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“समन्वय”: चीन की नई विकास सोच का अहम आधार

“समन्वय” चीन की नई विकास नीति का एक बहुत जरूरी हिस्सा है, और यह बात कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) की केंद्रीय समिति द्वारा स्वीकृत राष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए 15वीं पंचवर्षीय योजना तैयार करने संबंधी सिफारिशों में पूरी तरह झलकती है। यह सिफारिशें पार्टी की 20वीं केंद्रीय समिति के चौथे पूर्ण अधिवेशन में अपनाई गईं।

पिछले दस सालों में चीन ने समन्वित विकास के ज़रिए देश के अलग-अलग इलाकों में बेहतर तालमेल बनाया है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को लगातार रफ्तार मिली है। साथ ही, जब कई पश्चिमी देश संरक्षणवाद की राह पर हैं, तब चीन खुले और जुड़े हुए विश्व की सोच को आगे बढ़ा रहा है। साल 2015 में, जब चीन ने विकास के नए दौर को स्वीकार किया, तब उसने पाँच नई विकास अवधारणाएँ पेश कीं- नवाचार, समन्वय, हरित, खुलापन और साझा विकास। ये विचार उस समय सीपीसी की 18वीं केंद्रीय समिति के पाँचवें पूर्ण अधिवेशन में सामने रखे गए थे।

साल 2015 की वह योजना चीन के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ थी। इसने देश को सिर्फ तेज़ी से नहीं, बल्कि बेहतर तरीके से आगे बढ़ने की दिशा दी, जहाँ नवाचार हो, टिकाऊपन हो और आत्मनिर्भरता की भावना हो। अब अगर “समन्वय” की बात करें, तो यह सिर्फ साथ काम करने की बात नहीं है। यह एकरूप सोच, साझी दिशा और साझा जिम्मेदारी की भावना है। सीपीसी के लिए यह कोई नया विचार नहीं है; उसकी पूरी विचारधारा ही सामूहिक प्रयास पर टिकी है। शासन हो, कूटनीति हो या कोई बड़ा सुधार… हर चीज़ में विचार और काम का मेल होना जरूरी है।

सीपीसी का हमेशा से मानना रहा है कि योजनाएँ चाहे कितनी भी शानदार हों, अगर उन्हें अमल में लाने का अनुशासन नहीं है तो उनका कोई मतलब नहीं। इसलिए अनुशासन ही वह कड़ी है जो हर प्रयास को जोड़कर एक संगठित गति देती है। अगर आप चीन के विकास मॉडल को देखें, तो “साथ-साथ बढ़ने” की यह सोच हर जगह दिखती है। जैसे कि पश्चिमोत्तर चीन के शिनच्यांग उइगुर स्वायत्त प्रदेश और इनर मंगोलिया स्वायत्त प्रदेश जैसे इलाकों में बनने वाली पवन और सौर ऊर्जा को अल्ट्रा-हाई वोल्टेज ग्रिड के ज़रिए पूर्वी चीन तक पहुँचाया जाता है।

दूसरी तरफ, क्वांगतोंग-हांगकांग-मकाओ ग्रेटर बे एरिया तकनीक के मामले में दुनिया में पहचान बना चुका है। विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) की इनोवेशन क्लस्टर रैंकिंग 2025 में शनचन-हांगकांग-क्वांगचो क्षेत्र दुनिया में सबसे ऊपर है। आज जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन में बदलाव बढ़ रहा है, तब चीन का ध्यान फिर से “उच्च गुणवत्ता वाले विकास” पर केंद्रित होना और भी अहम हो गया है। यही वजह है कि हालिया अधिवेशन में चीन ने साफ कहा है, “हम अपने रास्ते पर डटे रहेंगे और दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करेंगे।”

सीपीसी की सिफारिशों में “समन्वय” से जुड़ी कई बातें हैं। जैसे- “पाँचों क्षेत्रों की एकीकृत योजना और चारों रणनीतियों का समन्वित अमल”, “शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और मानव संसाधन को मिलाकर आगे बढ़ाना”, और “क्षेत्रीय विकास में संतुलन बनाना”।इन सभी प्रयासों का मकसद एक ही है– चीन को नई शुरुआत के साथ समन्वित विकास के ज़रिए आगे बढ़ाना और उच्च गुणवत्ता वाला विकास सुनिश्चित करना। नई विकास सोच को पूरी गंभीरता से अपनाकर, हर स्तर पर तालमेल बढ़ाकर और सतत रफ्तार बनाए रखते हुए, चीन अपने आधुनिकीकरण के लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

वैश्विक स्तर पर भी देखें तो “समन्वय” आज पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। पश्चिमी देशों के बढ़ते संरक्षणवाद के बीच, विकासशील देशों के लिए ज़रूरी है कि वे मिलकर, समय पर और सोच-समझकर कदम उठाएँ। यही साझा एकजुटता दुनिया की तस्वीर बदल सकती है, कमज़ोरी को ताकत में बदल सकती है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उनका हक दिला सकती है।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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