प्रत्येक वर्ष मार्च का महीना चीन की राजधानी बीजिंग में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बनता है, जिसे “दो सत्र” के नाम से जाना जाता है। यह आयोजन, जिसमें राष्ट्रीय जन प्रतिनिधि सभा (NPC) और चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (CPPCC) के सत्र शामिल हैं, केवल एक विधायी औपचारिकता नहीं है, बल्कि वह मंच है जहां देश की रणनीतिक लक्ष्यों को ठोस नीतियों में बदला जाता है। यह वह महत्वपूर्ण खिड़की भी है जिससे विदेशी मीडिया और विशेषज्ञों को चीन की भावी नीतियों और रणनीतियों की जानकारी मिलती है। वर्ष 2026 का यह सत्र विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026–2030) के शुभारंभ का प्रतीक है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और असमान आर्थिक सुधार के इस युग में, विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के नीतिगत निर्णयों का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ता है। मार्च 2026 में संपन्न हुए दो सत्रों ने चीन के भविष्य के विकास पथ के लिए एक स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया है। इस सत्रों का आयोजन सिर्फ एक वार्षिक बैठक नहीं है, बल्कि यह चीन की रणनीतिक सोच और दीर्घकालिक योजना का एक व्यावहारिक प्रदर्शन है। इस वर्ष, यह सत्र और भी महत्वपूर्ण हो गया क्योंकि इसने 15वीं पंचवर्षीय योजना की नींव रखी, जो अगले पांच वर्षों के लिए देश के सामाजिक-आर्थिक विकास का मार्गदर्शन करेगी। चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग द्वारा प्रस्तुत सरकारी कार्य रिपोर्ट ने आगामी वर्ष के लिए एक महत्वाकांक्षी लेकिन सतर्क आर्थिक खाका प्रस्तुत किया है। इस रिपोर्ट का केंद्रबिंदु आगामी वर्षों के लिए चीन की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लक्ष्य 4.5 से 5 प्रतिशत के बीच रखा जाना था। यह लक्ष्य, जो पिछले दशकों की दोहरे अंकों की वृद्धि दरों से कम है, चीन की एक परिपक्व अर्थव्यवस्था के रूप में स्थिति को दर्शाता है। बीते कई दशकों के अनुभवों के आधार पर, यह लक्ष्य केवल एक संख्या मात्र नहीं है, बल्कि एक सचेत रणनीतिक सोच है जो स्थिरता, लचीलापन और उच्च-गुणवत्ता वाले विकास को प्राथमिकता देता है। यह जानना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है कि आज 5% की वृद्धि दर भी एक मध्यम आकार की अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन के बराबर है, जो वैश्विक विकास में चीन के निरंतर महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करता है।
इस व्यापक आर्थिक लक्ष्य के साथ-साथ, कार्य रिपोर्ट ने कई विस्तृत सामाजिक-आर्थिक उद्देश्यों को भी रेखांकित किया। वैश्विक आर्थिक अनिश्चिंतता के दौर में भी, 12 मिलियन से अधिक नए शहरी रोजगार सृजित करने और सर्वेक्षणित बेरोजगारी दर को लगभग 5.5% पर बनाए रखने का लक्ष्य सरकार की सामाजिक स्थिरता और नागरिक कल्याण के प्रति गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह प्रतिबद्धता उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को लगभग 2% पर रखने के लक्ष्य में भी परिलक्षित होती है, जो मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखने और उपभोग के लिए एक स्थिर वातावरण बनाने के प्रति सरकार के सतर्क दृष्टिकोण को इंगित करता है। घरेलू मांग पर यह जोर, सक्रिय वित्तीय नीतियों और विवेकपूर्ण मौद्रिक नीतियों द्वारा समर्थित है, जो उपभोग को प्रोत्साहित करने, सामाजिक कल्याण को बढ़ाने और समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। कुल मिलाकर, 2026 का आर्थिक एजेंडा मात्र वृद्धि दर के बजाय आर्थिक वृद्धि की संरचना और गुणवत्ता पर केंद्रित है।
15वीं पंचवर्षीय योजना का मसौदा अगले पांच वर्षों के लिए एक दूरदर्शी रणनीति प्रस्तुत करता है, जिसका केंद्रबिंदु “नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियाँ” की अवधारणा है। यह वैचारिक प्रतिपादन तकनीकी प्रगति, डेटा के गहन उपयोग और हरित नवाचार द्वारा संचालित विकास पर जोर देता है। यह योजना कई परस्पर संबंधित स्तंभों के इर्द-गिर्द बनाई गई है, जिसका उद्देश्य एक लचीली और भविष्य-उन्मुख अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है।
इन स्तंभों में सबसे महत्वपूर्ण है तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता। कभी दुनिया की फैक्ट्री कहा जाने वाला यह देश, अंतर्राष्ट्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के इस युग में, उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक और तकनीकी स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह महत्वाकांक्षा केवल एक लक्ष्य नहीं है, बल्कि इसमें एयरोस्पेस, बायोमेडिसिन, क्वांटम कंप्यूटिंग, और उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में ठोस निवेश और विस्तार शामिल है। इन रणनीतिक निवेशों से यह पता चलता है कि चीन अल्पकालिक लाभों की अपेक्षा दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश पर आधारित एक नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है।
दूसरा महत्वपूर्ण स्तंभ शिक्षा, विज्ञान और प्रतिभाओं के विकास का एकीकरण है। चीन अपनी तकनीकी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष लाखों प्रतिभाओं को विभिन्न विश्वविद्यालयों में दाखिला देता है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा विज्ञान, प्रौद्योगिकी, और इंजीनियरिंग विषयों में है। यह व्यापक प्रतिभाओं का स्त्रोत उद्यमशीलता और औद्योगिक परिवर्तन के लिए आधार प्रदान करता है, और यह सुनिश्चित करता है कि देश न केवल नई तकनीकों का विकास कर सके, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से व्यावसायिक रूप भी दे सके और उनका विस्तार भी कर सके।
