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बलूचिस्तान में भीषण बम विस्पोट : 2 लोगों की मौत व 10 घायल, सुरक्षा कर्मियों द्वारा रेस्क्यू जारी

May 19, 2025

बलूचिस्तान में भीषण बम विस्पोट : 2 लोगों की मौत व 10 घायल, सुरक्षा कर्मियों द्वारा रेस्क्यू जारी

कराची: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के किला अब्दुल्ला जिले में रविवार को हुए एक भीषण बम धमाके ने एक बार फिर इस अशांत क्षेत्र की नाजुक सुरक्षा स्थिति को उजागर कर दिया। जब्बार मार्केट के पास हुए इस धमाके में 2 लोगों की मौत हो गई और कम से कम 10 लोग घायल हो गए।

स्थानीय प्रशासन और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, धमाका उस समय हुआ जब बाजार में आम दिनों की तरह चहल-पहल थी। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की कई दुकानें मलबे में तब्दील हो गईं और कुछ प्रतिष्ठानों में आग लग गई। घटनास्थल से उठता धुएं का गुबार दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था, जिससे पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई।

-हमले के बाद फायरिंग और तलाशी अभियान

किला अब्दुल्ला के उपायुक्त रियाज खान ने बताया कि बाजार फ्रंटियर कोर (एफसी) की पिछली दीवार के पास स्थित था। धमाके के तुरंत बाद अज्ञात हमलावरों और एफसी कर्मियों के बीच गोलीबारी भी हुई। घटना के तुरंत बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पूरे इलाके को सील कर दिया और तलाशी अभियान शुरू किया गया। घायलों में कबायली बुजुर्ग हाजी फैजुल्लाह खान गबीजई का एक निजी सुरक्षाकर्मी भी शामिल है, जो उस वक्त बाजार के पास मौजूद था। अन्य घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

-बलूचिस्तान: दशकों से हिंसा 

यह हमला उस समय हुआ है जब बलूचिस्तान पहले से ही अस्थिरता और हिंसक घटनाओं की चपेट में है। कुछ ही दिन पहले खुजदार जिले के नाल इलाके में एक चेक पोस्ट पर अज्ञात बंदूकधारियों ने हमला कर चार लेवी कर्मियों की हत्या कर दी थी। लेवी बल बलूचिस्तान जैसे आदिवासी और दूरदराज के इलाकों में सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले अर्ध-सैन्य कर्मी होते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में इन पर हमलों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है।

-विरोध और शोषण का आरोप

बलूचिस्तान लंबे समय से राजनीतिक असंतोष और आर्थिक शोषण के आरोपों से घिरा हुआ है। स्थानीय बलूच समूह और राजनीतिक पार्टियाँ लगातार यह दावा करती रही हैं कि संघीय सरकार प्रांत की खनिज संपदा का दोहन कर रही है, जबकि इलाके के लोगों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा गया है। इसी असंतोष ने हिंसक आंदोलनों को जन्म दिया है, जो समय-समय पर सुरक्षाबलों और आम नागरिकों को निशाना बनाते रहे हैं।

-सरकार की प्रतिक्रिया और भविष्य की चुनौती

हालांकि सरकार की ओर से अब तक इस घटना की आधिकारिक रूप से निंदा की गई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, लेकिन यह साफ है कि बलूचिस्तान में शांति स्थापना के लिए केवल सैन्य उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। स्थायी समाधान के लिए संवाद, विकास और स्थानीय जनता को अधिकार देने की नीति आवश्यक है।

इस ताजा धमाके ने न केवल निर्दोष नागरिकों की जान ली है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि बलूचिस्तान में हालात अब भी विस्फोटक हैं। जब तक जमीनी हकीकतों को स्वीकार कर राजनीतिक समाधान की ओर नहीं बढ़ा जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाएं रुकने की उम्मीद धुंधली ही रहेगी।

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