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ड्रोन हमलों के डर से रूस में सड़कों पर उतरे चर्च के पादरी, निकाली विषेश प्रार्थना यात्रा

russia perm priests prayer

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इंटरनेशनल डेस्क: रूस के पर्म शहर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने लोगों को हैरान भी किया है और सोचने पर मजबूर कर दिया है। आज के दौर में जहां युद्ध और सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक, मिसाइल सिस्टम और ड्रोन डिफेंस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, वहीं पर्म शहर में लोगों ने सुरक्षा के लिए आस्था का सहारा लिया। लगातार ड्रोन हमलों की आशंका और डर के बीच स्थानीय चर्च के पादरी सड़कों पर उतरे और पूरे शहर में विशेष प्रार्थना यात्रा निकाली। इस अनोखे कदम की चर्चा सोशल मीडिया पर तेजी से हो रही है।

ड्रोन हमलों से डरे लोग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पर्म शहर में हाल के दिनों में ड्रोन हमलों की घटनाओं और खतरे ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। शहर के कई इलाकों में डर का माहौल था और लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे थे। ऐसे हालात में स्थानीय चर्च ने लोगों का मनोबल बढ़ाने और शहर की सुरक्षा के लिए धार्मिक यात्रा निकालने का फैसला किया।

बताया जा रहा है कि 12 मई को चर्च के कई पादरी ‘मदर ऑफ गॉड ऑफ पर्म’ की पवित्र प्रतिमा को लेकर शहर के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने खास जगहों पर रुककर प्रार्थना की और लोगों की सुरक्षा की कामना की।

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शहर के अहम इलाकों में की गई प्रार्थना

यह प्रार्थना यात्रा केवल चर्च तक सीमित नहीं रही। पादरी शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों, कब्रिस्तानों, बिजली केंद्रों और महत्वपूर्ण स्थानों तक गए। वहां उन्होंने विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए और शांति तथा सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। चर्च से जुड़े लोगों का कहना है कि यह कोई नई परंपरा नहीं है। पुराने समय में जब भी युद्ध, बीमारी या किसी बड़े संकट का खतरा होता था, तब लोग इसी तरह धार्मिक जुलूस और सामूहिक प्रार्थनाएं आयोजित करते थे। उनका मानना है कि आस्था लोगों को मानसिक ताकत देती है और मुश्किल समय में उम्मीद बनाए रखती है।

पहले भी अपनाया गया था ऐसा तरीका

जानकारी के अनुसार, पर्म शहर में इससे पहले कोरोना महामारी के दौरान भी इसी तरह की प्रार्थना यात्रा निकाली गई थी। उस समय भी लोगों की सुरक्षा और बीमारी से राहत के लिए चर्च ने धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए थे। चर्च का मानना है कि इतिहास में कई बार ऐसे आयोजनों से लोगों को मानसिक शांति और एकजुटता मिली है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे लोगों की आस्था और विश्वास से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि संकट के समय प्रार्थना लोगों को हिम्मत देती है और डर कम करने में मदद करती है। वहीं दूसरी तरफ कई लोग इस तरीके को आधुनिक दौर में बेअसर बता रहे हैं। कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि क्या सिर्फ प्रार्थना से ड्रोन हमलों को रोका जा सकता है। कई लोगों का कहना है कि सुरक्षा के लिए तकनीकी और सैन्य उपाय ज्यादा जरूरी हैं।सोशल मीडिया पर एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि अब रूस भी संकट के समय धार्मिक उपायों का सहारा लेने लगा है। वहीं कुछ लोगों ने इसे परंपरा और आधुनिकता के मेल के रूप में देखा।

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