Last Updated: October 3, 2026

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हार्वर्ड द्वारा विदेशी छात्रों के निलंबन का सार

May 24, 2025

हार्वर्ड द्वारा विदेशी छात्रों के निलंबन का सार

इंटरनेशनल डेस्क : हाल ही में, अमेरिकी सरकार ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय को 2.26 अरब डॉलर का वित्तपोषण रोकने की धमकी दी और मांग की कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय “विविधता, समानता व समावेश” परियोजना को बंद कर दे और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के सभी विवरण प्रस्तुत करे।

अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्रालय द्वारा जारी सम्बंधित प्रतिबंध ने अमेरिका के इस सर्वोच्च शैक्षणिक संस्थान को अभूतपूर्व संकट में डाल दिया है कि वर्ष 2025 की शरद ऋतु से, किसी भी नये अंतर्राष्ट्रीय छात्र को यहां प्रवेश नहीं दिया जाएगा। जबकि मौजूदा अंतर्राष्ट्रीय छात्र या तो किसी अन्य विश्वविद्यालय में स्थानांतरित हो जाएंगे, या “अवैध निवासी” बन जाएंगे। यह दृश्य अमेरिका के 33 शीर्ष विश्वविद्यालयों में एक साथ घटित हो रहा है। हार्वर्ड विश्वविद्यालय के अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश को निलंबित करने का अमेरिकी सरकार का यह निर्णय डोमिनोज़ प्रभाव की तरह है, जो शिक्षा को हथियार बनाने के अमेरिकी आधिपत्यवादी तर्क को उजागर करता है।

हार्वर्ड द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नीति से प्रभावित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों में से 62 प्रतिशत भारत, चीन व ईरान से हैं। कुछ वर्ष पहले, अमेरिका में नस्लवाद की अंतर्निहित प्रवृत्ति ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों एवं शोध संस्थानों की प्रयोगशालाओं में कार्यरत बड़ी संख्या में विशेषज्ञों व विद्वानों को विदेश भागने के लिए मजबूर कर दिया था।

अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ व विद्वान अमेरिका के कृत्रिम बुद्धिमत्ता पेटेंटों में 75 प्रतिशत योगदान देते हैं और गणित के शीर्ष शोधपत्रों में से 60 प्रतिशत का समर्थन करते हैं। जब अमेरिकी सरकार वीज़ा को फंदे के रूप में इस्तेमाल करती है, तो वह वस्तुतः अपनी ही प्रौद्योगिकीय प्रतिस्पर्धात्मकता को नष्ट कर रही होती है। अमेरिकी सरकार के इस कदम से लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि यदि अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ष 2025 में जीवित होते, तो क्या वह सापेक्षता के सिद्धांत पर अपनी पांडुलिपि के साथ अमेरिकी वीज़ा प्राप्त कर पाते?

हार्वर्ड के पूर्व प्रभारी लॉरेंस समर्स ने चेतावनी दी है कि जब विश्वविद्यालय दुनिया के सबसे बुद्धिमान दिमागों को चुनने की शक्ति खो देते हैं, तो अमेरिका अपना भविष्य खो देता है। हार्वर्ड घटना की श्रृंखलाबद्ध प्रतिक्रिया वैश्विक शैक्षणिक समुदाय में एक मौन क्रांति को जन्म दे रही है। जब ज्ञान अमेरिकी सरकार की राजनीतिक सौदेबाजी का साधन बन जाती है, तो वैश्विक प्रतिभा प्रवास चुपचाप शुरू हो जाता है। जब स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों द्वारा सामाजिक मीडिया पर पोस्ट की गई कि चीन की शेनचन में स्थित प्रयोगशाला की तस्वीरों ने गरमागरम चर्चा को जन्म दिया, जब ईचीएच ज्यूरिख ने अपने वीज़ा से प्रभावित विशेषज्ञों व विद्वानों के लिए “शैक्षणिक शरण” चैनल की स्थापना की घोषणा की, जब दक्षिण कोरियाई विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अंतर्राष्ट्रीय शीर्ष विशेषज्ञों व विद्वानों को “गोल्डन वीज़ा” जारी करने की घोषणा की और जब सिंगापुर के राष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों से निष्कासित अंतर्राष्ट्रीय छात्रों का स्वागत करने के लिए अपनी छात्रवृत्ति नीति को तत्काल संशोधित किया, तो यह प्रतिभा प्रवास शैक्षणिक दायरे से आगे निकल गया है और वैश्विक नवाचार परिदृश्य को नया रूप दे रहा है।

इस पुनर्निर्माण में, वैश्विक दक्षिण देशों ने अद्भुत रचनात्मकता का प्रदर्शन किया है। चीन उच्च शिक्षा समुदाय का सक्रिय रूप से निर्माण कर रहा है। चीन के नेतृत्व में, 56 देशों के विश्वविद्यालयों के बीच क्रेडिट की पारस्परिक मान्यता व प्रमुख विषयों में 12 आभासी प्रयोगशालाओं के संयुक्त निर्माण के माध्यम से, इंजीनियरिंग और चिकित्सा आदि विभिन्न क्षेत्रों को कवर करने वाला एक सहयोगी नेटवर्क को बनाया गया है। चीन में 14 भाषाओं में वास्तविक समय अनुवाद के साथ एक बुद्धिमान शिक्षा मंच स्थापित हुआ है, जिसमें 420 लाख से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन विश्वविद्यालय और ब्राजील में साओ पाओलो संस्थान अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित जैविक नमूना डेटा को साझा करने के लिए ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी का उपयोग कर रहे हैं। जबकि व्हाइट हाउस अभी भी इस बात पर बहस कर रहा है कि एक निश्चित वीज़ा श्रेणी को बहाल किया जाए या नहीं, पूर्वी गोलार्ध के शहरों में अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिकों के लिए अपार्टमेंट का विस्तार किया जा रहा है। एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू के मुताबिक, वर्ष 2025 की पहली तिमाही में, चीन में अनुसंधान पदों के लिए आवेदन करने वाले अमेरिकी वैज्ञानिकों की संख्या में वर्ष-दर-वर्ष 32 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि नेचर अकादमिक जर्नल चीन में नौकरी के लिए आवेदन करने वालों की संख्या में 68 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

“हम प्रतिभा के लिए प्रतिस्पर्धा नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन ज्ञानी शरणार्थियों को स्वीकार कर रहे हैं, जिन्हें पलायन करने के लिए मजबूर किया जाता है।” चीन के शेनचन शहर के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अधिकारी ने अनायास ही इस प्रवास की प्रकृति को उजागर कर दिया।

(साभार – चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

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