अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 23 अप्रैल को कहा कि चीन का निर्यात-निर्भर आर्थिक मॉडल “अस्थायी” है और इससे न केवल चीन को बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प सभी क्षेत्रों पर टैरिफ लगाकर व्यापार असंतुलन को दूर करना चाहते हैं। वास्तव में, चीनी अर्थव्यवस्था “असंतुलित” होने से बहुत दूर है और एक गतिशील परिवर्तन की प्रक्रिया में है। इसके विपरीत, अमेरिका, जो संरक्षणवाद में फंसा हुआ है और एक अस्थिर ऋण-चालित विकास मॉडल पर निर्भर है, वह वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए वास्तविक खतरा पैदा करता है।
चीन का औद्योगिक उत्थान प्रारम्भ में विनिर्माण और निर्यात पर आधारित था, 2010 के बाद से चीन लगातार उपभोग और नवाचार-संचालित मॉडल की ओर स्थानांतरित हो गया है। 2024 में, चीन की आर्थिक वृद्धि में उपभोग का योगदान 44.5% था, और सकल घरेलू उत्पाद में सेवाओं का अनुपात बढ़कर 56.7% हो गया। डिजिटल उद्योग का लाभ 27 खरब युआन तक पहुंच गया और पिछले वर्ष की तुलना में 3.5% अधिक है, जो आधुनिक उपभोग-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित विकास मॉडल की ओर चीन के निरंतर संक्रमण को दर्शाता है।
पिछले वर्ष से अमेरिकी अधिकारी स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में “चीन की अतिक्षमता” के बारे में चिंता जताते रहे हैं। लेकिन उनकी वास्तविक चिंता स्पष्ट है: चीन ने हरित तकनीकी नवाचार में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है, और अमेरिका को यह बर्दाश्त नहीं है कि उसे पीछे छोड़ दिया जाए। उदाहरण के तौर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को लें तो वैश्विक मांग अभी भी पूरी तरह से संतृप्त नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, 2030 तक वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तीन गुनी होकर 4.5 करोड़ हो जाएगी, जो वर्तमान उत्पादन क्षमता से कहीं अधिक है। यह “अतिक्षमता” नहीं है, बल्कि स्वच्छ परिवहन के लिए विश्व की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए चीन का समायोजन है।
संक्षेप में, अमेरिका जिस बात को लेकर चिंतित है, वह “संरचनात्मक असंतुलन” नहीं बल्कि “संरचनात्मक प्रगति” है। उच्च-स्तरीय विनिर्माण क्षेत्र में चीन का उदय, उन्नत उद्योगों में अमेरिका के लाभ के एकाधिकार को सीधे चुनौती देता है। इसका उद्देश्य समान अवसर उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि अप्रतिस्पर्धी उद्योगों को वास्तविक बाजार प्रतिस्पर्धा से बचाना है। इससे भी बदतर बात यह है कि अमेरिका ऐसे समय में चीन की आर्थिक वृद्धि को नकारात्मक रूप में दर्शाकर विभाजन को बढ़ा रहा है, जब वैश्विक सहयोग पहले से कहीं अधिक आवश्यक है। विशेषकर टैरिफ लगाकर, डॉलर को हथियार बनाकर, तथा आर्थिक वियोजन को बाध्य करके। यह खतरनाक शून्य-सम गेम वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को ऐसे समय में कमजोर करने का खतरा पैदा करता है जब विश्व को आम चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है।
चीन की अर्थव्यवस्था के परिवर्तन ने आम समृद्धि के लिए जबरदस्त अवसर पैदा किये हैं। स्वच्छ ऊर्जा और बढ़ते उपभोक्ता बाजार में इसकी सफलताएं वैश्विक अर्थव्यवस्था के सतत् विकास को गति दे सकती हैं। हालाँकि, नियंत्रण के प्रति वाशिंगटन की सनक से वैश्विक अर्थव्यवस्था के ठप्प होने का खतरा पैदा हो गया है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

