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घरेलू बाजार के जरिए बाहरी आर्थिक चुनौतियों का सामना करेगा चीन

दस और ग्यारह दिसंबर को हुए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की केंद्रीय आर्थिक वर्क कांफ्रेंस में अगले साल यानी 2026 के लिए जो आर्थिक खांचा और लक्ष्य तय किया गया है, वह एक तरह से वैश्विक चुनौतियों से निबटने क लिए ठोस उपायों की जरूरत पर ही जोर देता है। वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर ना सिर्फ चीन, बल्कि भारत समेत विकासशील दुनिया के ज्यादातर देशों को बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन बाहरी चुनौतियों से मुकाबले के लिए वैश्विक स्तर पर विचार बन रहा है कि हर आर्थिक व्यवस्था को घरेलू मोर्चे पर चुस्त और दुरूस्त होना पड़ेगा। चीन ने इस तथ्य को ठीक से समझा है। आर्थिक वर्क कांफ्रेस के बाद जो आधिकारिक बयान जारी हुआ है, उससे साफ है कि चीन अगले साल यानी 2026 में मजबूत घरेलू बाज़ार बनाने की तैयारी में है। दो दिनों तक चली इस कांफ्रेंस में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति ने अगले साल की आर्थिक नीति के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय कीं। 

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इस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महा सचिव शी चिनफिंग ने भी इसी पर जोर दिया। यहां यह बताना जरूरी नहीं है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के महा सचिव शी चिनफिंग इसके साथ ही चीन के राष्ट्रपति और चीनी फौजी आयोग के अध्यक्ष भी है। अपने संबोधन में उन्होंने बीत रहे साल यानी 2025 में देश ने आर्थिक मोर्चे पर जो प्रगति की है, उसकी समीक्षा तो की ही, मौजूदा आर्थिक स्थिति का विश्लेषण भी किया, और अगले साल के लिए आर्थिक मोर्चे पर किए जाने कामों और पूरा किए जाने वाले लक्ष्यों के लिए देश की प्राथमिकताएं भी गिनाईं। उनके संबोधन का असर सेंट्रल इकोनॉमिक वर्क कॉन्फ्रेंस की बैठक में भी दिखा, जिसने साल 2026 के लिए स्पष्ट आर्थिक एजेंडा तय किया। इसका मकसद चीन को आर्थिक चुनौतियों से बाहर निकालना और साथ ही उच्च-गुणवत्ता वाले विकास के अवसरों का फायदा उठाते हुए अपने नागरिकों का जीवन स्तर और ऊंचा उठाना है।

घरेलू मांग को लगातार बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, इस कॉन्फ्रेंस ने देश की अर्थव्यवस्था में “प्रभावी गुणात्मक सुधार” और “उचित मात्रात्मक विकास” को बढ़ावा देने के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाज़ार के निर्माण को बढ़ावा देने के साथ ही, उसे और गहराई से आगे बढ़ाने और स्थानीय हालात के मुताबिक उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पादक ताकतों के विकास के लिए प्रयास करने पर ज़ोर दिया। इस बैठक के बाद जारी एक बयान में कहा गया है कि, बदले हालात में आर्थिक मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन के लिए, “चीन को बाहरी चुनौतियों से निपटने की अपनी क्षमताओं को और मज़बूत बनाना होगा”। इसके साथ ही नीतिगत समर्थन बढ़ाने और सुधार के साथ ही नवाचार को बढ़ावा देनी अहमियत को समझाते हुए उसे बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया गया। इस बयान में यह मान लिया गया है कि देश के आर्थिक विकास के मोर्चे लंबे समय से जारी कई समस्याएं और चुनौतियां अब भी हैं। इसे स्वीकार करते हुए ही  कॉन्फ्रेंस ने देश के आर्थिक विकास पर सीमा पार में हो रहे बदलावों और उनके बढ़ते प्रभावों को रेखांकित तो किया ही है, यह भी माना है कि मज़बूत वैश्विक आपूर्ति भी है। 

कांफ्रेंस के बयान में कहा गया है कि ज़्यादातर समस्याएं विकास और बदलाव से जुड़ी हैं, जिन्हें कोशिशों से सुलझाया जा सकता है। बयान में यह भी कहा गया है कि चीन में लंबे समय से आर्थिक विकास के लिए जरूरी हालात और बुनियादी रुझान पहले की ही तरह हैं। अगले साल के आर्थिक लक्ष्य हासिल करने के लिए माहौल बनाने पर भी इस बयान में जोर दिया गया है। इसके साथ ही इस  सम्मेलन में “स्थिरता बनाए रखते हुए प्रगति हासिल करने” के व्यापक सिद्धांत का पालन करने और घरेलू आर्थिक काम और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और व्यापार क्षेत्र में प्रयासों के  साथ ही विकास और सुरक्षा के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया गया है। बयान में कहा गया है कि मौजूदा नीतियों से नई नीतियों को से जोड़ना और मैक्रोइकोनॉमिक गवर्नेंस की दक्षता को प्रभावी ढंग से बढ़ाना जरूरी है।

जिसके लिए काउंटर-साइक्लिकल और क्रॉस-साइक्लिकल समायोजन को मज़बूत करना बेहद अहम है। वैसे बयान में यह भी कहा गया है कि चीन अगले साल ज़्यादा सक्रिय राजकोषीय नीति और मध्यम रूप से उदार मौद्रिक नीति जारी रखेगा, और मौद्रिक नीति बनाते समय, स्थिर आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और कीमतों में उचित वृद्धि की अनुमति देना दोनों महत्वपूर्ण पहलू हैं जिन पर विचार किया जाना चाहिए। जाहिर है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आर्थिक कार्य बल ने एक तरह से अपनी आर्थिक सोच को स्पष्ट करते हुए अगले साल नीति और निर्माण दोनों ही स्तरों पर बड़ी भूमिका निभाने की जरूरत माना है। जिस तरह इस बयान में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखने, रिजर्व रिक्वायरमेंट अनुपात के साथ ही ब्याज दरों में कटौती जैसे नीतिगत साधनों का लचीले और कुशल तरीके से उपयोग पर जोर है, उससे साफ है कि अगले साल आर्थिक मोर्चे पर ऐसा होगा।

इसी तरह वित्तीय संस्थानों से घरेलू मांग, तकनीकी नवाचार और छोटे एवं मध्यम उद्यमों के विस्तार को मदद देने पर जोर है, इसका मतलब साफ है कि अगले साल चीन में वित्तीय संस्थान घरेलू खपत को बढ़ावा देने वाले उद्यमों को बहुत सहयोग करेंगे। कुल मिलाकर विशालकाय उद्योगों पर तो जोर रहेगा ही, घरेलू और स्ट्रीट कारोबार को भी बढ़ावा देने पर भी चीन में जोर दिया जाएगा। ताकि घरेलू मांग बढे, मांग के अनुपात में उत्पादन बढ़े। उत्पादन बढ़ेगा तो रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।

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(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)  (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

 

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