चीन में आजकल दो सत्र यानी एनपीसी और सीपीपीसीसी आयोजित हो रहे हैं। साल के सबसे बड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम के जरिए चीन देश और दुनिया को प्रगति और विकास का रास्ता दिखा रहा है। इन सत्रों में चीन के साथ-साथ कई देशों के विशेषज्ञ व पत्रकार भी हिस्सा ले रहे हैं। जो चीन द्वारा लागू की जा रही योजनाओं और विभिन्न नीतियों पर ध्यान दे रहे हैं। जाहिर है कि वर्तमान में विश्व में उथल-पुथल और अशांति का माहौल है। कई देश युद्ध की विभीषिका झेल रहे हैं। ऐसे में सभी की नजर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन और उसके नेताओं द्वारा लिए जा रहे फैसलों पर लगी है। इसी बीच चीन और अंतर्राष्ट्रीय मामलों पर पकड़ रखने वाले वरिष्ठ भारतीय पत्रकार सीताराम मेवाती भी चीन सरकार के निमंत्रण पर दो सत्रों में हिस्सा लेने के लिए पेइचिंग पहुंचे हैं। इस मौके पर, चाइना मीडिया ग्रुप (सीएमजी) के अधीन सीजीटीएन हिंदी संवाददाता अनिल पांडेय ने उनके साथ खास बातचीत की।
कई बार चीन आ चुके सीताराम कहते हैं कि उन्हें हर बार चीन पहुंचने पर कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है, विशेष रूप से चीन में विकास की रफ्तार और तकनीक के इस्तेमाल से वे बहुत प्रभावित हैं। वे कहते हैं कि ये दो सत्र बहुत अहमियत रखते हैं कि, क्योंकि इनमें अगले एक वर्ष के लिए बनने वाली विभिन्न नीतियों का पता चलता है। खासतौर पर किस नीति और योजना पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकता है, इसकी भी जानकारी हमें दो सत्रों से मिलती है। इन सत्रों को नजदीक से कवर करने वाले सीताराम की नजर में चीनी राष्ट्रपति और सीपीसी महासचिव शी चिनफिंग के नेतृत्व में चीन बेहतरीन काम कर रहा है और विश्व को दिशा दिखा रहा है। जाहिर है कि चीन प्रगति और विकास के पथ पर अग्रसर है।
चीन की बहुप्रतीक्षित 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) को लेकर उन्होंने कहा कि चीन और भारत दो ऐसे देश हैं जो कि कई दशकों से पंचवर्षीय योजना पर अमल करते आए हैं। भारत में वर्ष 1951 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में पहली पंचवर्षीय योजना की शुरूआत हुई। जबकि चीन में साल 1953 में पहली पंचवर्षीय योजना शुरू हुई। इस पंचवर्षीय योजना के तहत विभिन्न लक्ष्यों और योजनाओं को पूरा करना होता है, इसमें निर्धारित किया जाता है कि अगले पाँच वर्षों में देश में किन-किन प्रमुख योजनाओं पर अमल होगा। स्पष्ट है कि चीन पंचवर्षीय योजना के तहत देश को तकनीक और नवाचार के जरिए आगे ले जाने की दिशा में गंभीरता से काम कर रहा है। ताकि उच्च गुणवत्ता वाले विकास की ओर चीन अग्रसर हो।
चीन में जारी दो सत्रों में नवाचार, खुलेपन, विकास, आधारभूत ढांचे व शिक्षा आदि पर ध्यान दिया जा रहा है। सबसे अहम बात एआई पर फोकस की है। जो विश्व के लिए बड़े अवसर ला सकता है। अगर हम एआई का उल्लेख करें तो यह अपने आप में काफी महत्व रखता है। हाल में भारत ने एआई समिट का आयोजन किया था, जिसका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन किया था। और चीन में भी एआई के क्षेत्र में जिस तेजी से प्रगति हो रही है वह काबिलेतारीफ है, क्योंकि चीन अग्रणी भूमिका निभा रहा है। हालांकि लोगों को आशंका है कि एआई के प्रसार से दुनिया में रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा, लोगों के पास नौकरियां नहीं रहेंगी। लेकिन ये आशंका निराधार लगती है, क्योंकि जब कंप्यूटर की शुरूआत हुई थी, तब भी इसी तरह की बातें की गयीं थीं।
तीसरी बार दो सत्रों को कवर करने पेइचिंग पहुंचे सीताराम कहते हैं कि इनमें हिस्सा लेना और कवर करना दुनिया भर के पत्रकारों के लिए बड़ा गर्व का विषय होता है। साथ ही इनके जरिए हमें चीन का विज़न भी स्पष्ट तौर पर पता चलता है। और चीन में हकीकत में जो रहा है उसे दुनिया के सामने रखने का काम इनके माध्यम से होता है। इसके साथ ही चीन और भारत दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं और दो प्राचीन सभ्यता वाले देश भी। जिनका मिलकर आगे बढ़ना समय की मांग है। चीन व भारत सभ्यता और संस्कृति के लिहाज से किस तरह से एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसका उदाहरण उन्हें ग्रेट वॉल ऑफ चाइना में जाकर हुआ, वहां के मुख्य गेट पर बने एक आर्क में पाँच भाषाएं अंकित हैं, जिनमें चीनी मंदारिन व मंगोलियाई भाषा के साथ-साथ संस्कृत भी शामिल है। वे कहते हैं कि दुनिया चीन और भारत को दिशा नहीं दिखा सकती, बल्कि ये दोनों पुरातन संस्कृति वाले देश विश्व को राह दिखाने में सक्षम हैं।
(अनिल पांडेय, सीजीटीएन हिंदी, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

