मानव इतिहास में गरीबी उन्मूलन हमेशा से सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। ऐसे समय में जब दुनिया के अनेक देश आज भी करोड़ों लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, चीन ने अपने विशाल गरीबी उन्मूलन अभियान के माध्यम से पूर्ण गरीबी को समाप्त करने का दावा करते हुए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह उपलब्धि केवल आर्थिक विकास का परिणाम नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक योजना, प्रभावी प्रशासन, राष्ट्रीय समन्वय और जन-केंद्रित विकास दर्शन का भी प्रतिबिंब है।
चीन की गरीबी उन्मूलन मुहिम 21वीं शताब्दी के सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक प्रयोगों में से एक रही है। एक रिपोर्टर के रूप में जब मैंने इसके स्रोत, तरीकों और निहित अर्थों को देखा और समझा, तो यह स्पष्ट हुआ कि इस सफलतम अभियान के पीछे केवल आर्थिक वृद्धि नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित संस्था-आधारित रणनीति, समन्वित कार्यान्वयन और जनता के लिए समर्पित विकास-दृष्टि है। आइए इस उपलब्धि के पहलुओं को संवेदनशील रूप में देखें और उसके वैश्विक अर्थों को समझें।
विशेषज्ञों का मानना है कि विशाल जनसंख्या और भौगोलिक विविधता वाले देश में इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का सफल संचालन मजबूत प्रशासनिक ढांचे और व्यापक नीति समन्वय के बिना संभव नहीं होता। विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को एक साझा लक्ष्य के लिए संगठित करना इस मॉडल की प्रमुख विशेषता रही।
गरीबी उन्मूलन का अभूतपूर्व अभियान
चीन ने कई दशकों तक चलाए गए लक्षित गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में व्यापक निवेश किया। सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया गया। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार की गईं और प्रत्येक गरीब परिवार की आवश्यकताओं के आधार पर सहायता प्रदान करने की नीति अपनाई गई।
इस अभियान के परिणामस्वरूप करोड़ों लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ। दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को आधुनिक सुविधाओं, रोजगार के अवसरों और बेहतर सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ा गया। इस प्रक्रिया ने न केवल गरीबी कम की बल्कि ग्रामीण पुनरोद्धार और सामाजिक विकास को भी गति दी।
संस्थागत ताकत: सफलता की कुंजी
इतने बड़े अभियान को अंजाम देने के पीछे चीन की संस्थागत क्षमता है। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय, लंबी अवधि की योजनाएँ और परिणाम-आधारित कार्यप्रणाली ने इस अभियान को सफल बनाया। विशेषज्ञों के अनुसार, विविध भौगोलिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों में बिना मजबूत प्रशासनिक ढाँचे के यह संभव नहीं था। विशाल जनसंख्या और भौगोलिक विविधता वाले देश में इतने बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का सफल संचालन मजबूत प्रशासनिक ढांचे और व्यापक नीति समन्वय के बिना संभव नहीं होता। विभिन्न सरकारी विभागों, सार्वजनिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों को एक साझा लक्ष्य के लिए संगठित करना इस मॉडल की प्रमुख विशेषता रही।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की अहम भूमिका
चीन के इस मॉडल में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CPC) की केंद्रीय भूमिका है। पार्टी ने गरीबी हटाने को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी और प्रशासन के हर स्तर को इसके लिए सक्रिय किया। उनका मानना है कि विकास का असली उद्देश्य लोगों की जिंदगी बेहतर बनाना है – इसलिए आर्थिक विकास के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण पर भी जोर दिया गया। – पार्टी ने नीतिगत प्राथमिकताएँ तय कीं, मिशन का राजनीतिक समर्थन सुनिश्चित किया और सरकारी मशीनरी को निर्णायक रुचि के साथ संलग्न रखा।“लोगों-केंद्रित” विकासदर्शन यहाँ सिर्फ शब्द नहीं रहा; यह नीति निर्माण और क्रियान्वयन का मूल आधार रहा—जिसका अर्थ है कमजोर समूहों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना, बुनियादी सेवाओं तक पहुंच बढ़ाना और आय के स्थायी स्रोत विकसित करना। पार्टी की राजनीतिक संकल्प शक्ति ने दीर्घकालिक निवेशों और सामाजिक-आर्थिक सुधारों को जारी रखने में मदद की, भले ही शुरुआती वर्षों में लागत या प्रतिकूल प्रभाव हों। यह राजनीतिक स्थिरता और नीति निरंतरता का लाभ प्रदान करती है।
