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चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम: भारत समेत पूरी दुनिया के लिए वरदान

China space program A boon for the entire world including India

China space program A boon for the entire world including India

मानव अंतरिक्ष उड़ान आज भी दुनिया की सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण तकनीकों में से एक है। इसके लिए सटीक इंजीनियरिंग, अत्याधुनिक विज्ञान और मज़बूत राष्ट्रीय इच्छाशक्ति तीनों की दरकार होती है। हर मायने में यह एक दर्पण की तरह है, जो किसी राष्ट्र की वैज्ञानिक दक्षता और आर्थिक शक्ति को परखता है। ब्रह्मांड को जानने की इंसान की चाह कभी खत्म नहीं होती। धीरे-धीरे हम अंतरिक्ष की सीमाओं का विस्तार कर रहे हैं। अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में नेतृत्व प्राप्त करने की वैश्विक प्रतिस्पर्धा के परिप्रेक्ष्य में, चीन का मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम सतत रूप से सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। इस क्रम में नवीनतम उपलब्धि मानवयुक्त अंतरिक्ष यान शनचो-23 का सफल प्रक्षेपण है।

24 मई को मानवयुक्त अंतरिक्ष यान शनचो-23 के सफल प्रक्षेपण के उपरांत, तीन चीनी अंतरिक्ष यात्री मिशन कमांडर एवं फ्लाइट इंजीनियर चू यांगचू (Zhu Yangzhu), अंतरिक्ष यान पायलट चांग चीयुआन (Zhang Zhiyuan) तथा पेलोड विशेषज्ञ ली च्यायिंग (Li Jiaying) , जिन्हें कैंटोनीज़ भाषा में लाई का-यिंग (Lai Ka-ying) के नाम से भी जाना जाता है, थ्येनकोंग (Tiangong) अंतरिक्ष स्टेशन में सफलतापूर्वक प्रविष्ट हुए। गौरतलब है कि चीन का थ्येनकोंग अब पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा है। 25 मई को थ्येनकोंग अंतरिक्ष स्टेशन में उनका आगमन न तो केवल नियतकालिक चालक दल परिवर्तन है, और न ही यह कोई एकाकी उपलब्धि है। यह उन सफलताओं की श्रृंखला को सुदृढ़ करता है जो अंतरिक्ष के क्षेत्र में चीन के सतत उत्थान की परिचायक हैं।

शनचो-23 मिशन ने एक बार पुनः यह प्रमाणित किया है कि चीन का मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम न केवल तकनीकी दृष्टि से परिपक्वता प्राप्त कर चुका है, अपितु अब वैश्विक सहयोग एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता के नवीन युग में भी प्रवेश कर चुका है। थ्येनकोंग पर शनचो-21 और शनचो-23 के चालक दलों का मिलन, जिसे आठवें “अंतरिक्ष मिलन” (space get-together) के तस्वीर में कैद किया गया, केवल औपचारिक प्रदर्शन नहीं है। न ही हांगकांग की पहली पेलोड विशेषज्ञ ली च्यायिंग की उपस्थिति महज़ प्रतीकात्मक है। पहली बार, मुख्यभूमि चीन के बाहर से आने वाली एक अंतरिक्ष यात्री चीन के हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र  की ली च्यायिंग किसी राष्ट्रीय मानवयुक्त मिशन का हिस्सा बनी हैं। वह ल्यू यांग (Liu Yang), वांग याफिंग (Wang Yaping) और वांग हाओत्से (Wang Haoze) के उपरांत अंतरिक्ष में पहुंचने वाली चीन की चौथी महिला अंतरिक्ष यात्री भी हैं। उनकी उपलब्धि हांगकांग के सत्तर लाख से अधिक निवासियों के लिए गर्व का विषय है। यह एक बार पुनः “एक देश, दो व्यवस्था” (“One Country, Two Systems”) सिद्धांत की प्रबल जीवन-शक्ति एवं उल्लेखनीय श्रेष्ठता को प्रदर्शित करता है।

