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शी चिनफिंग युग में चीन: शून्य से समृद्धि तक चीन के गरीबी उन्मूलन मॉडल की प्रशासनिक ताकत और वैश्विक प्रासंगिकता

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इंटरनेशनल डेस्क: 21वीं सदी के वैश्विक इतिहास में यदि किसी एक विकासात्मक उपलब्धि ने पूरी दुनिया के नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों का ध्यान सबसे अधिक आकर्षित किया है, तो वह है चीन का व्यापक गरीबी उन्मूलन अभियान। कुछ दशकों पहले तक एक विशाल ग्रामीण आबादी, अत्यधिक पिछड़ेपन और सीमित संसाधनों वाला विकासशील देश माना जाने वाला चीन आज दुनिया की शीर्ष आर्थिक और भू-राजनीतिक महाशक्तियों में शामिल है। इस परिवर्तन का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि चीन ने करोड़ों लोगों को गरीबी के दलदल से बाहर निकालते हुए उनके जीवन स्तर, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में अभूतपूर्व सुधार किया है।

गरीबी उन्मूलन को लेकर चीन की इन असाधारण उपलब्धियों का उल्लेख केवल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी या सरकारी दस्तावेजों में ही नहीं मिलता, बल्कि विश्व बैंक सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की स्वतंत्र रिपोर्टों और प्रकाशित अध्ययनों में भी प्रमुखता से दर्ज है। विश्व बैंक, विकास अनुसंधान केंद्र और चीन के राज्य परिषद द्वारा संयुक्त रूप से जारी रिपोर्ट Four Decades of Poverty Reduction in China: Sharing Experiences from China’s Growth (2022) के अनुसार, 1981 से 2020 के बीच चीन ने लगभग 800,000,000 लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकाला है। यह वैश्विक स्तर पर गरीबी में आई कुल कमी का लगभग 75% से अधिक हिस्सा है, जो वैश्विक इतिहास में किसी भी देश द्वारा इतने बड़े पैमाने पर और इतनी तीव्र गति से किया गया सबसे बड़ा मानवीय अभियान माना जाता है।

निष्कर्ष के रूप में मैं यह स्पष्ट रूप से कह सकता हूँ कि यह ऐतिहासिक सफलता केवल संयोग या सामान्य आर्थिक वृद्धि का परिणाम नहीं थी, बल्कि एक ऐसी सुदृढ़ शासन प्रणाली का परिणाम थी जिसने दीर्घकालिक योजना, संसाधनों के केंद्रीकृत उपयोग, स्थानीय स्तर तक प्रशासनिक पहुंच और जनकल्याण को देश के विकास का केंद्र बनाया। चीन ने इस पश्चिमी आख्यान को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है कि तीव्र आर्थिक विकास के लिए केवल पश्चिमी तौर-तरीके और उनका राजनीतिक ढांचा ही एकमात्र मार्ग हैं। इसके विपरीत, चीन ने दुनिया के सामने विकास का एक अत्यंत अनूठा और संप्रभु मॉडल प्रस्तुत किया है, जिसे वैश्विक बौद्धिक विमर्श में ‘चीनी शैली का आधुनिकीकरण’ कहा जाता है।

शी चिनफिंग युग में चीन के इस आंतरिक विकास और राजनीतिक दृष्टिकोण को समझने के लिए कुछ केंद्रीय सिद्धांतों को रेखांकित करना आवश्यक है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग का सबसे महत्वपूर्ण और मार्गदर्शक राजनीतिक सिद्धांत (जन-केंद्रित विकास दर्शन) है। यह दर्शन स्पष्ट रूप से यह स्थापित करता है कि देश के विकास का पैमाना केवल जीडीपी के अमूर्त आंकड़े नहीं हो सकते, बल्कि जनता की वास्तविक खुशहाली और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति का जीवन स्तर होना चाहिए। इसी सिद्धांत के तहत पूरी सरकारी मशीनरी और कम्युनिस्ट पार्टी के संसाधनों को लोक-कल्याण और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण में झोंक दिया गया, जिसने गरीबी के खिलाफ लड़ाई को एक नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया।

चीन के राज्य परिषद सूचना कार्यालय द्वारा अप्रैल 2021 में जारी आधिकारिक श्वेत पत्र Poverty Alleviation: China’s Experience and Contribution के अनुसार, इस कड़े और लक्षित अभियान के परिणामस्वरूप वर्ष 2020 के अंत तक 98,990,000 ग्रामीण निवासियों को पूरी तरह से गरीबी के जाल से बाहर निकाला गया। इसके साथ ही देश की 832 गरीब काउंटियों और लगभग 128,000 गरीब गांवों को हमेशा के लिए गरीबी की आधिकारिक सूची से बाहर कर दिया गया। फरवरी 2021 में राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग में आयोजित एक भव्य समारोह में पूरी दुनिया के सामने यह गौरवशाली घोषणा की कि चीन ने ‘पूर्ण गरीबी’ के खिलाफ लड़ाई में ऐतिहासिक और पूर्ण विजय हासिल कर ली है।

पूर्ण गरीबी के सफल उन्मूलन के बाद, चीन का ध्यान अब केवल सामान्य आर्थिक वृद्धि पर नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले विकास पर केंद्रित हो चुका है, जिसकी घोषणा चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं राष्ट्रीय कांग्रेस (2022) में प्रमुखता से की गई थी। एक समय में केवल “दुनिया की फैक्टरी” या सस्ते सामानों का उत्पादक कहे जाने वाला चीन आज रणनीतिक दूरदर्शिता और अनुसंधान पर बड़े पैमाने पर निवेश करके दुनिया का सबसे बड़ा तकनीकी और नवाचार केंद्र बन चुका है। चीन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5G और भविष्य की 6G तकनीकों, हरित ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में पूरी दुनिया में अपनी तकनीकी बढ़त बना ली है।

मेरे आंकलन के मुताबिक आज जब दुनिया के अनेक हिस्से अभी भी गरीबी, आर्थिक असमानता और विकास संबंधी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं, तब चीनी शैली के आधुनिकीकरण का यह सफल अनुभव पूरी मानवता को यह संदेश देता है कि यदि स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति, दीर्घकालिक दृष्टि और संगठित प्रशासनिक प्रयास मौजूद हों, तो सदियों पुरानी गरीबी जैसी समस्या को भी हमेशा के लिए पराजित किया जा सकता है। यही कारण है कि चीन की यह ऐतिहासिक गाथा आने वाले कई दशकों तक वैश्विक विकास के सिद्धांतों में एक मार्गदर्शक और सुनहरे संदर्भ के रूप में पूरी दुनिया का पथ प्रदर्शित करती रहेगी।

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—नीरज बाली)

(वरिष्ठ मीडिया पेशेवर एवं राजनीतिक-आर्थिक मामलों के विश्लेषक)

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