डिजिटल क्रांति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था
डिजिटल तकनीक, ई-कॉमर्स और बेहतर परिवहन नेटवर्क ने ग्रामीण उत्पादों को शहरी बाजारों तक पहुँचाया। इससे स्थानीय आय बढ़ी और रोजगार के नए अवसर खुले। यह तकनीक-सम्मत समाधान चीन की रणनीति का एक अहम हिस्सा रहा। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिला और ग्रामीण आय में वृद्धि हुई। हालांकि विभिन्न देशों की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं, फिर भी विकास के लिए स्पष्ट लक्ष्य, मजबूत संस्थागत क्षमता और जनकल्याण पर केंद्रित नीतियां सार्वभौमिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
चीनी शैली के आधुनिकीकरण का वैश्विक महत्व
चीन का मानना है कि उसका आधुनिकीकरण मॉडल केवल आर्थिक वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि साझा समृद्धि, सामाजिक विकास और दीर्घकालिक स्थिरता को भी महत्व देता है। गरीबी उन्मूलन की उपलब्धि को इसी व्यापक आधुनिकीकरण प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। वैश्विक दक्षिण के कई विकासशील देशों के लिए चीन का अनुभव अध्ययन का विषय बन चुका है। विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के विकास, गरीबी उन्मूलन और ग्रामीण पुनरोद्धार से जुड़े पहलुओं को अनेक देशों द्वारा ध्यानपूर्वक देखा जा रहा है। यद्यपि प्रत्येक देश को अपनी परिस्थितियों के अनुरूप विकास मार्ग चुनना होता है, फिर भी चीन का अनुभव यह दर्शाता है कि स्पष्ट रणनीति, दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और व्यापक सामाजिक सहभागिता के माध्यम से बड़े विकासात्मक लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
हाल ही में चीन की यात्रा पर गए भारतीय एक्सपर्ट सुधींद्र कुलकर्णी ने पेचिंग में आयोजित ग्लोबल पावर्टी रिडक्शन एंड डेवलपमेंट फोरम 2026 में हिस्सा लिया और कहा कि “चीन ने दुनिया को ये दिखा दिया है कि उसने करोड़ से ज़्यादा लोगो को गरीबी से पूरी तरह से मुक्त कर दिया है वो भी सिर्फ़ 4 दशकों के दौरान, ऐसा किया जा सकता है और ये मानव इतिहास में एक मिसाल है। इसलिए मुझे लगता है भारत को भी चीन से सबक लेना चाहिए क्योंकि भारत में भी कई सौ लोग गरीबी से जूझ रहे हैं। भारत-चीन एक दूसरे से काफ़ी कुछ सीख सकते हैं क्यूँकि दोनों ही प्राचीन सभ्यता से समर्ध हैं और दोनों देशों में आपस में पौराणिक संबंध हैं।”
चीन का गरीबी उन्मूलन अभियान समकालीन विश्व के सबसे बड़े सामाजिक-आर्थिक प्रयोगों में से एक है। चीन की गरीबी उन्मूलन मुहिम न केवल आँकड़ों की उपलब्धि है बल्कि संस्थागत क्षमता, राजनीतिक नेतृत्व और लोगों-केंद्रित विकास के एक अनूठे संयोजन का परिणाम है। एक रिपोर्टर के रूप में मेरी दृष्टि में इसका सबसे बड़ा संदेश यह है कि समन्वित नीतिगत इरादा, लक्षित संसाधन और जवाबदेही—तीनों मिलकर बड़े सामाजिक परिवर्तनों को संभव बनाते हैं। वैश्विक समुदाय के लिए इससे सीख यह है: हर देश की अपनी परिस्थितियाँ होंगी, पर उद्देश्य, समन्वय और जनता के भले के लिए दीर्घकालिक प्रतिबद्धता—ये सार्वभौमिक तत्व हैं जो गरीबी उन्मूलन की राह आसान कर सकते हैं। यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय बहस और शोध का विषय बनी रहेगी, क्योंकि यह इस बात की याद दिलाती है कि जहाँ राजनीतिक इच्छाशक्ति और संस्थागत क्षमता हो, वहाँ सदियों पुरानी चुनौतियों का समाधान संभव है।
(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग) (लेखक—देवेंद्र सिंह)