ये सभी संकेतक चीन के अंतरिक्ष अभियानों में समाहित खुलेपन और विविधता के प्रतीक हैं। अंतरिक्ष विजय चीन का दीर्घकालिक स्वप्न रहा है। चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक शीर्ष-प्राथमिकता वाला राष्ट्रीय लक्ष्य है, जो प्रतिष्ठा एवं प्रौद्योगिकी-शक्ति से जुड़ा है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने “अंतरिक्ष स्वप्न” को चीन को सशक्त बनाने की कुंजी बताया है। 24 जून 2013 को शनचो-10 के अंतरिक्ष यात्रियों से उन्होंने कहा था, “अंतरिक्ष स्वप्न, चीन को सशक्त बनाने के स्वप्न का ही एक अंग है। अंतरिक्ष कार्यक्रमों के विकास के साथ, चीनी जनता अंतरिक्ष के और गहन अन्वेषण की दिशा में बड़े कदम उठाएगी और एक सशक्त अंतरिक्ष उद्योग राष्ट्र का निर्माण करेगी।”

पिछले 14 वर्षों में, राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन के अंतरिक्ष कार्यक्रम के विकास को विशेष प्राथमिकता दी है। उन्होंने कई बार उपग्रह प्रक्षेपण केंद्रों का दौरा किया तथा वैज्ञानिकों, अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष कर्मियों को चीन को एक अंतरिक्ष शक्ति बनाने के लिए अविरल प्रयास करने हेतु प्रोत्साहित किया है। जब 15 अक्तूबर 2003 को यांग लिवेई (Yang Liwei) चीन के पहले अंतरिक्ष यात्री बने, तो उन्होंने चीनी राष्ट्र के अंतरिक्ष उड़ान के सहस्राब्दियों पुराने स्वप्न को साकार किया। 1992 में अपनी शुरुआत के बाद से चीन के मानवयुक्त अंतरिक्ष कार्यक्रम ने उल्लेखनीय प्रगति की है, और अब तक 40 मिशनों के माध्यम से 30 अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जा चुका है। चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम एक प्रमुख शक्ति के दर्जे का प्रतीक है और रक्षा आधुनिकीकरण का एक प्रेरक बल भी है।

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, चीन अंतरिक्ष क्षेत्र में अपना योगदान दे रहा है। चीन ने यह सुनिश्चित किया है कि अंतरिक्ष शांतिपूर्ण और स्वच्छ बना रहे, और गारंटी दी है कि उसकी अंतरिक्ष गतिविधियां मानवता के हित में हों। थ्येनकोंग इतिहास का पहला ऐसा अंतरिक्ष स्टेशन है जो संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों के लिए खुला है। स्विट्ज़रलैंड, पोलैंड, जर्मनी और इटली सहित कम से कम 17 देशों के वैज्ञानिक प्रयोग वहां पहले से ही संचालित हो रहे हैं। चीन और रूस संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय चंद्र अनुसंधान स्टेशन विकसित कर रहे हैं।

SMILE उपग्रह, जो चीन और यूरोप का एक संयुक्त मिशन है, 19 मई 2026 को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित किया गया। अक्तूबर 2022 में, जब तूफान जूलिया ने वेनेज़ुएला, कोलंबिया, कोस्टा रिका, अल सल्वाडोर, निकारागुआ और पनामा को प्रभावित किया, तब चीनी उपग्रहों ने इन देशों के आपदा राहत कार्यों में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। अंतरिक्ष समस्त मानवता का है। अंतरिक्ष अन्वेषण मानवजाति का साझा स्वप्न है। इसमें किसी को बाहर नहीं रखा जाना चाहिए, न ही रखा जा सकता है। भारत चीन से सीख सकता है कि उसने अपनी अंतरिक्ष गतिविधियों को राष्ट्रीय शक्ति के साथ कैसे जोड़ा है, खासकर सतत मानवयुक्त मिशनों, दीर्घकालिक अंतरिक्ष स्टेशनों के संचालन, और राज्य-उद्योग की बड़ी साझेदारियों के ज़रिये। 

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)  (लेखक- रविशंकर बसु)

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