इंटरनेशनल डेस्क। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद, दुनिया में दो प्रमुख विकास मॉडल सामने आये, अर्थात् संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रस्तुत मुक्त पूंजीवादी आर्थिक मॉडल तथा सोवियत संघ द्वारा प्रस्तुत नियोजित आर्थिक विकास मॉडल। उस समय, भारत ने भी गुटनिरपेक्ष मार्ग की वकालत कर एक मिश्रित आर्थिक विकास मॉडल का साथ दिया। उधर, नियोजित अर्थव्यवस्था और मुक्त पूंजीवाद के दो आर्थिक विकास मॉडलों के बीच प्रतिस्पर्धा की एक लंबी अवधि के बाद, उनके संबंधित फायदे और नुकसान बहुत स्पष्ट साबित हुए, जबकि चीन ने सुधार और खुलेपन के बाद योजना में बाजार, बाजार में योजना के नये विकास मॉडल तैयार किया। ऐसा विकास मॉडल एक बहुत ही सफल मॉडल साबित हुआ है, और इसे बहुत से वैश्विक दक्षिण देशों के द्वारा ध्यान में रखा गया है।
एकाधिकार पूंजी का मूल उद्देश्य है मुनाफा की प्राप्ति, जबकि चीनी विशेषता वाले समाजवाद का होता है जन हित। उदाहरण के लिए, चीन ने दुनिया की सबसे बड़ी हाई-स्पीड रेल प्रणाली विकसित की है, जिसकी रेलवे माइलेज 48,000 किलोमीटर है, जो दुनिया के कुल हाई-स्पीड रेल माइलेज का 70% से अधिक है। ध्यानाकर्षक है कि ये हाई-स्पीड रेलवे सभी लाभदायक नहीं हैं, और कुछ लाइनें घाटे में चल रही हैं। लेकिन वे स्थानीय आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकती हैं और जन जीवन में बहुत सुविधा ला सकती हैं। पूंजीवादी प्रणाली वाले देशों में ऐसा निर्माण अकल्पनीय है। क्योंकि लाभ के बिना निर्माण में कोई निवेश नहीं होगा, भले ही यह समाज के लिए फायदेमंद हो या न हो। पूंजीवाद का विकास मॉडल मूल रूप से इसके सामाजिक दृष्टिकोण को निर्धारित करता है। यदि सब कुछ हितों पर आधारित है, तो चिकित्सा, शिक्षा, आवास और महामारी की रोकथाम जैसे कल्याण को सुचारू रूप से नहीं चलाया जा सकता है, क्योंकि इनसे मुनाफा कमाना मुश्किल है।
तथ्यों ने साबित कर दिया है कि चीनी विशेषता वाला समाजवाद एक कारगर सामाजिक व्यवस्था है जिसमें निजी और सार्वजनिक अर्थव्यवस्थाएँ सह-अस्तित्व में हैं और एक मजबूत सरकार द्वारा समन्वित हैं। यह बाजार को बाहर नहीं करता है, लेकिन जब आवश्यक हो, तो यह कुशलता से सामाजिक संसाधनों को आवंटित कर सकता है। चीन ने हाई-स्पीड रेल, चिप्स, एआई, ग्रीन एनर्जी आदि में अन्य देशों को पीछे छोड़ दिया है, क्योंकि चीन में आर्थिक विकास देश की रणनीति के अधीन है, और सरकार को औद्योगिक विकास पर निर्णयक शक्ति प्राप्त है। बुनियादी अंतर यह है कि पूंजी लोगों के हितों का पालन करती है या लोगों के हित पूंजी का पालन करते हैं। चीनी सरकार संसाधनों के विनियमन और आवंटन का नियंत्रण कर सकती है, जिसके कारण चीन वित्तीय संकट और महामारी के प्रभाव जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करने में पूरी तरह समर्थ है। चीनी प्रणाली के तहत सब कुछ राष्ट्रीय रणनीति और लोगों के हितों की सेवा करता है। इसलिए, चीन पंचवर्षीय योजना, ग्रामीण पुनरोद्धार और कार्बन उत्सर्जन की कटौती जैसी नीतियों की एक श्रृंखला को लागू कर सकता है, जो अन्य देशों में अकल्पनीय हैं।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र हुए एशियाई, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों ने आर्थिक विकास और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया, पर उनमें से अधिकांश सफल नहीं हुए हैं। कई विकासशील देशों ने पश्चिम की हर चीज़ को आँख मूंदकर अपनाया, माना कि पश्चिमी लोकतांत्रिक प्रणालियों की मदद से लोगों की खुशी हासिल की जा सकेगी। लेकिन आज तक अधिकांश एशियाई, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देश गरीबी और अविकसितता से बच नहीं पाए हैं। जबकि चीन में अधिकांश लोगों को सरकारी समर्थन से गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह समाजवादी व्यवस्था की श्रेष्ठता का प्रतिबिंब है। वर्तमान में, चीन विकास की प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली नई समस्याओं का लगातार अध्ययन और समाधान कर रहा है, और लोगों के लिए बेहतर जीवन का निर्माण करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

