Last Updated: September 23, 2026

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पेइचिंग में “वैश्विक प्रशासन पहल” विषय पर चीन-भारत संवाद आयोजित

September 23, 2025

पेइचिंग में “वैश्विक प्रशासन पहल” विषय पर चीन-भारत संवाद आयोजित

चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के एशिया-अफ्रीका केंद्र व कोलकाता स्थित चीनी महावाणिज्य दूतावास द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित “वैश्विक प्रशासन पहल: अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की नई संभावनाएं ” विषय पर चीन-भारत संवाद ऑनलाइन और ऑफलाइन प्रारूपों में 23 सितंबर को पेइचिंग में हुआ। यह संवाद शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के थ्येनचिन शिखर सम्मेलन के सफल समापन के बाद आयोजित किया गया। संवाद में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों ने हालिया एससीओ सम्मेलन के दौरान चीन-भारत नेताओं की बैठक की समीक्षा की और माना कि इस उच्च-स्तरीय बातचीत ने द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक संकेत दिए हैं। चर्चा राष्ट्रपति शी चिनफिंग द्वारा प्रस्तावित “वैश्विक प्रशासन पहल” पर केंद्रित रही।

 

कोलकाता में चीन के कार्यवाहक महावाणिज्यदूत छिन योंग ने कहा कि आज विश्व परिवर्तन और अशांति के दौर से गुजर रहा है, संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, और वैश्विक प्रशासन में असतुंलन बढ़ रहा है। इस महीने की शुरुआत में आयोजित एससीओ-प्लस शिखर सम्मेलन में, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वैश्विक प्रशासन पहल की शुरुआत का प्रस्ताव रखा। यह पहल सभी देशों की साझा आकांक्षाओं के अनुरूप है और दुनिया की तात्कालिक ज़रूरतों को पूरा करती है, और इस सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण बन गई है। चीन और भारत दोनों शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों के सह-समर्थक हैं और शांति की समान अवधारणाओं को साझा करते हैं: चीन मानव जाति साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण की वकालत करता है, जबकि भारत “वसुधैव कुटंबकम की अवधारणा की बात करता है। दोनों देश निष्पक्ष और उचित वैश्विक प्रशासन व्यवस्था की स्थापना के महत्व को गहराई से समझते हैं और इसके निर्माण को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

 

भारतीय हिंदी खबर चैनल के निदेशक और प्रधान संपादक अतुल अग्रवाल ने कहा कि चीन और भारत के नेताओं के बीच बैठक से दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान के लिए सकारात्मक संकेत मिले हैं। भविष्य में, हमें चीन और भारत के बीच आदान-प्रदान को मजबूत करना चाहिए और दोनों देशों के लोगों को वास्तविक भारत और चीन को देखने देना चाहिए। खुली नीतियों की एक श्रृंखला के माध्यम से, भारतीय लोग चीन के वास्तविक विकास को महसूस कर सकते हैं और दुनिया अधिक वास्तविक चीन को जान सकती है।

 

सीएमजी के एशिया-अफ्रीका केंद्र के हिंदी विभाग की मेज़बान चांग शियाओ ने कहा, “एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान, हमने चीन-भारत संबंधों में सकारात्मक बदलाव अपनी आंखों से देखे। राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री मोदी का फिर से हाथ मिलाना चीन-भारत संबंधों में एक और ठोस कदम है। ऐसे अच्छे माहौल में, मेरा मानना है कि चीन और भारत असीमित संभावनाओं का निर्माण करने के लिए मिलकर काम करेंगे।”

 

वहीं टीवी9 के रिपोर्टर मनीष झा ने कहा कि एससीओ मेजबान चीन और भारत दोनों के लिए एक अच्छा अवसर था। दोनों देशों को एक दूसरे के साथ मिलकर काम करना चाहिए, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग करना चाहिए, सच्चे बहुपक्षवाद का अभ्यास करना चाहिए, साथ ही विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और आवाज को बढ़ाना चाहिए।

 

सीएमजी के एशिया-अफ्रीका केंद्र के हिंदी विभाग के वरिष्ठ संवाददाता अनिल पांडेय ने कहा कि विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन आज तमाम अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के निपटारे में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेता है। इसके साथ ही ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों में अपनी नेतृत्वकारी भूमिका निभा रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने थ्येनचिन में संपन्न एससीओ बैठक के दौरान वैश्विक प्रशासन पहल (जीजीआई) का महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा। इसके भविष्य पर दूरगामी प्रभाव होंगे और यह पश्चिमी प्रभुत्व वाली वैश्विक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत है। इसके साथ ही संवाद में शामिल प्रतिभागियों ने कहा कि चीन-भारत संबंधों का स्वस्थ और स्थिर विकास न केवल दोनों देशों की जनता के मौलिक हित में है, बल्कि एशिया और विश्व में शांति और विकास बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।

 

अतिथियों ने इस बात पर जोर दिया कि “वैश्विक प्रशासन पहल” को लागू करने के लिए, चीन और भारत को प्रमुख देशों के रूप में अपनी जिम्मेदारी का प्रदर्शन करना होगा। एशिया के समान हितों से आगे बढ़ना होगा, वार्ता के माध्यम से मतभेदों को पाटना होगा, सहयोग के माध्यम से अवसर पैदा करना होगा और वैश्विक प्रशासन व्यवस्था में सुधार लाने व मानव जाति के लिए साझे भविष्य वाले समुदाय के निर्माण को बढ़ावा देने में संयुक्त रूप से सकारात्मक योगदान देना होगा।

 

इस संवाद ने चीन और भारत के थिंक टैंकों और मीडिया के बीच आपसी समझ बढ़ाने के लिए एक उपयोगी मंच तैयार किया है। सभी वक्ता भविष्य में भी इस तरह के स्पष्ट और गहन आदान-प्रदान को जारी रखने और चीन-भारत संबंधों के सुधार और विकास को बढ़ावा देने में ज्ञान का योगदान देने के लिए तत्पर हैं।

(साभार,चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)

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