Last Updated: September 23, 2026

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चीन का विकास मॉडल अधिक स्थिर और स्वस्थ है

June 30, 2025

चीन का विकास मॉडल अधिक स्थिर और स्वस्थ है

इंटरनेशनल डेस्क। चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के आर्थिक विकास के संदर्भ में बिल्कुल अलग तरीके हैं। चीन ने अपने विनिर्माण उद्योग और वास्तविक अर्थव्यवस्था का लगातार विकास किया है। अब चीन का सकल घरेलू उत्पाद अमेरिका का 66% है, लेकिन इसका विनिर्माण उद्योग अमेरिका के दोगुने से भी अधिक है। उधर, अमेरिका सतह की आर्थिक समृद्धि बनाए रखने के लिए डॉलर आधिपत्य और वित्तीय सेवाओं पर अपने एकाधिकार पर निर्भर करता है, पर वास्तव में उसकी औद्योगिक शक्ति कमजोर बनने लगी है। देशों की शक्ति तथा औद्योगिक एवं वित्तीय विकास स्तर के बीच घनिष्ठ संबंध है, चीन का आर्थिक विकास मॉडल अधिक स्थिर और स्वस्थ है। चीन के पास दुनिया की सबसे पूर्ण औद्योगिक श्रृंखला है और वह लगभग सभी औद्योगिक उत्पादों का स्वतंत्र रूप से निर्माण कर सकता है। उधर, अमेरिका अपने विनिर्माण उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापार और कर युद्धों का उपयोग कर रहा है।

चीन अब विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अमेरिका का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 29 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जबकि चीन का लगभग 19 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है। हालाँकि, दोनों देशों में जीडीपी के अर्थ पूरी तरह से अलग हैं। चीन की अर्थव्यवस्था वास्तविक अर्थव्यवस्था जैसे इस्पात, जहाज निर्माण और बिजली उत्पादन में अभिव्यक्त होती है। चीन के विनिर्माण उद्योग का पैमाना अमेरिका, जापान और जर्मनी के योग से भी अधिक है। हालाँकि, वित्तीय क्षेत्र में, चीन के आयात और निर्यात अभी भी अमेरिका के एकाधिकार वाली अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली द्वारा प्रतिबंधित हैं। अमेरिकी सरकार विनिर्माण की वापसी पर जोर देती है, लेकिन वह अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली पर अमेरिकी एकाधिकार के बारे में बिल्कुल भी बात नहीं करती है। पिछले कुछ वर्षों में डॉलर के प्रभुत्व और वित्तीय सेवा उद्योग ने अमेरिका को भारी लाभ पहुंचाया है। 2007 के वित्तीय संकट के बाद के 18 वर्षों में, अमेरिका ने बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर जारी कर भारी संपत्ति आय प्राप्त कर ली है। इसने न केवल संकट को अन्य देशों में स्थानांतरित कर दिया, बल्कि अन्य देशों में बड़ी संख्या में उद्योगों पर कब्ज़ा करने का अवसर भी प्राप्त कर लिया।

आर्थिक विकास में वित्तीय सेवा उद्योग के पुनरोद्धार करने की भी आवश्यकता है, और विनिर्माण उद्योग को दूसरों द्वारा नियंत्रित होने से बचने के लिए वित्तीय उद्योग के साथ समन्वय में विकसित होना चाहिए। यह वास्तव में वह साझा दिशा है जिस पर अमेरिका और चीन वर्तमान में काम कर रहे हैं। यदि क्रय शक्ति समता के आधार पर गणना की जाए, तो चीन का आर्थिक आकार 2014 की शुरुआत में ही अमेरिका से आगे निकल गया था। दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाएं अमेरिका, चीन और भारत होना चाहिये। लेकिन चूंकि पश्चिमी देशों की गणना पद्धति में केवल विनिर्माण और वास्तविक अर्थव्यवस्था की उपेक्षा की जाती है, इसलिए वित्तीय सेवाओं जैसी आभासी अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों को एकीकृत करके अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान जैसे पश्चिमी देशों के सकल घरेलू उत्पाद का आकार बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है।  क्रय शक्ति समता द्वारा गणना किए गए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 2024 में चीन का सकल घरेलू उत्पाद अमेरिका का 130.1% तक पहुंच गया, और वैश्विक आर्थिक गुरुत्वाकर्षण का केंद्र एशिया में स्थानांतरित होता जा रहा है।

अगर हम क्रय शक्ति समता गणना पद्धति की सतही महिमा से संतुष्ट हैं, तो यह जोखिम भरा भी है, क्योंकि यह आर्थिक सांख्यिकीय पद्धति वित्त और प्रौद्योगिकी जैसे उच्च-अंत आर्थिक क्षेत्रों के वास्तविक प्रभाव को मापना मुश्किल है, जिससे वास्तविक आर्थिक ताकत का अधिक आकलन हो जाता है। बाजार विनिमय दरों के आधार पर गणना की गई अमेरिकी जीडीपी की बढ़त बनी रही है, पर वह उच्च-स्तरीय चिप्स और लिथोग्राफी मशीनों जैसे क्षेत्रों में चीन को निर्यात को प्रतिबंधित करती है। क्योंकि उसे महसूस है कि वह वास्तविक विनिर्माण उद्योग में कमजोर है। इसलिए, वास्तविक अर्थव्यवस्था को लगातार विकसित करते हुए वित्तीय सेवा उद्योग पर ध्यान देना आर्थिक विकास का एक स्वस्थ तरीका है। वर्तमान तरीके से आर्थिक विकास करता रहेगा तो 2030 के आसपास चीन का आर्थिक आकार अमेरिका से आगे निकल जाएगा और तब विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाएं चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत होंगी।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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