इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका द्वारा रूस की दो प्रमुख तेल कंपनियों रॉसनेफ्ट (Rosneft) और ल्यूकऑयल (Lukoil) पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत की रिफाइनरी कंपनियों के सामने कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब तक रूस भारत के लिए सस्ते कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका था, लेकिन नए प्रतिबंधों के बाद भारत को तेल खरीद के लिए पश्चिम एशिया, लातिन अमेरिका और अमेरिका जैसे नए विकल्पों की ओर रुख करना पड़ सकता है।
21 नवंबर तक मौजूदा सौदे खत्म करने के निर्देश
अमेरिकी वित्त विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि रॉसनेफ्ट और ल्यूकऑयल से जुड़े सभी मौजूदा व्यापारिक सौदे 21 नवंबर 2025 तक समाप्त कर दिए जाएं। अमेरिका ने यह भी चेतावनी दी है कि जो भी कंपनियां चाहे वे अमेरिकी हों या विदेशी इन प्रतिबंधित कंपनियों से कारोबार जारी रखेंगी, उन्हें भी सेकेंडरी सैंक्शन का सामना करना पड़ सकता है।
रूसी तेल पर भारत की निर्भरता
वर्तमान में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग एक-तिहाई हिस्सा रूस से आता है। इस साल रूस ने भारत को औसतन 17 लाख बैरल प्रतिदिन तेल भेजा है, जिसमें से करीब 12 लाख बैरल रॉसनेफ्ट और ल्यूकऑयल से ही आया। इन सौदों का सबसे बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और नायरा एनर्जी की ओर से था, जबकि सरकारी तेल कंपनियों की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही।
रिलायंस हो सकती है रूसी तेल से दूरी बनाने वाली पहली कंपनी
तेल बाजार विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिबंधों के बाद सबसे पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज रूस से कच्चे तेल का आयात रोक सकती है। कंपनी के पास रॉसनेफ्ट के साथ 25 साल का दीर्घकालिक अनुबंध है, जिसके तहत उसे रोजाना करीब 5 लाख बैरल तेल मिलना था। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों से संभावित जोखिम को देखते हुए कंपनी वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश में है।
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नायरा एनर्जी के लिए मुश्किल समय
दूसरी ओर, नायरा एनर्जी की स्थिति ज्यादा जटिल है, क्योंकि वह बड़ी मात्रा में रूसी तेल पर निर्भर है। यूरोपीय आपूर्तियों में कमी आने के बाद कंपनी के पास विकल्प बेहद सीमित हैं। विश्लेषकों का कहना है कि नायरा जैसे निजी रिफाइनर भविष्य में तीसरे पक्ष के बिचौलियों के माध्यम से रूसी ग्रेड का तेल खरीद सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया बहुत सतर्कता के साथ की जाएगी।
रूसी तेल आपूर्ति में कमी की भरपाई के लिए भारतीय कंपनियां अब सऊदी अरब, इराक, यूएई, ब्राजील, नाइजीरिया, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों से खरीद बढ़ा सकती हैं। हालांकि, इन स्रोतों से मिलने वाला तेल अपेक्षाकृत महंगा है, जिससे भारत के तेल आयात बिल में वृद्धि तय है।
भारत के लिए आर्थिक असर
इक्रा लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, रूस से सस्ते तेल की खरीद बंद होने से भारत का वार्षिक आयात खर्च करीब 2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि रूस से आने वाले तेल का हिस्सा कुल आयात का लगभग 60 प्रतिशत है, इसलिए इसकी भरपाई के लिए भारत को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