तीसरा, बुनियादी ढांचे में निवेश को रणनीतिक रूप से उभरती अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए पुनः संरेखित किया जा रहा है। वर्ष 2026 में, सरकार के कार्य रिपोर्ट में यह दिखाया गया है कि 7 ट्रिलियन युआन से अधिक की राशि पावर ग्रिड और विशेष रूप से डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में आवंटित की जाएगी। इन आधारभूत संरचनाओं का विकास डिजिटल और हरित परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण समर्थन प्रदान करेगा, लेन-देन की लागत को कम करेगा और पूरे देश में उत्पादकता बढ़ाएगा।
2026 के लिए रणनीतिक दिशा हाल की उपलब्धियों की एक मजबूत नींव पर आधारित है। 2025 के आंकड़े इस संरचनात्मक परिवर्तन की सफलता के प्रारंभिक संकेत प्रदान करते हैं। 140 ट्रिलियन युआन से अधिक के आर्थिक उत्पादन और 5% की वृद्धि के साथ, चीन ने न केवल आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है, बल्कि लगभग 12.7 मिलियन नए शहरी रोजगार भी सृजित किए। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि की संरचनात्मक परिवर्तनों के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
चीन की घरेलू रणनीति के महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय परिणाम हैं। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्था भू-राजनीतिक बदलावों और तकनीकी व्यवधानों से जूझ रही है, चीन स्वयं को स्थिरता के एक स्तंभ के रूप में स्थापित कर रहा है। घरेलू उपभोक्ता बाजार के विस्तार और उन्नयन पर जोर का प्रभाव अन्य क्षेत्रों में भी स्पष्ट परिलक्षित हो रहा है। पेंशन और बाल देखभाल सब्सिडी जैसी नीतियां, जिनका उद्देश्य सावधानीपूर्वक बचत को कम करना और घरेलू उपभोग को प्रोत्साहित करना है, एक शक्तिशाली घरेलू मांग इंजन के रूप में कार्य कर सकती हैं।
वर्ष 2025 में, चीन की कुल आयात और निर्यात मात्रा रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंच गई, जिसमें निर्यात में 6.1% की वृद्धि हुई। चीन के व्यापारिक भागीदार देशों में आसियान, यूरोपीय संघ और बेल्ट एंड रोड (BRI) पहल में भाग लेने वाले देश शामिल हैं। “पड़ोस-प्रथम” विदेश नीति ने विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशिया में, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और डेटा एकीकरण में लक्षित निवेश के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क को महत्वपूर्ण समर्थन देती है। गहरे व्यापार, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला संबंधों को बढ़ावा देकर, एक मजबूत चीनी अर्थव्यवस्था क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिए उत्प्रेरक का काम करती है, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच स्थिरता प्रदान करती है।
2026 के दो सत्र और 15वीं पंचवर्षीय योजना का अनावरण चीन के विकास मॉडल के निरंतर विकास पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह मॉडल वैचारिक बदलावों की तुलना में रणनीतिक निरंतरता और व्यावहारिक दीर्घकालिक योजना को प्राथमिकता देता है। यह दर्शाता है कि एक प्रभावी नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र कोई आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि निरंतर अनुसंधान एवं वित्तपोषण, मजबूत शिक्षा-उद्योग सहयोग और संस्थागत समन्वय के माध्यम से बनाया जाता है।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में, चीन अपना ध्यान तीव्र वृद्धि दर से हटाकर गुणवत्ता, मजबूती और स्थिरता पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे यह न केवल अपनी दीर्घकालिक समृद्धि के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहा है, बल्कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता में एक प्रमुख और जिम्मेदार योगदानकर्ता के रूप में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है। जैसे-जैसे चीन “विश्व की फैक्ट्री” से उन्नत इंजीनियरिंग और हरित प्रौद्योगिकी में एक अग्रणी नेतृत्वकर्ता के रूप में परिवर्तित हो रहा है, इसके रणनीतिक निर्णय आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार प्रवाह, निवेश पैटर्न और विकास गलियारों को प्रभावित करते रहेंगे। भविष्य का विकास मार्ग आधुनिकीकरण, लचीलापन और भविष्य के उद्योगों में अग्रणी स्थिति सुनिश्चित करने के प्रति एक दृढ़ प्रतिबद्धता द्वारा परिभाषित है। यह दृष्टिकोण, जो नीति निरंतरता, तकनीकी महत्वाकांक्षा, मानव पूंजी विकास और आधुनिक बुनियादी ढांचे के स्तंभों पर टिका है, चीन के विकास पथ की एक व्यापक और सुसंगत तस्वीर प्रस्तुत करता है।
चीन की तीव्र आर्थिक वृद्धि ने दुनिया के सामने एक सफल उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास, तकनीकी नवाचार, सतत विकास और बाजार की जीवंतता पर विशेष जोर दिया गया है। भारत और चीन एक दूसरे के साथ सहयोग को बढ़ाएगा और उसके विकास मॉडल से सीखते हुए आपसी समृद्धि को बढ़ावा देगा। दोनों एशियाई देश एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर और अपनी-अपनी श्रेष्ठताओं का लाभ उठाकर वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लोगों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि एक न्यायसंगत अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण में भी योगदान देगा।
(लेखक- डॉ विकास कुमार सिंह,साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)
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