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वैश्विक महिला सम्मेलन के विकासात्मक संदेश

October 24, 2025

वैश्विक महिला सम्मेलन के विकासात्मक संदेश

वैश्विक स्तर पर जब चीन के काम करने की जगहों, कारखानों आदि का नजारा सामने आता है, उनमें एक बात प्रमुखता से दिखती है। कर्मचारियों में बड़ी संख्या महिलाएं नजर आती हैं। एक तरह से कह सकते हैं कि चीन के कामगार परिदृश्य के महिलाओं और उनकी श्रमशक्ति ने पूरी तरह बदल कर रख दिया है। ऐसे में माहौल में वैश्विक महिला सम्मेलन का पेइचिंग में आयोजित होना और सफल होना प्रासंगिक ही कहा जाएगा। 

पेइचिंग में वैश्विक महिला सम्मेलन के सम्पन्न हुए दो हफ्ते से ज्यादा बीत चुके हैं। बीते 13 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मेलन का विषय रहा, ‘साझा नियति- महिलाओं के समग्र विकास को गति। इस आयोजन में आइसलैंड के राष्ट्रपति थॉमस डोटिल, डोमिनिका के राष्ट्रपति बर्टन, घाना के राष्ट्रपति महामा, मोज़ाम्बिक के प्रधानमंत्री लेवी और श्रीलंका की प्रधानमंत्री अमलासूरिया सहित 110 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और संसदीय नेताओं का हिस्सा लेना ही जाहिर करता है कि यह सम्मेलन वैश्विक परिदृश्य में कितना महत्वपूर्ण रहा है। इसके शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग का कहना है कि महिलाएँ मानव सभ्यता की महत्वपूर्ण निर्माता, प्रवर्तक और उत्तराधिकारी हैं, वाजिब ही कहा जाएगा। एक तरह से यह कथन मानव इतिहास में महिलाओं की महत्ता का स्वीकरण ही है। शी चिनफिंग ने यहां तक कहा कि महिला हितों को बढ़ावा देना, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की साझा ज़िम्मेदारी है, एक तरह से महिलाओं की ताकत के भविष्य का खाका है। 

संयुक्त राष्ट्रसंघ का चौथा विश्व महिला सम्मेलन सितंबर 1995 में पेइचिंग में आयोजित हुआ था। उस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्रसंघ के बैनर तले महिलाओं के लिए पेइचिंग घोषणापत्र को स्वीकार किया गया था। इसके तहत महिला विकास को लेकर कार्ययोजना बनाई गई। जिसका मुख्य सूत्र “समानता, विकास और शांति” रखा गया था। इसके जरिए महिलाओं की स्थिति में वैश्विक स्तर पर सुधार लाने में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भागीदारी को बढ़ाने की कोशिश  थी।  इस घोषणा पत्र में महिलाओं से जुड़ी उपलब्धियों की जानकारी तो है ही, समाज के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों में हासिल महिला अधिकारों की स्पष्ट व्याख्या है। जिसमें महिलाओं की समान भागीदारी का जिक्र भी है। जिससे यह भी पता चलता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और राजनीति जैसे प्रमुख क्षेत्रों में किस तरह महिलाओं को ताकत और समानता मिल सकती है। आज चीन में महिलाओं की जो स्थिति है, उससे पता चलता है कि तीन दशक पहले चीन की धरती पर महिलाओं के लिए जो पेइचिंग घोषणापत्र और कार्ययोजना अपनाई-बनाई गई, उसकी भावना के अनुरूप ही काम हो रहा है और ना सिर्फ चीन, बल्कि दुनिया भर में महिलाओं ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

दुनिया की दूसरी बड़ी आर्थिक महाशक्ति के रूप चीन ने महिला हितों के संदर्भ में उल्लेखनीय ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं, जिसका फायदा चीन की विकास की गति को भी मिला है। 2020 में, चीन ने मानव इतिहास में गरीबी के विरुद्ध सबसे बड़ी लड़ाई जीती। उसी वर्ष लगभग 69 करोड़ चीनी महिलाएँ अपेक्षाकृत समृद्ध हुईं और गरीबी रेखा से उपर मध्य वर्ग में पहुँचीं। संयुक्त राष्ट्र  ने अपने सतत विकास कार्यक्रम के तहत जहां 2030 तक गरीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, वहीं चीन ने इसे वक्त से पहले ही हासिल कर लिया। इसमें महिला उत्थान की बड़ी भूमिका रही। चीन की मातृ मृत्यु दर 1995 में जहां 61.9 प्रति लाख थी, वह घटकर 2024 में 14.3 प्रति लाख हो गई। यानी इस दिशा में 76.9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। महिला विकास की दिशा में यह आंकड़ा चीन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की ओर संकेत करता है।

संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में भी चीन ने महिलाओं के संदर्भ में बड़ी  कामयाबी प्राप्त की है। साल 2024 में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या 50.76 प्रतिशत रही है। यह आंकड़ा साल 1995 से 14.15 प्रतिशत से बहुत ज्यादा है। जाहिर है कि यह बढ़ोतरी तीन गुना से भी ज्यादा है। इसमें स्नातकोत्तर छात्राओं की संख्या 50.01 प्रतिशत रही है, जो 1995 से 22.43 प्रतिशत की तुलना में बेहद अधिक है। वर्तमान में, चीन दुनिया भर में महिला अधिकारों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

साल 2015 में, चीन और यूनेस्को ने मिलकर बालिका एवं महिला शिक्षा पुरस्कार की शुरूआत की थी, जिसने अब तक 19 देशों में 20 से अधिक परियोजनाओं को जड़ें जमाने में मदद की है। चीन ने स्प्रिंग बड परियोजना भी महिला शिक्षा को लेकर शुरू की है, माना जाता है कि यह लोक कल्याण मॉडल से प्रेरित है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बालिका शिक्षा में इसके जरिए चीन कई आर्थिक रूप से कमजोर देशों  मदद दे रहा है। 2023 में, स्प्रिंग बड प्रोजेक्ट को लड़कियों और महिलाओं की शिक्षा के लिए यूनेस्को पुरस्कार से सम्मानित किया गया, एक तरह से यह चीनी मॉडल की वैश्विक स्वीकार्यता को ही दर्शाता है। चीन सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2018 से, चीन ने विकासशील देशों में महिलाओं और बच्चों के लिए 100 से ज़्यादा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। विशेषकर महिला नेतृत्व उभारने के शैक्षणिक कार्यक्रम भी जारी किए गए हैं, जिसके तहत करीब 4,000 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

इन आंकड़ों के आलोक में कह सकते हैं कि साल 1995 में अंगीकृत पेइचिंग घोषणापत्र से लेकर 2025 में वैश्विक महिला शिखर सम्मेलन तक, 30 साल की अवधि में चीन ने महिला श्रम और शिक्षा को मान्यता देने और प्रतिष्ठित करने में बड़ी भूमिका निभाई है। 

(साभार—चाइना मीडिया ग्रुप ,पेइचिंग)  (लेखक— उमेश चतुर्वेदी)

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