Last Updated: September 22, 2026

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वैश्विक संकट के बीच चीन की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत मॉडल

April 17, 2026

वैश्विक संकट के बीच चीन की ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत मॉडल

अमेरिका-इज़राइल-ईरान संघर्ष से पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य से उत्पन्न भू-राजनीतिक जोखिम के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल और गैस बाज़ार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। परिणामस्वरूप, दुनिया भर की ऊर्जा पर निर्भर कई अर्थव्यवस्थाएं मुश्किल में हैं। रूसी मीडिया के हालिया अवलोकन से पता चलता है कि इस संकट में चीन का शांत रहना कोई अचानक घटना नहीं है, बल्कि यह लंबे समय की रणनीतिक योजना का स्वाभाविक परिणाम है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि इस बार संकट के दौरान चीन की स्थिरता उसकी दूरदर्शी रणनीतिक तैयारी का ही नतीजा है। 

हाल ही में, स्पुतनिक समाचार एजेंसी ने एक लेख में बताया कि चीन ने तेल की कम कीमतों के दौरान पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार जमा कर लिया था, जो उसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करता है। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि चीन की ऊर्जा संरचना पहले ही एकल ऊर्जा स्रोत पर निर्भरता से मुक्त हो चुकी है। चीन की कुल ऊर्जा खपत में नवीकरणीय ऊर्जा और कोयले का प्रमुख हिस्सा है, जबकि तेल का हिस्सा 20% से भी कम है। इस तरह की विविध ऊर्जा संरचना चीन को अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव से निपटने की अधिक क्षमता प्रदान करती है।

वहीं, नव ऊर्जा क्षेत्र में चीन की आगे की योजना वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने में उसके आत्मविश्वास का एक महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। जहां पश्चिमी देश अभी भी ऊर्जा परिवर्तन के रास्ते पर संकोच कर रहे हैं, वहीं चीन पहले ही दुनिया की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा प्रणाली स्थापित कर चुका है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 के अंत तक चीन की नवीन ऊर्जा भंडारण की स्थापित क्षमता 2.34 अरब किलोवाट से अधिक हो चुकी है, जो कुल वैश्विक क्षमता का 60% से ज्यादा हिस्सा है। चीन में पवन ऊर्जा और फोटोवोल्टिक ऊर्जा की कुल स्थापित क्षमता पहले ही ताप विद्युत उत्पादन से अधिक हो चुकी है। सोलर पैनल से लेकर पवन टरबाइन जनरेटर तक, ऊर्जा भंडारण प्रणाली से लेकर नई ऊर्जा वाहनों तक, चीनी कंपनियों के पास पूरी औद्योगिक श्रृंखला की मुख्य प्रौद्योगिकियां और विशाल उत्पादन क्षमता मौजूद है। इस पैमाने का लाभ चीन को वैश्विक ऊर्जा कमी के समय तेज़ी से बाज़ार की मांग पूरी करने में सक्षम बनाता है, जिससे चीन से लाखों सोलर पैनल और ऊर्जा भंडारण प्रणालियां तेजी से दुनिया भर में आपूर्ति की जा सकती हैं। 

रूसी मीडिया के अनुसार, पश्चिमी देशों के कई तथाकथित हरितस्टार्टअप्स के विपरीत, चीन के नवीन ऊर्जा उद्योग ने एक पूर्ण उद्योग श्रृंखला और बड़े पैमाने की उत्पादन क्षमता विकसित कर ली है। इससे चीन न केवल अपनी घरेलू ऊर्जा जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकता है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान अपनी मजबूत आपूर्ति क्षमता भी प्रदर्शित करता है। हरित ऊर्जा की बढ़ती वैश्विक मांग के बीच, चीन के पास अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार में और अधिक प्रभावशाली स्थान बनाने की क्षमता है। चीन न केवल तैयार उत्पादों का निर्यात कर सकता है, बल्कि अपने तकनीकी मानकों और प्लेटफॉर्म को भी विस्तारित कर विभिन्न देशों की ऊर्जा प्रणालियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

चीन का ऊर्जा संक्रमण कोई तात्कालिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह दीर्घकालिक रणनीतिक योजना का परिणाम है। “14वीं पंचवर्षीय योजना” (2021-2025) अवधि के दौरान, तेज़ ऊर्जा परिवर्तन से लेकर “15वीं पंचवर्षीय योजना” (2026-2030) में नई ऊर्जा प्रणाली के निर्माण को गति देने तक, चीन लगातार ऊर्जा विविधीकरण और हरित विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

“15वीं पंचवर्षीय योजना” के दौरान, चीन अपनी नई ऊर्जा आपूर्ति को और विस्तार देगा। वर्ष 2035 तक, चीन में पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन की कुल स्थापित क्षमता 3.6 अरब किलोवाट से अधिक होने का अनुमान है, जिससे गैर-जीवाश्म ऊर्जा का हिस्सा 30% से अधिक हो जाएगा। चीन नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति को बढ़ाने के साथ-साथ समाज की नई बिजली मांग को स्वच्छ ऊर्जा से पूरा करने की दिशा में काम करेगा। वर्ष 2030 तक, नई ऊर्जा आधारित बिजली उत्पादन का अनुपात लगभग 30% तक पहुंचने की संभावना है। चीन नवीकरणीय ऊर्जा से हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया और हरित मिथेनॉल का उत्पादन बढ़ाएगा, साथ ही हीटिंग, कूलिंग और बायोगैस जैसे गैर-विद्युत उपयोगों में भी विस्तार करेगा। इसके साथ ही, चीन नवीकरणीय ऊर्जा को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में विकसित करने पर ध्यान देगा और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार नीतियां लागू करने में स्थानीय सरकारों का मार्गदर्शन करेगा।

अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए, चीन अपनी ऊर्जा विकास योजनाओं में सुधार करेगा, लक्ष्यों और संकेतकों को मजबूत बनाएगा, प्रमुख परियोजनाओं के क्रियान्वयन को तेज़ करेगा और ऊर्जा सुरक्षा की नई रणनीति को पूरी तरह लागू करेगा। इसी के बल पर चीन समाजवादी आधुनिकीकरण के लक्ष्य की दिशा में निर्णायक प्रगति कर सकेगा। यह स्पष्ट विकास मार्ग चीन को न केवल वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य के बदलावों के बीच अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम बनाएगा, बल्कि उसे वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभाने की स्थिति में भी लाएगा।

मौजूदा जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में, वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए चीन का संयमित और संतुलित दृष्टिकोण दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है। यह दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा की असली कुंजी दूरदर्शी रणनीति और मजबूत औद्योगिक आधार में छिपी है। चीन का अनुभव बताता है कि संकट के समय वही देश आगे बढ़ता है, जिसने पहले से तैयारी की हो और बदलाव को समय रहते अपनाया हो। यही तैयारी संकट को अवसर में बदल सकती है और नए वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में मजबूत स्थिति दिला सकती है।

(साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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