साल 2025 चीन के लिए केवल आंकड़ों का साल नहीं रहा, बल्कि सोच और दिशा में बदलाव का साल रहा। यह साफ़ तौर पर दिखा कि चीन अब सिर्फ़ तेज़ विकास की बात नहीं कर रहा, बल्कि टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण विकास पर ज़ोर दे रहा है। अर्थव्यवस्था हो, विज्ञान और तकनीक हो, अंतरिक्ष मिशन हों या हरित विकास… हर क्षेत्र में यही संकेत मिला कि अब तात्कालिक लाभ नहीं, बल्कि दीर्घकालिक योजना अधिक ज़रूरी है। यानी आज की रफ्तार से ज़्यादा अहम है कल की मजबूती।
अगर अर्थव्यवस्था की बात करें, तो साल 2025 चीन के लिए आसान साल नहीं था। वैश्विक अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में थी। व्यापार तनाव, भू-राजनीतिक चुनौतियां और देश के भीतर अचल संपत्ति क्षेत्र की समस्याएं सामने थीं। इसके बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था करीब 4.5 से 4.8 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ी। यह वृद्धि भले ही पहले जैसी तेज़ न लगे, लेकिन आज के वैश्विक माहौल में इसे कमज़ोर भी नहीं कहा जा सकता। जब कई बड़े देश धीमी वृद्धि या आर्थिक मंदी की चर्चा कर रहे थे, तब चीन ने स्थिरता बनाए रखी।
साल 2025 में चीन के नेतृत्व का साफ़ संदेश था कि अब केवल सकल घरेलू उत्पाद बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि विकास की गुणवत्ता भी उतनी ही ज़रूरी है। ब्याज दरों में राहत दी गई, छोटे और मध्यम कारोबार को समर्थन मिला और घरेलू मांग बढ़ाने की कोशिश की गई। सेवा क्षेत्र और घरेलू उपभोग की हिस्सेदारी लगातार बढ़ती गई। इसका साफ़ मतलब है कि चीन धीरे-धीरे निवेश और निर्यात पर निर्भर अर्थव्यवस्था से उपभोक्ता और सेवा आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
अब बात विज्ञान और तकनीक की। साल 2025 में यह साफ़ हो गया कि “मेड इन चाइना 2025” अब सिर्फ़ एक नारा नहीं रहा। रोबोटिक्स, जैव तकनीक, चिकित्सकीय उपकरण, विद्युत वाहन और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में चीनी कंपनियां अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रही हैं। इसके पीछे वर्षों का अनुसंधान और विकास में निवेश, मज़बूत औद्योगिक नीति और बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अभियंता और वैज्ञानिक हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बैटरी आपूर्ति शृंखला, उन्नत अर्धचालक और क्वांटम तकनीक में भी साल 2025 के दौरान चीन की पकड़ और मजबूत हुई। इससे न सिर्फ़ कारखानों और उद्योगों की उत्पादकता बढ़ी, बल्कि वैश्विक तकनीकी दौड़ में चीन की छवि भी बदली। अब चीन को केवल तकनीक आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि नवाचार निर्यात करने वाला देश भी माना जाने लगा है।
अंतरिक्ष क्षेत्र की बात करें, तो साल 2025 चीन के लिए उपलब्धियों से भरा रहा। इस साल कई अहम अंतरिक्ष अभियानों पर तेज़ी से काम हुआ। तियानवेन-2 जैसे क्षुद्रग्रह अन्वेषण मिशन हों या अंतरराष्ट्रीय सहयोग परियोजनाएं… हर जगह सक्रियता दिखी। यूरोप के साथ स्माइल मिशन और इटली के साथ संयुक्त उपग्रह परियोजनाओं ने दिखाया कि चीन अंतरिक्ष को अकेले का खेल नहीं, बल्कि साझा विज्ञान मानता है।
पृथ्वी पर विज्ञान की बात करें, तो च्यांगमन न्यूट्रिनो वेधशाला जैसे बड़े अनुसंधान प्रोजेक्ट 2025 में कार्यशील चरण में पहुंचे। ऐसे प्रोजेक्ट तुरंत मुनाफ़ा नहीं देते, लेकिन भविष्य के विज्ञान की नींव मज़बूत करते हैं। इससे साफ़ होता है कि चीन तात्कालिक फायदे से ज़्यादा दीर्घकालिक ज्ञान पर ध्यान दे रहा है। अंतरिक्ष दिवस जैसे आयोजनों के ज़रिए युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष से जोड़ने की कोशिश भी साल 2025 की एक अहम पहल रही।
अब आते हैं हरित विकास और जलवायु लक्ष्यों पर। 14वीं पंचवर्षीय योजना के आख़िरी साल यानी 2025 तक चीन ने ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता कम करने के अपने लक्ष्यों पर अच्छी प्रगति दिखाई। नवीकरणीय ऊर्जा, बुद्धिमान बिजली नेटवर्क और स्वच्छ औद्योगिक तकनीक में बड़े स्तर पर निवेश जारी रहा। इसका असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा। हरित रोज़गार बढ़े, हरित वित्त का दायरा बढ़ा और विद्युत वाहन व बैटरी उद्योग जैसे क्षेत्र तेज़ी से आगे बढ़े।
चीन ने अपने हरित अनुभव को दुनिया के साथ साझा करने की भी कोशिश की। विकासशील देशों को उपग्रह आंकड़े, जलवायु निगरानी और स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग दिया गया। इससे “ग्रीन सिल्क रोड” यानी हरित रेशम मार्ग का विचार और मज़बूत हुआ। साफ़ है कि चीन जलवायु परिवर्तन को केवल राष्ट्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी के रूप में देख रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में चीन की भूमिका 2025 में भी काफ़ी अहम रही। क्रय शक्ति समानता के आधार पर चीन की अर्थव्यवस्था का आकार 43 ट्रिलियन डॉलर से ज़्यादा आंका गया। वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि में चीन का योगदान करीब 30 प्रतिशत के आसपास बना रहा। ये आंकड़े दिखाते हैं कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में चीन कितना बड़ा खिलाड़ी है।
हां, चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। अचल संपत्ति क्षेत्र की समस्याएं, बाहरी दबाव और घरेलू मांग से जुड़ी चिंताएं बनी हुई हैं। लेकिन उच्च तकनीक निर्माण, सेवा क्षेत्र, निर्यात आधारित उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था ने कुल मिलाकर स्थिरता बनाए रखी। सरकार का ध्यान अब साफ़ तौर पर मात्रा से ज़्यादा गुणवत्ता पर है। मतलब कम वृद्धि भी स्वीकार्य है, अगर वह टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल हो।
बिलकुल साफ़ कहा जा सकता है कि साल 2025 चीन के लिए तेज़ विकास से निकलकर बेहतर विकास की ओर बढ़ने का निर्णायक मोड़ है। चीन दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि उसका विकास केवल उसके लिए नहीं, बल्कि वैश्विक वृद्धि, तकनीकी साझेदारी और हरित भविष्य का भी हिस्सा है। और यही बात 2025 को सचमुच खास बनाती है।
(अखिल पाराशर, चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)