साल 2026 में वैश्विक अनिश्चितता और भी गहरी हो गई है। लगातार बढ़ते संघर्षों और अस्थिरता ने युद्धोत्तर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है। विश्व आर्थिक मंच और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन जैसी प्रमुख बैठकों में दी गई चेतावनियों ने भविष्य को लेकर वैश्विक चिंताओं को और तीव्र कर दिया है। ऐसे समय में, चीनी राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (एनपीसी) के दौरान चीन के विदेश मंत्री वांग यी द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस संवाद के माध्यम से यह संकेत स्पष्ट रूप से सामने आया कि उथल-पुथल भरी वैश्विक परिस्थितियों के बीच चीन स्वयं को स्थिरता और निश्चितता प्रदान करने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
लगभग 90 मिनट तक चली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो के सदस्य और विदेश मंत्री वांग यी ने प्रमुख देशों के साथ संबंधों, क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों सहित कुल 21 विषयों पर चीन की स्थिति को विस्तार से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि चीन आधिपत्य और दादागिरी की राजनीति का विरोध करता है तथा संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका और द्वितीय विश्व युद्ध में प्राप्त विजय की उपलब्धियों को बनाए रखने का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि 150 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समर्थन प्राप्त चीन की वैश्विक शासन पहलें संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और उद्देश्यों के अनुरूप हैं।
चीन केवल अपने रुख को शब्दों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि ठोस कदमों के माध्यम से अपनी प्रतिबद्धताओं को भी दर्शाता है। चीन ने अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायालय की स्थापना की पहल प्रस्तुत की है और कंबोडिया–थाईलैंड के बीच उत्पन्न तनाव में मध्यस्थता की भूमिका निभाई है। इसके साथ ही, उसने शांगहाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों को वैश्विक दक्षिण के देशों को अधिक आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। हाल ही में ईरान में बढ़ते तनाव के संदर्भ में भी चीन ने युद्धविराम का आह्वान किया और स्थिति को शांत करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की। इसी उद्देश्य से चीन ने पाँच सिद्धांतों का प्रस्ताव रखते हुए एक विशेष दूत भी भेजा, जिसके बाद कुछ विदेशी मीडिया ने चीन को “स्थिरता का ध्रुव” कहकर संबोधित किया।
साझा विकास को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026–2030) के मसौदे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक उत्सुकता पैदा की है। विभिन्न देशों के नेता सहयोग के नए अवसरों की तलाश में लगातार चीन का दौरा कर रहे हैं। पिछले पाँच वर्षों के दौरान चीन की अर्थव्यवस्था औसतन 5.4 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी है और इसने वैश्विक आर्थिक विकास में 30 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। आने वाले समय में चीन उच्च स्तरीय उदारीकरण की नीति को जारी रखते हुए “विश्व के कारखाने” और “विश्व के बाज़ार” दोनों की भूमिका निभाने का लक्ष्य रखता है, ताकि वह वैश्विक विकास का एक स्थिर और विश्वसनीय इंजन बना रहे।
नए वर्ष में चीन कई महत्वपूर्ण विदेशी दौरों की योजना बना रहा है और एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपेक) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी भी करेगा। यह कदम प्रमुख देशों के साथ उसकी सक्रिय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। ऐसे समय में, जब दुनिया अनेक चुनौतियों और अनिश्चितताओं से जूझ रही है, एक स्थिर और लचीला चीन न केवल अपने नागरिकों के लिए, बल्कि पूरे विश्व समुदाय के लिए भी एक महत्वपूर्ण सहारा और अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)