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ब्रेन कंप्यूटर इंटरफेस में चीन का विकास और प्रगति

china news

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इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की कंपनी का दावा है कि उनकी न्यूरालिंक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस यानी बीसीआई की दुनिया की सबसे विकसित और अग्रणी कंपनी है। उन्हें शायद पता नहीं है कि चुपचाप काम करते हुए चीन के बीसीआई उद्योग ने रिसर्च से आगे कदम बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर बढ़ रहा है।

टेक्नॉलजी पर समाचार देने वाले आउटलेट टेकक्रंच के अनुसार, कई चीनी स्टार्टअप ने बीसीआई उपकरणों के व्यावसायिक उत्पादन की तैयारियां तेज कर दी हैं। इनमें प्रत्यारोपण करने वाली तकनीक वाले उपकरण भी शामिल हैं। माना जा रहा है कि चीन का बीसीआई उद्योग आने वाले दिनों में चिकित्सा और प्रौद्योगिकी दोनों क्षेत्रों में नया और क्रांतिकारी होगा।

टेकक्रंच के अनुसार, साल 2040 तक चीन का बीसीआई बाजार साल 2025 के 530 मिलियन डॉलर यानी करीब 3.8 बिलियन युआन की तुलना में 16,500 से 17,000 मिलियन डॉलर यानी करीब 120 बिलियन युआन से अधिक हो जाएगा। चीन की बीसीआई तकनीक आगामी तीन से पांच वर्षों में, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र पर केंद्रित होगा। इससे स्वास्थ्य बीमा कवरेज के विस्तार के साथ-साथ अरबों डॉलर के बाजार के विकसित होने की उम्मीद है। वैसे भी, सिचुआन, हुबेई और झाजियांग जैसे प्रांतों ने पहले ही स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बीसीआई-आधारित मूल्य निर्धारण शुरू कर दिया है, जिससे इस तकनीक को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

चीन के बीसीआई उद्योग की कोशिश स्वास्थ्य सेवाओं से आगे निकलने की है। यहां के न्यूरोएक्सेस और गेस्टाला नामक दो स्टार्टअप्स के संस्थापक फीनिक्स पेंग के अनुसार, बीसीआई तकनीक धीरे-धीरे उपचार से हटकर “मानवीय क्षमताओं को विकसित ” करने की ओर अग्रसर होगी। उनके मुताबिक, बीसीआई “कार्बन-आधारित बुद्धिमत्ता यानी मानव दिमाग और सिलिकॉन-आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बीच आखिरी सेतु के रूप में कार्य करेगा।

चीन में बीसीआई के विकास को गति देने और अमेरिका को टक्कर देने में यहां कंपनियां बड़ी भूमिका निभा रही हैं। इस क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनियां न्यूरालिंक, सिंक्रोन और पैराड्रोमिक्स को चुनौती देने में चीन के चार मुख्य कारकों ने सक्षम बनाया है। सबसे पहला कारक मजबूत सरकारी नीतिगत समर्थन है। इस सिलसिले में अगस्त 2025 में चीन ने साल 2027 तक इस क्षेत्र में तकनीकी उपलब्धियों को हासिल करने और 2030 तक आपूर्ति श्रृंखला को पूरा करने के उद्देश्य को लेकर राष्ट्रीय रोडमैप की घोषणा की थी।

दिसंबर 2025 में बीसीआई कंपनियों को अनुसंधान से लेकर व्यावसायीकरण तक की सहायता देने के लिए शेन्ज़ेन में 165 मिलियन डॉलर यानी करीब 11.6 बिलियन युआन का मस्तिष्क विज्ञान कोष स्थापित किया था। चीन में बीसीआई के विकास में वहां मौजूद प्रचुर संसाधन हैं। बड़ी संख्या में रोगियों और कम अनुसंधान लागत के कारण नैदानिक परीक्षणों का यहां तेजी से विकास हो रहा है। चीन ने लकवाग्रस्त रोगियों के लिए देश का पहला पूरी तरह से वायरलेस बीसीआई प्रत्यारोपण का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा कर लिया है। अमेरिकी कंपनी न्यूरालिंक के बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाला यह दुनिया का दूसरा परीक्षण है।

इसके साथ ही चीन के पास एक अत्यंत विकसित औद्योगिक विनिर्माण आधार है। सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और चिकित्सा उपकरण जैसे उद्योगों के विकास ने अनुसंधान, विकास और तीव्र प्रोटोटाइपिंग को मजबूती से बढ़ावा दिया है। चीन में बीसीआई के विकास में वहां जारी रणनीतिक निवेश है। इस मद में सरकार के साथ ही निजी पूंजी का भी निवेश हो रहा है। चीनी व्यवसाय वर्तमान में विभिन्न तरीकों से बीसीआई बिल्ट-कंटेंट इंटरवेंशन की ओर अग्रसर हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में चीन के बीसीआई कानूनी ढांचे को अंतर्राष्ट्रीय मानकों जैसे कि अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (आईईसी), अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) और अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के एक भाग, अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन के दिशानिर्देशों के अनुरूप समायोजित हो सकेगा। चीनी नियामकों से उम्मीद की जा रही है कि वे गैर-आक्रामक उपकरणों के लिए अनुमोदन प्रक्रिया को आसान बनाएंगे, जबकि आक्रामक प्रत्यारोपणों और मस्तिष्क डेटा संप्रभुता के मुद्दों पर निगरानी को कड़ा करेंगे। नैतिक रूप से, चीन “सहमति” की आवश्यकताओं को बढ़ाएगा, चिकित्सा क्षेत्र से परे नैतिक समीक्षाओं का विस्तार करेगा और नैदानिक मूल्यांकन के लिए समान मानक स्थापित करेगा।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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