
इंटरनेशनल डेस्क: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान इस समय समझौते के लिए काफी उत्सुक है और मध्य पूर्व में चल रहा तनाव जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि दुनिया में तेल की आपूर्ति बहुत ज्यादा है, जिसके कारण आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि वैश्विक बाजार में तेल की कमी नहीं है, बल्कि सप्लाई जरूरत से ज्यादा है। अगर मौजूदा हालात शांत होते हैं तो तेल के दाम तेजी से नीचे आ सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस पूरे विवाद को जल्द समाप्त करना चाहता है और ईरान भी समझौते के लिए तैयार दिखाई दे रहा है।
ईरान को लेकर अमेरिका में बढ़ी राजनीतिक बहस
इसी बीच अमेरिकी सीनेट में राष्ट्रपति की सैन्य शक्तियों को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी सीनेट ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन द्वारा पेश किया गया था। प्रस्ताव के समर्थन में कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी वोट दिया, जिससे यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है।
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कैलिफोर्निया से डेमोक्रेट सांसद एडम शिफ ने कहा कि यह कदम अमेरिका को ‘असंवैधानिक युद्ध’ में जाने से रोकने के लिए उठाया गया है। वहीं सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा कि अमेरिकी जनता लंबे समय तक चलने वाले युद्धों पर अरबों डॉलर खर्च नहीं करना चाहती।
खाड़ी देशों की अपील के बाद टला संभावित हमला
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी करते हुए बताया कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं ने अमेरिका से ईरान पर हमला न करने की अपील की थी। कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने क्षेत्र में शांति बनाए रखने और बातचीत जारी रखने की सलाह दी थी।
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर ली थी, लेकिन खाड़ी देशों की अपील और जारी वार्ता को देखते हुए फिलहाल इस योजना को रोक दिया गया। हालांकि ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका किसी भी समय कड़ा कदम उठा सकता है।
परमाणु हथियारों पर सख्त रुख
ट्रंप ने साफ कहा कि संभावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त यही होगी कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग और सेना को हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैनियल केन और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच समझौता होता है या हालात और ज्यादा गंभीर बनते हैं।
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