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चीन का AI विजन दुनिया को कर सकता है प्रेरित

China AI Vision

China AI Vision

China AI Vision : आजकल टेक्नोलॉजी तेजी से बदल रही है, और ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का विकास ऐसा हो जिससे सबको फायदा मिले। इसके लिए दुनिया को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। हाल ही में पेरिस में हुए AI एक्शन समिट में करीब 60 देशों ने एक बयान पर साइन किए। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि AI को सबके लिए सुलभ और सुरक्षित बनाया जाए। यह तकनीक पारदर्शी, नैतिक और भरोसेमंद होनी चाहिए।

बीते कुछ सालों में AI की दुनिया में काफी तरक्की हुई है। नए बिजनेस मॉडल बने हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ा है। बड़े-बड़े देशों और कंपनियों ने इस फील्ड में खूब पैसा लगाया है। लेकिन जहाँ यह तकनीक नए मौके देती है, वहीं इससे जुड़े कुछ खतरे और चुनौतियाँ भी हैं। ऐसे में, इस पर ग्लोबल लेवल पर नियम-कायदे तय करना बहुत जरूरी हो गया है।

चीन इस मामले में खास पहल कर रहा है। वह चाहता है कि AI का फायदा सिर्फ अमीर देशों तक ही सीमित न रहे, बल्कि पूरी दुनिया को इसका लाभ मिले। चीन खुद भी AI के विकास में आगे है और उसने इसमें बड़ा योगदान दिया है।

विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के अनुसार, 2014 से 2023 के बीच चीन ने 38,000 से ज्यादा जनरेटिव AI पेटेंट दर्ज कराए हैं, जो दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। इस समय चीन में 4,500 से ज्यादा AI कंपनियाँ हैं, और इस सेक्टर का कुल कारोबार 600 अरब युआन (लगभग 84 अरब अमेरिकी डॉलर) के करीब पहुँच चुका है।

चीन का नजरिया दुनिया के लिए प्रेरणा बन सकता है। 2017 में, चीन की सरकार ने एक नई AI नीति बनाई, जिसमें सुरक्षित और सतत AI विकास पर जोर दिया गया। AI को लेकर चीन ने कई कानून और गाइडलाइंस भी जारी किए। इंटरनेशनल लेवल पर भी चीन सक्रिय रहा है— 2023 में उसने ग्लोबल AI गवर्नेंस इनिशिएटिव लॉन्च किया और 2018 से हर साल वर्ल्ड AI समिट की मेजबानी कर रहा है।

अगर AI को सही दिशा में आगे बढ़ाना है, तो देशों को आपस में जानकारी साझा करनी होगी और टेक्नोलॉजी के मामले में सहयोग बढ़ाना होगा। इसके अलावा, सबको मिलकर AI से जुड़े नियम और मानक तय करने होंगे ताकि यह तकनीक सुरक्षित, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनी रहे।

हर देश का अपना नजरिया और एथिक्स हो सकता है, जिससे ग्लोबल AI गवर्नेंस आसान नहीं है। लेकिन अगर सभी देश साथ मिलकर काम करें, तो आम सहमति बन सकती है। इसके लिए, देशों को ऐसी नीतियों और गुटबाजी से बचना होगा जो AI के विकास में अड़चन डालती हैं। साथ ही, टेक्नोलॉजी पर एकाधिकार जमाने या दूसरे देशों पर दबाव बनाने जैसी रणनीतियों को भी रोकना होगा। AI जैसी खोज सिर्फ अमीर देशों की संपत्ति नहीं होनी चाहिए, बल्कि पूरी दुनिया को इसका फायदा मिलना चाहिए।

हल्की-फुल्की प्रतिस्पर्धा ठीक है, लेकिन अगर यह बेकाबू हो जाए तो नुकसान भी हो सकता है। इसे “ग्रे राइनो” (यानी दिखते हुए भी नजरअंदाज किए जाने वाले खतरे) में बदलने से रोकना होगा। AI और दूसरी नई टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल तभी संभव होगा जब इसे मिलकर रेगुलेट किया जाए, ताकि यह “पेंडोरा बॉक्स” (यानि अनचाहे संकट) न बने, बल्कि “अलीबाबा का खजाना” साबित हो।

चीन AI को सभी के लिए फायदेमंद बनाने के लिए पूरी तरह तैयार है और इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए हमेशा तत्पर है। अगर सभी देश मिलकर संवाद और सहयोग को बढ़ावा दें, तो AI का विकास ऐसा होगा जिससे पूरी दुनिया को फायदा होगा।

(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, बीजिंग)

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