संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू छ्योंग ने 26 जनवरी को सुरक्षा परिषद की अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन पर खुली बहस में एक पूरक बयान दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधि द्वारा अपने भाषण में की गई उन गलत टिप्पणियों का खंडन किया, जिनमें दक्षिण चीन सागर में चीन के तथाकथित “विस्तारवादी अवैध दावे” को बदनाम किया गया था।
फू छ्योंग ने कहा कि चीन दक्षिण चीन सागर मुद्दे के संबंध में अमेरिकी प्रतिनिधि द्वारा की गई गलत टिप्पणियों का कड़ा विरोध करता है और चीन के पास कड़ा जवाब देने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। दक्षिण चीन सागर में स्थित द्वीपों और उनके निकटवर्ती जलक्षेत्रों पर चीन की निर्विवाद संप्रभुता है, और संबंधित जलक्षेत्रों पर चीन के संप्रभु अधिकार और क्षेत्राधिकार हैं। दक्षिण चीन सागर में चीन की प्रादेशिक संप्रभुता और समुद्री अधिकारों का पर्याप्त ऐतिहासिक और कानूनी आधार है।
फू छ्योंग ने यह भी कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि का पक्षकार नहीं है, और उसे संधि के न्यायाधीश के रूप में कार्य करने और अन्य देशों पर उंगली उठाने का कोई अधिकार नहीं है। अमेरिका ने दक्षिण चीन सागर मुद्दे के ऐतिहासिक संदर्भ और वस्तुनिष्ठ तथ्यों की अनदेखी करते हुए अफवाहें फैलाई हैं और हर जगह फूट डाली है। उसने दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में ज़मीन से मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइलों सहित आक्रामक हथियार भी तैनात किए हैं।
“नौकायन की स्वतंत्रता” की आड़ में, उसने अक्सर सैन्य टोही और अभ्यास करने के लिए दक्षिण चीन सागर में उन्नत जहाज और विमान भेजे हैं, और चीन के क्षेत्रीय जलक्षेत्र, हवाई क्षेत्र और उसके द्वीपों और चट्टानों से सटे समुद्र और हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की है। दक्षिण चीन सागर में कौन जबरदस्ती और दादागिरी कर रहा है? कौन क्षेत्रीय स्थिरता को भंग कर रहा है, नौवहन की स्वतंत्रता और सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है और अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन को कमजोर कर रहा है? सच्चाई स्वतः स्पष्ट है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)
मेष: दिन शुभ रहेगा...