इंटरनेशनल डेस्क: 2 सितंबर को चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रूसी संघ की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु के साथ चीन और रूस के बीच 20वें दौर के रणनीतिक सुरक्षा परामर्श की सह-अध्यक्षता की। इस परामर्श में दोनों देशों के रणनीतिक सुरक्षा हितों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर व्यापक और गहन संवाद किया गया, नई सहमतियाँ प्राप्त की गई और रणनीतिक आपसी विश्वास को बढ़ाना मिला। दोनों पक्षों ने रणनीतिक सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों राष्ट्राध्यक्षों द्वारा संपन्न महत्वपूर्ण सहमतियों को पूरी तरह से लागू करने और द्विपक्षीय रणनीतिक सहयोग को और उच्च स्तर तक बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।
इस दौरान, वांग यी ने कहा कि चीन-रूस रणनीतिक सुरक्षा परामर्श तंत्र अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहन संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, और चीन-रूस के मूल हितों की रक्षा के लिए रणनीतिक समन्वय का एक महत्वपूर्ण मंच भी है। अपनी स्थापना के बाद से पिछले 20 वर्षों में, इस तंत्र ने दोनों राष्ट्राध्यक्षों द्वारा प्राप्त महत्वपूर्ण सहमतियों को लागू करने, दोनों देशों के रणनीतिक निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आपसी राजनीतिक विश्वास को बढ़ाया है। वर्तमान परिस्थितियों में इस तंत्र का मूल्य और महत्व और भी अधिक स्पष्ट है। दोनों पक्षों को इस तंत्र की भूमिका का लाभ उठाते हुए रणनीतिक संचार और सहयोग को मज़बूत करते हुए एक-साथ बाहरी चुनौतियों का सामना करना चाहिए।
वहीं, सर्गेई शोइगु ने कहा कि रूस और चीन के बीच रणनीतिक सहयोग अभूतपूर्व उच्च स्तर पर है, जो दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों में है और क्षेत्रीय व विश्व शांति के लिए अनुकूल है। रूस और चीन बाहरी हस्तक्षेप से मुक्त, पारस्परिक सम्मान के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों का विकास कर रहे हैं। रूस एक-चीन सिद्धांत का दृढ़ता से पालन करता है, थाईवान, शीत्सांग (तिब्बत), शिनच्यांग और हांगकांग से संबंधित मुद्दों पर चीन के रुख का दृढ़ता से समर्थन करता है। इसके साथ ही, रूस चीन के साथ मिलकर दोनों राष्ट्राध्यक्षों द्वारा प्राप्त आम सहमति को लागू करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करना चाहता है, और अधिक न्यायसंगत व उचित बहुध्रुवीय विश्व की स्थापना को बढ़ावा देने को तैयार है।
इसके अलावा, परामर्श में दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि उन्हें द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत के परिणामों को दृढ़ता से कायम रखना चाहिए, जो जीवन और रक्त से प्राप्त की गई थी, औपनिवेशिक आक्रमण के इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास करने वाले किसी भी गलत शब्दों या कार्यों का दृढ़ता से विरोध करना चाहिए, फासीवाद और जापानी सैन्यवाद की वापसी के किसी भी प्रयास का दृढ़ता से मुकाबला करना चाहिए, और विश्व शांति व सुरक्षा की रक्षा करने और ऐतिहासिक सत्य व अंतर्राष्ट्रीय न्याय को कायम रखने में महा देशों और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों के रूप में चीन और रूस की आम जिम्मेदारियों को उठाना चाहिए।
एक और ख़बर के अनुसार, वांग यी ने उस दिन मास्को में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ भी मुलाकात की। इस दौरान वांग यी ने कहा कि राष्ट्रपति शी चिनफिंग और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रणनीतिक मार्गदर्शन में, चीन-रूस संबंधों ने तूफानों और चुनौतियों का सामना करते हुए उच्च-स्तरीय, व्यापक-आयामी और उच्च-गुणवत्ता वाला विकास हासिल किया है। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने इस वर्ष द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में अपनी-अपनी उपस्थिति के साथ, दो अलग-अलग अवसरों पर गहन संवाद किया, जिसमें संयुक्त रूप से दुनिया के सामने मौजूद गहन परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित किया और चीन-रूस संबंधों की दिशा निर्धारित की, साथ ही दुनिया को स्थिरता और निश्चितता प्रदान की।
वांग यी के अनुसार, खास बात यह है कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने द्वितीय विश्व युद्ध में मिली जीत की उपलब्धियों को दृढ़ता से कायम रखने तथा औपनिवेशिक आक्रमण पर फैसले को पलटने के किसी भी प्रयास का दृढ़तापूर्वक विरोध करने पर सहमति व्यक्त की, जिससे न्याय और निष्पक्षता को कायम रखने का एक मजबूत संदेश गया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों और नए युग में व्यापक रणनीतिक सहयोगी साझेदारों के रूप में, चीन और रूस को लगातार समन्वय और सहयोग करते हुए जापान की अति-दक्षिणपंथी ताकतों की उत्तेजक कार्रवाइयों पर दृढ़तापूर्वक अंकुश लगाना चाहिए, जो क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को नष्ट करती हैं और क्षेत्र का पुनः सैन्यीकरण करने का प्रयास करती हैं।
राष्ट्रपति पुतिन ने अभी-अभी चीनी नागरिकों के लिए वीज़ा-मुक्त आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं। वांग यी ने इसके बारे में बात करते हुए कहा कि यह नए युग में चीन और रूस के बीच समन्वय की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है, और दोनों देशों के बीच कार्मिक आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाएगा और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देगा। चीन वीजा-मुक्त नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने और इसे सफल बनाने के लिए रूस के साथ काम करने को तैयार है।
वहीं सर्गेई लावरोव ने मुलाकात में कहा कि इस वर्ष, दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने यात्राओं का आदान-प्रदान किया, जिससे रूस-चीन व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने में नई प्रेरित शक्ति मिली। रूस एक-चीन सिद्धांत का पालन करता है और थाईवान मुद्दे पर चीन के रुख का दृढ़ता से समर्थन करता है। अगले वर्ष “रूस-चीन अच्छे पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण सहयोग की संधि” पर हस्ताक्षर की 25वीं वर्षगांठ होगी, रूस इसका लाभ उठाते हुए चीन के साथ उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान को मज़बूत करना चाहता है, व्यावहारिक सहयोग को गहरा करना चाहता है, लोगों के बीच आवाजाही को बढ़ाना चाहता है, ताकि आपसी लाभ और जीत-जीत वाले परिणाम प्राप्त किया जा सके।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

