Last Updated: September 23, 2026

Dainik Savera Times Logo

विश्व के लिए चीन का बहुआयामी योगदान

September 30, 2025

विश्व के लिए चीन का बहुआयामी योगदान

1 अक्तूबर 1949 को न केवल चीन लोक गणराज्य के जन्म को घोषणा की गयी, बल्कि दुनिया को 5,000 साल पुरानी चीनी सभ्यता के पुनर्जन्म का भी संकेत दिया गया। पिछले 76 वर्षों में, चीन ने “सफलता में रहने वाले लोगों को सभी की भलाई में योगदान देना चाहिए”  के अपने पारंपरिक दर्शन को वैश्विक व्यवहार में उतारा है। चीन ने दुनिया को आधुनिकीकरण का एक ऐसा मार्ग प्रदान किया है, जो आधिपत्यवादी मॉडल से अलग है।

पिछले 76 वर्षों में, चीन की आर्थिक शक्ति, वैज्ञानिक शक्ति और व्यापक राष्ट्रीय शक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और इसका अंतर्राष्ट्रीय प्रभाव भी काफ़ी विस्तृत हुआ है। दुनिया की कृषि योग्य भूमि का केवल 9 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद, चीन दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत आबादी का पेट भरता है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए एक ठोस आधार प्रदान करता है। अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान, वैश्विक आर्थिक विकास में चीन का औसत वार्षिक योगदान लगभग 30 प्रतिशत रहा, जिससे यह वैश्विक आर्थिक विकास में एक प्रमुख योगदानकर्ता बना है।

पिछले 76 वर्षों में,चीनी शैली वाले आधुनिकीकरण ने विकासशील देशों के लिए एक नया मॉडल प्रस्तुत किया है। इथियोपिया में ईस्टर्न इंडस्ट्रियल पार्क परियोजना में, चीनी कंपनियों ने न केवल लगभग 23,000 स्थानीय नौकरियां पैदा की हैं, बल्कि इथियोपिया की औद्योगिक प्रणाली का निर्माण करने, स्थानीय प्रतिभा विकास को बढ़ाने और राष्ट्रीय आर्थिक परिवर्तन को बढ़ाने में भी मदद की है। चीनी राष्ट्रीय रेलवे श्रेणी प्रथम मानक के अनुसार चीनी सहायता से निर्मित मोम्बासा-नैरोबी रेलवे से केन्या के जीडीपी में 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और केन्या में “रेलवे आर्थिक बेल्ट” वाला एक नए अफ्रीकी विकास मॉडल के निर्माण को बढ़ावा मिला है। मेडागास्कर के 12 क्षेत्रों में हाइब्रिड धान प्रौद्योगिकी को बढ़ाया गया है। इससे कभी अकाल से त्रस्त यह देश अब चावल निर्यात करने वाला पहला पूर्वी अफ्रीकी देश बना है।

वहीं, अर्जेंटीना ने चीन-अर्जेंटीना सहयोग के माध्यम से स्थिर आर्थिक विकास हासिल किया है। चीन के अनुभव से सीखने से ब्राज़ील ने नीतिगत समायोजन किया और अपने व्यावसायिक वातावरण को अनुकूलित किया है। ये प्रथाएं विकासशील देशों के लिए “चीनी शैली वाले आधुनिकीकरण” के मूल्यवान उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। चीन ने लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में 200 से अधिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को क्रियान्वित किया है, अनेक क्षमता सहयोग परियोजनाएं शुरू की हैं और दस लाखों नौकरियां प्रदान की हैं।

पिछले 76 वर्षों में, “थ्री नॉर्थ्स” शेल्टरबेल्ट परियोजना, कृषि भूमि को वन व चरागाह में वापस लाने की परियोजना और तकलामाकन रेगिस्तान को “सील करने” की परियोजना सहित कई प्रमुख पारिस्थितिक परियोजनाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से, दुनिया में चीन यह उपलब्धि हासिल करने वाला प्रथम देश बना है कि चीन ने रेगिस्तानी भूमि और मरुस्थलीकृत भूमि दोनों के क्षेत्रफल में कमी हासिल की है। हाल के वर्षों में, चीन ने विभिन्न रूपों में व्यापक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग किया है, जिसमें प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, अंतर्राष्ट्रीय रेगिस्तान मंचों की मेजबानी और अंतरराष्ट्रीय रेत नियंत्रण केंद्र स्थापित करना आदि शामिल हैं। इसके अलावा, चीन ने पारिस्थितिक सभ्यता के अपने सफल अभ्यास के माध्यम से वैश्विक सतत विकास को बढ़ाने में अपनी बुद्धिमत्ता व शक्ति का योगदान दिया है। आंकडों के अनुसार, चीन वैश्विक बाजार में लगभग 60 प्रतिशत पवन ऊर्जा उपकरण और 70 प्रतिशत फोटोवोल्टिक मॉड्यूल की आपूर्ति करता है। अकेले वर्ष 2023 में, चीनी पवन ऊर्जा व फोटोवोल्टिक उत्पादों ने अन्य देशों को कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को लगभग 81 करोड़ टन कम करने में मदद की। न्यूयॉर्क टाइम्स की वेबसाइट ने रिपोर्ट की कि चीन की विभिन्न हरित ऊर्जा प्रौद्योगिकियां आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रही हैं और इसने वैश्विक हरित परिवर्तन की कहानी को फिर से लिखने का काम किया है।

पिछले 76 वर्षों में, चीन ने हमेशा आधिपत्य व सत्ता की राजनीति का कड़ा विरोध किया है, सभी देशों के बीच समानता व सम्मान की वकालत की है और दुनिया में सभी लोगों के स्वतंत्र रूप से अपने देशों के विकास पथ चुनने के अधिकार का सम्मान किया है। चीन ने हमेशा दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का विरोध किया है और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के विकास को और अधिक न्यायपूर्ण दिशा में बढ़ाना जारी रखा है। अमेरिकी आक्रमण का विरोध करने व डीपीआरके की सहायता करने के लिए युद्ध से लेकर शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों तक, चीन ने राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय संप्रभुता एवं शांति को निरंतर बनाए रखा है। इससे चीन ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में “विविधता में सामंजस्य और सभी के लिए साझा समृद्धि के चीनी ज्ञान का समावेश किया है। चीन द्वारा प्रस्तावित “वैश्विक सुरक्षा पहल” मानव शांति व सौहार्द की रक्षा के लिए अधिक से अधिक देशों व क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख सिद्धांत बना है।

76 वर्षों के अभ्यास ने दिखाया है कि दुनिया में चीन का योगदान कुछ “मानक जवाब” प्रदान करने के बजाय मानव विकास की संभावनाओं को समृद्ध करने में है। मानव विकास सूचकांक से लेकर वैश्विक नवाचार सूचकांक तक और शांति सूचकांक से लेकर जलवायु कार्रवाई रेटिंग तक, चीन अपने कार्यों से यह साबित कर रहा है कि विकास बिना तोपों के इस्तेमाल के भी हो सकता है और देशों व क्षेत्रों की उन्नति थ्यूसीडाइड्स के जाल से बच सकती है। साथ ही, एक महाशक्ति का उदय एक ऐसा अवसर बन सकता है, जिससे दुनिया को लाभ हो।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें