कई लोग चीन की राजनीतिक व्यवस्था को ठीक से समझ नहीं पा रहे हैं। वे सीपीसी के ऐतिहासिक योगदान का निष्पक्ष मूल्यांकन करने से भी बचते हैं। वह योगदान है — दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देश को गरीबी और पिछड़ेपन से निकालकर समृद्धि और शक्ति के शिखर तक पहुंचाना, और वह भी एक सदी से भी कम समय में। चीन ने आधुनिकीकरण का एक अलग रास्ता अपनाया है। यह रास्ता देश के अपने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रीय परिस्थितियों से उपजा है। यह कोई अस्थायी प्रयोग नहीं, बल्कि एक स्थायी और व्यावहारिक विकल्प है।

1921 से 2026 तक: बदली हुई सीपीसी

1921 में शांगहाई में 50 से ज्यादा सदस्यों के साथ शुरू हुई सीपीसी आज 10 करोड़ से ज्यादा सदस्यों की पार्टी है। उस छोटे समूह और आज की पार्टी में जमीन-आसमान का फर्क है। अब इसकी जड़ें चीन के हर शहर, काउंटी और गांव तक फैली हैं। पिछले 105 वर्ष लचीलापन और निरंतर अनुकूलन के प्रतीक रहे हैं। सीपीसी की सबसे बड़ी सफलता चीन को चीनी विशेषताओं वाले समाजवाद के मार्ग पर ले जाना है। इसी राह पर उसने व्यापक समृद्धि हासिल की, जीवन स्तर ऊंचा किया और चीनी राष्ट्र के महान कायाकल्प को आगे बढ़ाया।

इसकी ऐतिहासिक मिसाल 2020 में सामने आई, जब चीन ने “पहली शताब्दी का लक्ष्य” पूरा किया — “पूर्ण गरीबी का उन्मूलन”। 10 साल से कम समय में 1 करोड़ ग्रामीणों को गरीबी से बाहर निकालना मानव इतिहास का सबसे बड़ा अभियान था। दुनिया भर के नीति-निर्माताओं के लिए लोगों को “बेहतर जीवन” देने की सीपीसी की प्रतिबद्धता, लक्ष्य-आधारित शासन का अहम उदाहरण है।

आदर्श, वैधता और वैश्विक भूमिका

स्पष्ट आदर्शों और दीर्घकालिक योजना के साथ सीपीसी के नेतृत्व में चीन पूरी तरह बदल गया है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी नेतृत्व का नवीकरण करते हुए उसने हर संकट में खुद को ढाला, और अपने स्थापना मिशन से कभी भटकी नहीं। इसी निरंतरता की वजह से आज चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अग्रणी नवाचार केंद्र, और सबसे बड़ी शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा व स्वास्थ्य व्यवस्था वाला देश है। लोगों की औसत आयु भी 79 वर्ष से अधिक हो गई है। इसी रिकॉर्ड के दम पर व्यापार, जलवायु, बुनियादी ढांचे, तकनीक और जनस्वास्थ्य में चीन की आवाज अब वैश्विक नियम तय करने में अहम भूमिका निभाती है। कोई बाहरी दबाव इस राह को नहीं बदल सकता।

105वीं वर्षगांठ सिर्फ याद का दिन नहीं, बल्कि यह समझने का मौका है कि सीपीसी का अनुभव चीन और दुनिया के लिए क्या मायने रखता है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा: “सीपीसी में ऐसे गुण हैं जिनकी बराबरी कोई अन्य राजनीतिक दल नहीं कर सकता। सीपीसी सत्य की खोज के लिए प्रतिबद्ध है और हमेशा सही दिशा पर चलती है।”

विश्व विकास में चीन का योगदान

चीन में एक प्राचीन कहावत है: “गरीबी में स्वयं को सुधारो, समृद्धि में पहुंचकर मानव कल्याण को समर्पित हो जाओ।”इसी भावना से प्रेरित होकर चीन मानता है कि चीन की प्रगति से दुनिया बेहतर होगी, और दुनिया की समृद्धि से चीन को भी लाभ मिलेगा। इसी सोच के साथ चीन सभी देशों से आह्वान करता है कि वे आपसी सम्मान, समानता, न्याय और जीत-जीत सहयोग पर आधारित नए किस्म के अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाएं, और मानव जाति की भलाई को अपना साझा मिशन मानें।

चीन वैश्विक विकास का एक प्रमुख इंजन है। सुधार और उदारीकरण के बाद से चीन ने अपने विकास को विश्व विकास के साथ जोड़ा है। उसने खुद को वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में जिम्मेदारी से एकीकृत किया और अपनी तेज आर्थिक वृद्धि से विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिरता और गति दी है। विश्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि हाल के वर्षों में वैश्विक आर्थिक वृद्धि में चीन का योगदान 35% से अधिक रहा है। यह अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान के संयुक्त योगदान से भी ज्यादा है।

आज चीन 130 से अधिक देशों और क्षेत्रों का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। बेल्ट एंड रोड पहल के तहत चीन ने 150 से ज़्यादा देशों के साथ सहयोग दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर किए हैं। 2025 में इन देशों के साथ चीन का व्यापार 23.6 ट्रिलियन युआन, यानी लगभग 3.3 ट्रिलियन डॉलर, तक पहुँच गया है। चीन दुनिया को न सिर्फ सस्ती और गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं उपलब्ध कराता है, बल्कि विदेशी उत्पादों, सेवाओं और पूंजी के लिए एक बड़ा बाजार और बेहतर निवेश माहौल भी प्रदान करता है। साथ ही चीन अपने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिए अन्य देशों के विकास और बुनियादी ढांचे में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग) (लेखक- रविशंकर बसु)

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