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लगातार जारी है चीन की सौर ऊर्जा का विस्तार

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चीन की ऊर्जा यात्रा लगातार नई ऊँचाइयाँ छू रही है। राष्ट्रीय ऊर्जा प्रशासन (NEA) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली छमाही के अंत तक चीन की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 3.61 बिलियन किलोवाट तक पहुँच गई। यह आँकड़ा 2024 की तुलना में 18.8% की उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इन आँकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है सौर ऊर्जा का लगातार और तीव्र विस्तार।

चीन आज दुनिया में सौर ऊर्जा उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। नई तकनीक, बड़े पैमाने पर निवेश और सरकारी प्रोत्साहन ने इसे संभव बनाया है। छतों पर सोलर पैनल से लेकर विशाल सोलर फार्म तक, चीन ऊर्जा उत्पादन के हर स्तर पर “ग्रीन पावर”को प्राथमिकता दे रहा है। हाल के वर्षों में चीन ने सौर फोटोवोल्टिक तकनीक में वैश्विक नेतृत्व कायम किया है। केवल बिजली उत्पादन क्षमता ही नहीं, बल्कि सौर ऊर्जा उपकरणों के उत्पादन और निर्यात में भी चीन का वर्चस्व है।

सौर ऊर्जा का यह विस्तार केवल तकनीकी या आर्थिक सफलता नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्बन उत्सर्जन में कटौती कर चीन अपने 2060 कार्बन न्यूट्रल लक्ष्य की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है साथ ही पारंपरिक कोयला-आधारित ऊर्जा पर निर्भरता घटाकर ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।

चीन की सौर ऊर्जा प्रगति वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी प्रभावित कर रही है। सस्ते और अधिक दक्ष सौर पैनल वैश्विक दक्षिण के लिए हरित विकास को संभव बना रहे हैं। भारत भी तेजी से सौर ऊर्जा में निवेश बढ़ा रहा है। चीन की तकनीकी प्रगति और उत्पादन क्षमता भारत जैसे देशों के लिए अवसर और प्रतिस्पर्धा दोनों प्रस्तुत करती है।

चीन का सौर ऊर्जा विस्तार केवल संख्याओं में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश देता है कि स्वच्छ ऊर्जा ही भविष्य है। चीन ने साबित कर दिया है कि बड़े पैमाने पर हरित निवेश और नीतिगत समर्थन से ऊर्जा संक्रमण न केवल संभव है बल्कि टिकाऊ भी।

(दिव्या पाण्डेय – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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