चीन के आर्थिक सुधार में औद्योगिक नीति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन आर्थिक सुधारों में “गुणात्मक बदलाव” साल 2014 के आसपास आया। मई 2015 में चीन सरकार ने “मेड इन चाइना 2025” की शुरुआत हुई। कह सकते हैं कि इसकी वजह से चीन के आर्थिक सुधारों में निर्णायक और व्यापक बदलाव आने शुरू हुए। चीन की औद्योगिक नीति में इसके साथ ही नया बदलाव दिखा, जिसका असर बीते एक दशक में दिखने लगा। इसके तहत चीन के अहम और अग्रणी क्षेत्रों में नवाचार, तकनीकी नेतृत्व, मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की तैयारी शुरू हुई और नए आर्थिक सुधारों को नई औद्योगिक नीति के तहत पूरे देश में लागू किया गया। कुछ क्षेत्रों, मसलन इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा में शानदार बढ़ोत्तरी देखी गई।
चीन की औद्योगिक नीति का अगला चरण “मेड इन चाइना 2025” पहल के तहत दीर्घकालिक लक्ष्यों और प्रतिबद्धताओं को जारी रखना होगा। साथ ही आर्थिक परिवर्तन और वैश्विक स्तर पर रणनीतिक अनुकूलन को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते तलाशेगा। औद्योगिक नीति की निरंतरता और अनुकूलन का यह संयोजन 23 अक्टूबर 2025 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं केंद्रीय समिति के चौथे पूर्ण सत्र में दिखा, जिसमें पंद्रहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए सिफारिशों को स्वीकार किया गया। एक तरह से यह उच्च-स्तरीय ब्लूप्रिंट 2026-2030 है, जिसमें आगामी पांच साल के लिए व्यापक लक्ष्यों, मौलिक सिद्धांतों, प्रमुख रणनीतियों और मिशनों की रूपरेखा शामिल है। इसकी ही बुनियाद पर मार्च 2026 में इस योजना को विस्तृत रूप से अंतिम रूप दिया जाना है।
15वीं पंचवर्षीय योजना के लिए जो सिफारिशें की गई हैं, वे इस अवधि में चीन के आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण के प्रस्थान बिंदु के रूप में दिखती हैं। इन सिफारिशों के तहत पहले से ही स्थापित औद्योगिक शक्तियों और लाभों को और मजबूत करना और उनका विस्तार करना है। इसके साथ ही सुधारों की राह में आने वाली प्रमुख बाधाओं को दूर करके सुधारों की गति को व्यवस्थित करना तो है ही, उच्च-गुणवत्ता वाले स्थायी विकास को भी बढ़ावा देना है।
इसलिए, उम्मीद के मुताबिक चीन की औद्योगिक नीति देश के रणनीतिक और उभरते हुए सेक्टर्स, शोध और विकास के साथ ही उपभोक्ता खपत की ओर शिफ्ट होती रहेगी। इसके साथ ही यह नीति देश के पारंपरिक निर्माण उद्योग को और ज्यादा आधुनिक बनाएगी। दुनिया भर में औद्योगिक नीतियों में बदलाव जिस तेज़ी से दिख रहा है, उसे देखते हुए, चीन की नीति भी अपने विकास लक्ष्यों को पाने और जियोपॉलिटिकल चुनौतियों का जवाब देने के लिए ज़रूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगी।
चीन की औद्योगिक नीति अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग, हरित तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमता जैसे रणनीतिक और उभरते हुए सेक्टर्स पर और ज़्यादा ध्यान केंद्रित करेगी। इस बदलाव को स्टील और एल्युमीनियम जैसे पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स से संसाधनों को हटाकर दूसरे सेक्टर्स में लगाने से सपोर्ट मिल सकता है।
चीन की औद्योगिक नीति को आर्थिक सुरक्षा के साथ जोड़ना जारी रखा जा रहा है। इसका उद्देश्य स्वदेशी नवाचार, तकनीकी आत्मनिर्भरता, सप्लाई चेन की मज़बूती और अर्थव्यवस्था में स्थिरता और निरंतरता पर ज़ोर देता है। साल 2015 से ही राष्ट्रपति शी चिनफिंग का घरेलू खपत को बढ़ावा देने पर बार-बार ज़ोर देना चीन की लंबे समय से चली आ रही रणनीति और घरेलू बाज़ार की क्षमता को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में अधिकतम करना और जियोपॉलिटिकल झटकों का मुकाबला करने के एक कारगर उपाय के रूप में दिखाता है।
चीन पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स का आधुनिकीकरण जारी रखने और उसे तेज करने की तैयारी में है। भूलना नहीं चाहिए कि यही चीनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। संरचनात्मक अपग्रेड, नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से गुणवत्तायुक्त उत्पादन चीन का ध्यान केंद्रित है। इसका नतीजा चीन के इस्पात और एल्युमीनियम उद्योग के विकास में दिखा है। यहां अब भी आधुनिकीकरण चल रहा है और इसमें नवाचार और सतत विकास को तेजी से प्राथमिकता दी जा रही है। खनन उद्योग में भी, जहां चीन तकनीकी नवाचार के माध्यम से उत्पादन और सतत विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
चीन की औद्योगिक नीति का व्यवस्थागत रीओरिएंटेशन भी कर रहा है। चीन के इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में यह बदलाव पहले ही हो चुका है। हालांकि यह बदलाव चीन के नवाचार संचालित विकास और खपत उन्नयन के दीर्घकालिक लक्ष्यों के अनुरूप है, लेकिन इसके लिए उत्पादन क्षमता और श्रम बाजारों में महत्वपूर्ण संरचनात्मक समायोजन की आवश्यकता है। नतीजतन, यह बदलाव धीरे-धीरे होने की संभावना है ताकि फर्मों और स्थानीय सरकारों को अनुकूलन के लिए समय मिल सके।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

