
संयुक्त राष्ट्र में चीनी स्थायी प्रतिनिधि फ़ू थ्सोंग ने 21 नवंबर को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को एक पत्र भेजा, जिसमें जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची की चीन से संबंधित गलत टिप्पणियों और कार्यों पर चीनी सरकार का रुख स्पष्ट किया गया। अपने पत्र में फ़ू थ्सोंग ने कहा कि जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसदीय बहस के दौरान थाईवान के बारे में स्पष्ट रूप से भड़काऊ टिप्पणियां कीं। वर्ष 1945 में जापान की हार के बाद यह पहली बार है जब किसी जापानी नेता ने औपचारिक रूप से इस विचार की वकालत की है कि “अगर थाईवान को कुछ हुआ, तो जापान को भी कुछ होगा” और इसे सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के प्रयोग से जोड़ा है।
यह पहली बार है जब किसी जापानी नेता ने थाईवान मुद्दे पर सशस्त्र हस्तक्षेप की महत्वाकांक्षा व्यक्त की है, पहली बार किसी जापानी नेता ने चीन के खिलाफ सैन्य धमकी दी है, और चीन के मूल हितों को खुली चुनौती दी है। संबंधित टिप्पणियाँ बेहद ग़लत, ख़तरनाक और बेहद नकारात्मक प्रभाव डालने वाली थीं। चीन की ओर से बार-बार गंभीर और कड़े विरोध के बावजूद, जापान को कोई पछतावा नहीं है और वह अपने ग़लत बयानों को वापस लेने से इनकार कर रहा है। चीन इस पर अपनी कड़ी नाराज़गी और कड़ा विरोध व्यक्त करता है।
अपने पत्र में फ़ू थ्सोंग ने यह भी कहा कि साने ताकाइची की टिप्पणियों ने अंतर्राष्ट्रीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी मानदंडों का गंभीर उल्लंघन किया है, युद्ध के बाद के अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को गंभीर रूप से नष्ट किया है, और यह 1.4 अरब से अधिक चीनी लोगों और जापानी आक्रमण से पीड़ित एशियाई देशों के लोगों के खिलाफ एक स्पष्ट उकसावे की कार्रवाई है।
पत्र में फ़ू थ्सोंग ने आगे कहा कि थाईवान चीन की पवित्र भूमि है, और थाईवान मुद्दे को कैसे सुलझाया जाए, यह चीनी लोगों का मामला है, जो किसी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करते। यदि जापान थाईवान जलडमरूमध्य की स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप करने का साहस करता है, तो यह आक्रमणकारी कृत्य होगा। चीन ‘संयुक्त राष्ट्र चार्टर’ और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार का दृढ़तापूर्वक प्रयोग करेगा और राष्ट्रीय संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की दृढ़ता से रक्षा करेगा।
द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित राष्ट्र के रूप में, जापान को अपनी ऐतिहासिक दोषसिद्धि पर गहराई से आत्ममंथन करना चाहिए, थाईवान मुद्दे के संबंध में अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धताओं का पालन करना चाहिए, अपने उकसावे और उल्लंघनों को तुरंत रोकना चाहिए, तथा अपने गलत बयानों को वापस लेना चाहिए। बता दें कि यह पत्र संयुक्त राष्ट्र महासभा के आधिकारिक दस्तावेज के रूप में सभी सदस्य देशों को वितरित किया जाएगा।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)