Last Updated: September 21, 2026

Dainik Savera Times Logo

Donald Trump ने H1-B वीज़ा नियमों में किया बदलाव, जानें भारतीयों पर क्या होगा इसका असर

September 20, 2025

Donald Trump ने H1-B वीज़ा नियमों में किया बदलाव, जानें भारतीयों पर क्या होगा इसका असर

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नया बड़ा कदम उठाया है, जिससे हजारों भारतीय IT पेशेवरों का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उनके ताज़ा फैसले के तहत, अब अमेरिकी कंपनियों को हर H-1B वीजा स्पॉन्सरशिप के लिए वार्षिक $100,000 (लगभग ₹83 लाख) का शुल्क अदा करना होगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव वीजा सिस्टम को पारदर्शी और कुशल बनाकर अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा करेगा।

H-1B वीजा का मकसद और बढ़ती आलोचना

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को दुनिया भर से कुशल पेशेवरों को हायर करने की अनुमति देता है, खासकर टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, साइंस और मैथ्स के क्षेत्रों में। हालांकि, इस वीजा प्रोग्राम पर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं कि यह अमेरिकी श्रमिकों के लिए नुकसानदेह है। आलोचकों का मानना है कि कंपनियां इसका इस्तेमाल सस्ते विदेशी श्रमिक लाने के लिए कर रही हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों पर असर पड़ता है।

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस स्टाफ सेक्रेटरी विल शार्फ ने बयान में कहा, “H-1B का मकसद उन चुनिंदा क्षेत्रों में काम करने वाले असाधारण प्रतिभाशाली लोगों को लाना है, जहां अमेरिकी वर्कफोर्स की कमी है। नए शुल्क के जरिए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस वीजा का दुरुपयोग न हो और केवल अत्यंत योग्य पेशेवर ही अमेरिका आएं।”

वहीं, वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने कहा, “अब बड़ी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग देकर उन्हें नौकरी पर नहीं रख सकेंगी, क्योंकि पहले उन्हें सरकार को भारी रकम चुकानी होगी। इससे अमेरिकी ग्रैजुएट्स को ज्यादा मौके मिलेंगे।”

भारत पर सबसे बड़ा असर

आंकड़े बताते हैं कि हर साल दिए जाने वाले H-1B वीजा में 71% भारतीय नागरिकों को मिलते हैं। ऐसे में यह नया शुल्क सीधे तौर पर भारतीय आईटी और टेक प्रोफेशनल्स को प्रभावित कर सकता है। माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, अमेजन जैसी कंपनियां भारत से बड़ी संख्या में टैलेंट को अमेरिका ले जाती हैं। लेकिन 1 लाख डॉलर के अतिरिक्त बोझ से कंपनियों को अब दो बार सोचना पड़ेगा कि वे किसे और क्यों स्पॉन्सर कर रही हैं।

‘गोल्ड कार्ड’ से अमीरों को राहत

ट्रंप ने एक नई योजना ‘गोल्ड कार्ड’ प्रोग्राम भी शुरू की है, जिसके तहत जो विदेशी नागरिक अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारी निवेश करते हैं, उन्हें ग्रीन कार्ड और वीजा में प्राथमिकता मिलेगी। अगर कोई व्यक्ति $1 मिलियन (₹8.4 करोड़) और कोई कंपनी $2 मिलियन (₹16.8 करोड़) देती है, तो उन्हें विशेष सुविधा मिलेगी। ट्रंप का दावा है कि इससे अमेरिकी टैक्स सिस्टम को मजबूती मिलेगी और राष्ट्रीय कर्ज घटेगा।

अमेरिका की बदली वीजा नीति: किस ओर जा रहा है रुख?

पिछले कुछ महीनों में अमेरिका ने वीजा नीतियों में कई बड़े बदलाव किए हैं। टूरिस्ट और बिजनेस वीजा के लिए $15,000 तक के सिक्योरिटी बॉन्ड की घोषणा के बाद अब H-1B वीजा पर यह भारी शुल्क यह दिखाता है कि ट्रंप प्रशासन विदेशी कामगारों को लेकर कड़ा रुख अपना रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय टैलेंट को अमेरिका जाने से रोक सकता है और अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक प्रतिभा की तलाश के लिए नए विकल्पों की ओर देखने पर मजबूर कर सकता है।

ये भी पढ़ें: वेस्ट एशिया मुद्दे पर संसद में हंगामा, BJP ने विपक्ष पर लगाया संसद को ‘बंधक’ बनाने का आरोप 

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें