इंटरनेशनल डेस्क: चीन ने 1 मई, 2026 से उन 53 अफ्रीकी देशों के साथ शून्य-टैरिफ उपायों को पूर्ण रूप से लागू करने का निर्णय लिया है, जिनके साथ उसके राजनयिक संबंध हैं। अधिकारियों के अनुसार, शून्य-टैरिफ नीति के तहत अतिरिक्त 20 अफ्रीकी देशों को शामिल करना उच्च-मानक उदारीकरण को बढ़ावा देने के प्रति देश की सक्रिय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह चीन की ओर से उच्च-स्तरीय खुलेपन का विस्तार करने की दिशा में एक नई पहल है। इस कदम के साथ चीन दुनिया की पहली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जिसने राजनयिक संबंध रखने वाले सभी अफ्रीकी देशों पर शून्य-टैरिफ का पूर्ण कवरेज लागू किया है।
राज्य परिषद के सीमा शुल्क शुल्क आयोग की घोषणा के अनुसार, 1 मई, 2026 से 30 अप्रैल, 2028 तक, चीन उन 20 अफ्रीकी देशों को शून्य-शुल्क व्यवहार प्रदान करेगा, जो चीन के साथ राजनयिक संबंध स्थापित कर चुके हैं और जिन्हें सबसे कम विकसित देशों के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है, और यह छूट एक तरजीही शुल्क दर के रूप में होगी।
इसमें कहा गया है कि दो साल की कार्यान्वयन अवधि के दौरान, चीन संबंधित अफ्रीकी देशों के साथ चीन-अफ्रीका साझा विकास आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत और हस्ताक्षर को बढ़ावा देना जारी रखेगा। यह नीति अफ्रीका के साथ आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और साझा विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाई गई है। इसके तहत अफ्रीकी देशों से चीन निर्यात होने वाले अधिकांश उत्पादों पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा, जिससे अफ्रीकी व्यापारियों को चीनी बाजार में अधिक सुगम पहुंच मिल सकेगी।
इसके अलावा, चीन ‘सामान्य विकास के लिए आर्थिक भागीदारी समझौते’ पर हस्ताक्षर को बढ़ावा देना जारी रखेगा। साथ ही, ‘ग्रीन चैनल’ (हरित गलियारे) को अपग्रेड करके अफ्रीकी उत्पादों के चीनी बाजार में प्रवेश का दायरा और विस्तारित किया जाएगा। इससे अफ्रीकी देशों के कृषि, वस्त्र और अन्य उद्योगों को चीन में बेहतर कीमत और निर्यात अवसर प्राप्त होंगे।
चीन का यह निर्णय “उच्च-स्तरीय ओपनिंग-अप” (High-level Opening-up) की उसकी रणनीति का हिस्सा है। इस नीति के तहत अफ्रीकी देशों से चीन में निर्यात होने वाले उत्पादों पर किसी प्रकार का आयात शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इससे अफ्रीकी उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और उन्हें चीनी बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे।
चीन न केवल टैरिफ खत्म कर रहा है, बल्कि “साझा विकास के लिए आर्थिक साझेदारी” (Economic Partnership for Common Development) समझौते को आगे बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। इस पहल का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार और निवेश को और मजबूत करना है।
अफ्रीका के लिए क्या मायने?
इस फैसले से अफ्रीकी देशों को कई स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना है:
* निर्यात में वृद्धि: बिना टैरिफ के उत्पाद सस्ते होंगे, जिससे मांग बढ़ेगी।
* रोजगार सृजन: बढ़ते निर्यात से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
* आर्थिक विकास: विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
वैश्विक व्यापार में नई मिसाल
चीन का यह कदम इसलिए भी खास है क्योंकि वह दुनिया की पहली बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है, जिसने अफ्रीका के साथ पूर्ण-स्तरीय शून्य-टैरिफ कवरेज लागू किया है। यह वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ सहयोग का एक नया मॉडल प्रस्तुत करता है।
चुनौतियां और सवाल
हालांकि इस पहल के कई सकारात्मक पहलू हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। जैसे अफ्रीकी देशों की उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना, और चीन के विशाल बाजार में प्रतिस्पर्धा करना।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) की रूपरेखा के अनुसार, देश व्यापक उदारीकरण और एक पारदर्शी, स्थिर और पूर्वानुमानित संस्थागत वातावरण बनाने के लिए सक्रिय रूप से पहल करेगा। इसने 2030 तक व्यापार और निवेश सहयोग की गुणवत्ता और स्तर में सुधार करने का भी संकल्प लिया है।
सीमा शुल्क आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीका के साथ चीन का व्यापार 2000 में 87.38 अरब युआन (12.78 अरब डॉलर) से बढ़कर 2025 में 2.49 ट्रिलियन युआन हो गया। 10 अरब युआन से बढ़कर ट्रिलियन युआन के स्तर तक पहुंचने पर, द्विपक्षीय व्यापार में 27.5 गुना वृद्धि दर्ज की गई है, जिसकी औसत वार्षिक वृद्धि दर 14.3 प्रतिशत है। इसी बीच, इस वर्ष की पहली तिमाही में, अफ्रीका से चीन के आयात में 14.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
गौरतलब है कि इससे पहले चीन कई विकासशील और अल्पविकसित देशों को टैरिफ रियायतें दे चुका है, लेकिन यह पहली बार है जब राजनयिक संबंध रखने वाले सभी अफ्रीकी देशों को एक साथ शून्य-टैरिफ का लाभ दिया जा रहा है। यह नीति चीन-अफ्रीका सहयोग को एक नई ऊंचाई पर ले जाने में सहायक होगी। चीन की यह शून्य-टैरिफ नीति केवल एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक पहल है, जो अफ्रीका के साथ उसके आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को और गहरा करेगी। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह कदम न केवल अफ्रीका के विकास को गति देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन को भी नई दिशा दे सकता है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)
मेष: दिन शुभ रहेगा...