Last Updated: September 23, 2026

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- ईरान अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा

June 16, 2026

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- ईरान अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा

इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ट्रंप के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच एक नया समझौता (MoU) तैयार किया गया है, जिसके तहत ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने पर सहमति जताई है। ट्रंप ने इस समझौते को मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना है कि यह समझौता भविष्य में दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

300 मिलियन डॉलर देने की खबर को बताया झूठ
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि अमेरिका इस समझौते के बदले ईरान को 300 मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह से झूठी और भ्रामक हैं। ट्रंप ने आरोप लगाया कि यह अफवाह उनके राजनीतिक विरोधियों और डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े लोगों द्वारा फैलाई गई है। अपने संदेश में ट्रंप ने लिखा, “ईरान ने परमाणु हथियार न रखने पर सहमति जताई है। यह खबर कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर दे रहा है, पूरी तरह फर्जी है।”

समझौते की मुख्य शर्तें क्या हैं?
ट्रंप प्रशासन के अनुसार, इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में किसी भी तरह का परमाणु हथियार विकसित न कर सके। समझौते के तहत ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर पूरी पारदर्शिता दिखानी होगी। अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को परमाणु ठिकानों की जांच की अनुमति देनी होगी। यूरेनियम के भंडार और संवर्धन गतिविधियों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।  क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े अपने वादों को पूरा करना होगा। कट्टरपंथी गतिविधियों और आतंकवाद को समर्थन देने से बचना होगा।

प्रतिबंध हटाने का फैसला ईरान के सहयोग पर निर्भर
अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध तुरंत नहीं हटाए जाएंगे। ईरान अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेगा। अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में सही जानकारी देगा। यूरेनियम के भंडार को खत्म करने की दिशा में कदम उठाएगा। क्षेत्रीय सुरक्षा संबंधी प्रतिबद्धताओं का पालन करेगा। यदि ईरान इन सभी शर्तों को पूरा करता है, तो उसे वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से बेहतर तरीके से शामिल होने का अवसर मिल सकता है।

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया समर्थन
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ट्रंप की इस पहल का समर्थन किया है। वेंस ने कहा कि ट्रंप की शांति स्थापित करने की कोशिशें सफल होती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने कहा कि इस समझौते का सबसे बड़ा उद्देश्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है। वेंस के अनुसार, अमेरिका तभी प्रतिबंधों में ढील देगा जब ईरान अपने यूरेनियम भंडार को समाप्त करेगा और अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण के लिए पूरी तरह तैयार होगा।

जिनेवा में होगा आधिकारिक हस्ताक्षर
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस समझौते पर इस सप्ताह के अंत में स्विट्जरलैंड के जिनेवा शहर में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में कई देशों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें स्विट्जरलैंड, पाकिस्तान, कतर शामिल हैं। ट्रंप ने इस दस्तावेज को बेहद प्रभावशाली और ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद इसे सार्वजनिक कर दिया जाएगा ताकि दुनिया इसके प्रावधानों को देख सके।

नेतन्याहू ने क्या कहा
इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नेतन्याहू ने कहा कि चाहे कोई समझौता हो या न हो, इजरायल कभी भी ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कई मुद्दों पर उनकी और ट्रंप की राय एक जैसी होती है, लेकिन कुछ मामलों में दोनों के विचार अलग भी हो सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर हमेशा दृढ़ रहेगा और जरूरत पड़ने पर अमेरिका के सामने अपनी बात मजबूती से रखेगा।

सैन्य कार्रवाई के सवाल पर चुप्पी
जब नेतन्याहू से पूछा गया कि क्या इजरायल भविष्य में ईरान पर अकेले सैन्य कार्रवाई कर सकता है या लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ स्वतंत्र अभियान चला सकता है, तो उन्होंने इस विषय पर कोई स्पष्ट जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करना उचित नहीं होगा।

 

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