इंटरनेशनल न्यूज: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने जन्म के आधार पर मिलने वाली नागरिकता (बर्थराइट सिटिजनशिप) को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने की व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी। इस फैसले को अमेरिका में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासी परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
यह मामला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश से जुड़ा था, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे लोगों या अस्थायी वीजा पर रहने वाले विदेशी नागरिकों के बच्चों को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलेगी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस व्यवस्था में बदलाव को मंजूरी नहीं दी।
14वें संशोधन के आधार पर सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में अमेरिका के संविधान के 14वें संशोधन का हवाला दिया। यह संशोधन गृह युद्ध के बाद लागू किया गया था और इसके अनुसार अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति अमेरिकी नागरिक माना जाता है। कोर्ट ने कहा कि यह संवैधानिक व्यवस्था लंबे समय से लागू है और इसे बनाए रखा जाएगा। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने का नियम पहले की तरह लागू रहेगा।
एक पेड़ माँ के नाम…दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने लॉन्च किया ग्रीन ड्राइव पोर्टल, 70 लाख पौधे लगाना लक्ष्य
अमेरिका के चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने फैसले में कहा कि नागरिकता केवल एक कानूनी पहचान नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में बराबरी से भाग लेने का अधिकार भी है। 14वें संशोधन के जरिए यह अधिकार अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी लोगों को देने का वादा किया गया था और अदालत उसी संवैधानिक वादे को कायम रख रही है। संविधान की भावना को ध्यान में रखते हुए इस अधिकार की रक्षा करना जरूरी है।
क्या था ट्रंप का आदेश?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले दिन एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। इस आदेश में कहा गया था कि यदि किसी बच्चे के माता-पिता अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे हों या केवल अस्थायी वीजा पर मौजूद हों, तो उस बच्चे को जन्म के आधार पर अमेरिकी नागरिकता नहीं दी जाएगी। यह फैसला ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीति का हिस्सा था। प्रशासन का कहना था कि इस कदम से अवैध प्रवास को रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि, ट्रंप के इस आदेश को कई निचली अदालतों ने पहले ही रोक दिया था, जिसके कारण यह नियम देश में कहीं भी लागू नहीं हो पाया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां इस पर अंतिम फैसला सुनाया गया।
अदालत में हुई थी लंबी बहस
इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीशों ने ट्रंप प्रशासन के आदेश की वैधता पर सवाल उठाए थे। मामले को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों में से एक माना गया, क्योंकि इसका असर लाखों प्रवासी परिवारों पर पड़ सकता था।
भारतीय परिवारों को क्या होगा फायदा?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे बड़ा असर अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों पर पड़ेगा। अब यदि किसी भारतीय दंपति के घर अमेरिका में बच्चे का जन्म होता है, तो वह बच्चा पहले की तरह अमेरिकी नागरिक माना जाएगा, चाहे उसके माता-पिता किसी भी वीजा श्रेणी में रह रहे हों या उनका इमिग्रेशन मामला लंबित हो। इस फैसले से अमेरिका में रह रहे हजारों भारतीय परिवारों की चिंता दूर हुई है। ट्रंप के प्रस्तावित नियम के कारण कई परिवार भविष्य को लेकर असमंजस में थे, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें बड़ी राहत मिली है।
क्या है इस फैसले का महत्व?
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय ने साफ कर दिया है कि अमेरिका में जन्म के आधार पर नागरिकता की संवैधानिक व्यवस्था फिलहाल जारी रहेगी। साथ ही यह फैसला इस बात का भी संकेत है कि संविधान में दिए गए मूल अधिकारों में बदलाव करना आसान नहीं है। इस फैसले को अमेरिका की आव्रजन नीति और वहां रहने वाले लाखों प्रवासी परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय माना जा रहा है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...